उत्तर भारतीयों से माफी मांग कर ही राजनीति में आगे बढ़ सकते हैं राज ठाकरे

उत्तर भारतीयों से माफी मांग कर ही राजनीति में आगे बढ़ सकते हैं राज ठाकरे
ANI

महाराष्ट्र की राजनीति से इतर उत्तर प्रदेश में भी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे का विरोध हो रहा है। राज ठाकरे को उनके उत्तर भारतीयों के खिलाफ दिए गए बयान याद दिलाए जा रहे हैं। इसीलिए राज ठाकरे के दौरे का विरोध नेता ही नहीं अयोध्या के साधु संत भी कर रहे हैं।

प्रभु राम की नगरी अधोध्या में एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ गई है। यह हलचल अगले माह महाराष्ट्र के कट्टर विरोधी दो दिग्गज नेताओं के अयोध्या कार्यक्रम से बढ़ी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे 5 जून को अयोध्या आ रहे हैं जबकि उनके भतीजे और उद्धव ठाकरे के मंत्री पुत्र और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे 10 जून को अयोध्या आएंगे। महाराष्ट्र के कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले भी जल्द ही अयोध्या में नजर आ सकते हैं। मिली खबर के मुताबिक अयोध्या के दशरथ गद्दी के महंत बृज मोहन दास ने नाना पटोले को अयोध्या आने का न्योता दिया है। महंत ने महाराष्ट्र कांग्रेस के कार्यालय में जाकर नाना पटोले से मुलाकात भी की है। हालांकि पटोले की अयोध्या यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है। बता दें कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पोते रोहित पवार भी पिछले दिनों अयोध्या आकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं। चर्चा यह भी है कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के अयोध्या आने का कार्यक्रम भी बनाया जा रहा है। महाराष्ट्र में हिन्दुत्व की सियासी जंग अयोध्या में मुखर होकर दिखाई दे रही है तो दूसरी तरफ मनसे और शिवसेना नेताओं के दौरे को लेकर पोस्टर वॉर भी शुरू हो गई है। शिवसेना ने अपने पोस्टरों में लिखा है, 'असली आ रहा है, नकली से सावधान।’ शिवसेना राज ठाकरे को नकली राम भक्त बता रही है।

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उधर, महाराष्ट्र की राजनीति से इतर उत्तर प्रदेश में भी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे का विरोध हो रहा है। राज ठाकरे को उनके उत्तर भारतीयों के खिलाफ दिए गए बयान याद दिलाए जा रहे हैं। इसीलिए राज ठाकरे के दौरे का विरोध नेता ही नहीं अयोध्या के साधु संत भी कर रहे हैं। कैसरगंज से बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी राज ठाकरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि पहले उत्तर भारतीयों से राज ठाकरे माफी मांगें और उसके बाद वह अयोध्या आएं। बाबरी पक्ष के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी भी साधू संतों और बीजेपी नेताओं के सुर में सुर मिलाते हुए मनसे प्रमुख राज ठाकरे के अयोध्या दौरे का विरोध कर रहे हैं। हाल ही में हिन्दुत्व को लेकर आक्रामक हुए राज ठाकरे के अयोध्या दौरे को अगले वर्ष होने वाले नगर निकाय और 2024 में होने वाले महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनैतिक पंडितों का कहना है कि शिवसेना के बीजेपी से दूरी बना लेने के बाद बीजेपी को महाराष्ट्र में नये साथी की तलाश है और इसके लिए उसे राज ठाकरे सही विकल्प लग रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने हाल ही में मस्जिदों पर लाउडस्पीकर का मुद्दा उठाया और जवाब में हनुमान चालीसा के पाठ का ऐलान किया था। उसके बाद से महाराष्ट्र में हिंदुत्व का मुद्दा चरम पर पहुंच गया है। बीजेपी आलाकमान महाराष्ट्र में राज ठाकरे को शिवसेना प्रमुख के समानांतर हिन्दुत्व के नये चेहरे के रूप में पेश करना चाहती है। हिन्दुत्व की अलख जगाने के लिए ही ठाकरे लाउडस्पीकर पर अजान जैसे संवेदनशील मुद्दों को हवा दे रहे हैं। अयोध्या आगमन भी इसी का एक हिस्सा है, लेकिन राज ठाकरे के लिए तब तक महाराष्ट्र की सत्ता का रास्ता आसान नहीं लगता है जब तक कि वह उत्तर भारतीयों को लेकर दिए गए विवादित बयान से माफी मांग कर किनारा नहीं कर लेते हैं।

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महाराष्ट्र में मुम्बई, नासिक, पुणे, नागपुर, अमरावती सहित कई ऐसे जिले हैं, जहां बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय वोटर हैं जो किसी भी चुनाव में निर्णायक साबित होते हैं। अभी तक इन वोटरों पर बीजेपी का दबदबा है, यदि भविष्य में बीजेपी के साथ राज ठाकरे आते हैं तो राज की उत्तर भारतीय विरोधी छवि का नुकसान बीजेपी को भी उठाना पड़ सकता है। इसीलिए राज ठाकरे अपनी छवि सुधारना चाहते हैं। हो सकता है कि अयोध्या दौरे से पूर्व वह उत्तर भारतीयों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट भी कर दें।  

    

बात शिवसेना नेताओं के अयोध्या दौरे की की जाए तो उसकी अपनी मजबूरी है। दरअसल, शिवसेना के एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद से शिवसेना हिन्दुत्व को लेकर बैकफुट पर नजर आ रही है। क्योंकि एनसीपी हो या कांग्रेस, दोनों ही दल हमेशा से स्वयं को सेक्युलर दिखाने की कोशिश करते आए हैं। इसीलिए इन दोनों के साथ सरकार बनाने के बाद से शिवसेना की वह हिंदुत्व वाली धार कमजोर होती दिख रही है, जिस पर महाराष्ट्र में कभी उसका एकाधिकार हुआ करता था। इसी खाई को पाटने के लिए शिवसेना अयोध्या आकर अपनी हिन्दुत्व वाली पुरानी छवि मुखर करना चाहती है। वैसे शिवसेना का अयोध्या से लगाव पुराना नहीं है। एक समय था जब शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे छाती ठोंक कर कहा करते थे कि 1992 में अयोध्या में रामजन्म भूमि पर बने विवादित ढांचे को शिवसैनिकों ने गिराया था। मगर अब उद्धव ठाकरे यह बात कहने से कतराते हैं।

-अजय कुमार