Shakuntala Devi Birth Anniversary: मानव कंप्यूटर के नाम से फेमस थीं शकुंतला देवी, पलक झपकते ही हल कर देती थीं मुश्किल गणनाएं

Shakuntala Devi
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आज ही के दिन यानी की 04 नवंबर देश की मशहूर गणितज्ञ और 'मानव कंप्यूटर' के नाम से फेमस शकुंतला देवी का जन्म हुआ था। बचपन से ही शकुंतला देवी की गणना करने की अद्भुत क्षमता दिखाई देने लगी थी। उन्होंने अपनी इस असाधारण क्षमता ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था।

देश की मशहूर गणितज्ञ और 'मानव कंप्यूटर' के नाम से पहचानी जाने वाली शकुंतला देवी का आज ही के दिन यानी की 04 नवंबर को जन्म हुआ था। शकुंतला देवी को यह उपाधि इसलिए मिली थी, क्योंकि वह जटिल से जटिल गणनाओं को पलक झपकते ही अपने दिमाग से हल कर देती थीं। शकुंतला देवी की इस असाधारण क्षमता ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर शकुंतला देवी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

बेंगलुरु में 04 नवंबर को शकुंतला देवी का जन्म हुआ था। वह एक कन्नड़ ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखती थीं। हालांकि उनका बचपन काफी आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता था। उनके पिता एक सर्कस में काम करते थे और करतब दिखाकर परिवार का गुजारा करते थे। शकुंतला देवी के पिता की इतनी कमाई नहीं थी कि उनके परिवार की सभी जरूरतें पूरी हो पाएं।

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ऐसे में आर्थिक परेशानियों की वजह से शकुंतला देवी को औपचारिक शिक्षा भी नहीं मिली। 10 साल की उम्र में सेंट थेरेसा कॉन्वेंट, चामराजपेट में उनका एडमिशन पहली क्लास में कराया गया था। लेकिन स्कूल की फीस न भर पाने के कारण महज 3 महीने बाद उनका नाम स्कूल से हटा दिया गया था।

असाधारण प्रतिभा

बचपन से ही शकुंतला देवी की गणना करने की अद्भुत क्षमता दिखाई देने लगी थी। उनहोंने सिर्फ 3 साल की छोटी उम्र में संख्याओं के साथ असाधारण समझ का परिचय देना शुरूकर दिया। एक बार शकुंतला देवी अपने पिता के साथ ताश खेल रही थीं। इस बीच उन्होंने अपनी गणितीय प्रतिभा दिखाई। उनके पिता ने इस खास क्षमता को पहचान लिया और उनको आगे बढ़ाने में मदद की।

समय के साथ शकुंतला देवी की प्रतिभा बढ़ती है। अन्नामलाई यूनिवर्सिटी और मैसूर यूनिवर्सिटी में आयोजित हुए कार्यक्रमों के जरिए शकुंतला देवी की गणना क्षमता लोगों के सामने आई। जब उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था, तो उस समय शकुंतला देवी की उम्र महज 6 साल थी। फिर साल 1944 में शकुंतला देवी अपने पिता के साथ लंदन गईं और उनकी प्रतिभा के चर्चे धीरे-धीरे लंदन के साथ-साथ अमेरिका और यूरोप में भी होने लगी।

प्रतिभा ने दुनिया को कर दिया हैरान

शकुंतला देवी की याददाश्त और गणना करने की क्षमता अद्भुत थी। वह पिछली सदी की किसी डेट या दिन के बारे में पूछे जाने पर फौरन जवाब दे देती थीं। उनकी गणना की रफ्तार इतनी ज्यादा तेज होती थी, कि कई मौकों पर उन्होंने कंप्यूटर को भी पीछे छोड़ दिया। साल 1977 में अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जब शकुंतला देवी से 201 का 23वां घात निकालने के लिए कहा गया, तो उन्होंने बिना पेन और पेपर के सिर्फ 50 सेकंड में इसका जवाब दे दिया।

इसके अलावा 18 जून 1980 को शकंतुला देवी ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज में 3 अंकों वाली दो संख्याओं का गुणनफल केवल 26 सेकंड में बताकर सबको चौंका दिया था। शकुंतला देवी के इस शानदार प्रदर्शन ने उनकी पहचान को पूरी दुनिया में मजबूत किया था।

मृत्यु

गणित की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली शकुंतला देवी का बेंगलुरु में 21 अप्रैल 2013 को निधन हो गया था।

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