OP Nayyar Death Anniversary: OP Nayyar थे Bollywood के असली 'Rebel', अपनी शर्तों पर संगीत बनाते और जिंदगी जीते थे

आज ही के दिन यानी की 28 जनवरी को संगीतकार ओपी नैयर का निधन हो गया था। ओपी नैयर के गाने आज भी लगभग लोगों को सुनना पसंद है। उनको इंडस्ट्री का बेजोड़ संगीतकार और बॉलीवुड का फ्यूजन किंग भी कहा जाता था।
ओपी नैयर एक ऐसे संगीतकार रहे, जिनके गाने गाने आज भी करीब-करीब हर घर में सुने जाते हैं। आज ही के दिन यानी की 28 जनवरी को ओपी नैयर का निधन हो गया था। इनको सबसे अलहदा संगीतकारों में शुमार किया जाता है। उनके गानों का क्रेज सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी ज्यादा था। ओपी नैयर को बेजोड़ संगीतकार और बॉलीवुड का फ्यूजन किंग भी कहा जाता था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर ओपी नैयर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
पाकिस्तान के लाहौर में 16 जनवरी 1926 को ओपी नैयर का जन्म हुआ था। इनका पूरा नाम ओंकार प्रसाद नैयर है। बताया जाता है कि ओपी नैयर विद्रोही स्वभाव के थे और वह संगीत और जिंदगी अपनी शर्तों पर जीना पसंद करते थे।
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कई हिट गाने दिए
साल 1952 में ओपी नैयर ने अपने करियर की शुरूआत की थी। इस दौरान उनको गाने के लिए 12 रुपए मिले थे। फिर उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट गाने देने शुरू किए। ओपी नैयर के गाने इतने अच्छे होते थे कि लोग उनके गानों को काफी ज्यादा पसंद करते थे। यही कारण रहा कि ओपी ने फिल्म में म्यूजिक देने के लिए 1 लाख रुपए तक चार्ज करना शुरूकर दिया था।
बता दें कि उस दौर में ओपी नैयर सबसे अधिक पैसे चार्ज करने वाले संगीतकार बन गए थे। इसी बीच ओपी नैयर की गुरुदत्त से दोस्ती हो गई थी। ओपी नैयर ने 50-60 के दशक में इतने कामयाब गाने बनाए कि उनको किसी एक चीज में बांधना मुमकिन नहीं है। उनके हिट गानों में 'ले के पहला पहला प्यार', 'उड़े जब-जब जुल्फें तेरी', 'बाबूजी धीरे चलना' और 'ये देश है वीर जवानों का' आज भी लोग सुनना पसंद करते हैं।
लता मंगेशकर से विवाद
ओपी नैयर का विवादों से भी गहरा नाता रहा है। ओपी और लता मंगेशकर के विवाद के किस्से काफी मशहूर रहे। ओपी नैयर ने यह तय किया था कि वह लता मंगेशकर के साथ कभी काम नहीं करेंगे। वह हमेशा कहते थे कि लता मंगेशकर की आवाज में पाकीजगी थी और उनको शोखी की जरूरत थी और यह शोखी आशा भोंसले और शमशाद बेगम की आवाज में ज्यादा थी। ओपी नैयर की कई लोगों से दुश्मनी थी, जिनमें से एक मोहम्मद रफी भी हैं।
मृत्यु
ओपी ने सिनेमा को कई बेहतरीन गाने दिए, लेकिन उन पर विद्रोही और अपरंपरागत संगीतकार होने का तमगा भी लगा। लेकिन ओपी नैयर ने कभी इस बात का मलाल नहीं किया। लेकिन ओपी नैयर की जिंदगी का आखिरी सफर कुछ खास अच्छा नहीं रहा। बताया जाता है कि वह आखिरी समय में अकेले रह गए थे। वहीं 28 जनवरी 2007 को 81 साल की उम्र में ओपी नैयर का निधन हो गया था।
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