भरोसे के रिश्तों के कत्ल से कांपता समाज
मोबाइल संस्कृति और डिजिटल संसार ने इस संकट को और जटिल बनाया है। मोबाइल फोन, जो कभी दूरियों को समाप्त करने का माध्यम था, आज अनेक मामलों में षडयंत्र, छल और अपराध का साधन बनता जा रहा है। सोशल मीडिया ने तुलना, उपभोगवाद, त्वरित सुख और आभासी संबंधों को बढ़ावा दिया है।



























































