Uddhav सेना में पीढ़ी परिवर्तन का संकेत, क्या अब Aditya Thackeray संभालेंगे कमान

Thackeray
@AUThackeray
अभिनय आकाश । Jun 26 2026 6:15PM

राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ने वाले नेता असल मायने में बागी नहीं थे। उन्होंने तर्क दिया कि यह शब्द भगत सिंह और सुखदेव जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि उन नेताओं के लिए जो पैसे और सत्ता के लिए दूसरी पार्टी में चले गए।

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी में टूट-फूट के बावजूद वह मज़बूत बनी हुई है और आदित्य ठाकरे में पार्टी का नेतृत्व करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को धीरे-धीरे पार्टी की ज़्यादा ज़िम्मेदारी और कमान संभालनी चाहिए। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे उन निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करने वाले हैं जिनका प्रतिनिधित्व करने वाले छह सांसद हाल ही में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली प्रतिद्वंद्वी शिवसेना में शामिल हो गए थे। इस दौरे से पहले समाचार एजेंसी PTI से बात करते हुए राउत ने आरोप लगाया कि उन्होंने पैसे, सत्ता और सुरक्षा के लिए पाला बदला। उन्होंने कहा कि इस दौरे का मकसद उन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं और कार्यकर्ताओं को सीधे तौर पर पार्टी का पक्ष समझाना है। पार्टी में आदित्य ठाकरे की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर राउत ने कहा अगली पीढ़ी को धीरे-धीरे ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। हम कितने सालों तक काम करते रहेंगे? हम 40 सालों से काम कर रहे हैं। युवा नेताओं को पार्टी की कमान संभालनी चाहिए, और वह (आदित्य) ऐसा कर भी रहे हैं। वह आधिकारिक तौर पर भी ऐसा करेंगे, उनमें काबिलियत है, और हम उनका स्वागत करेंगे। 

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राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ने वाले नेता असल मायने में बागी नहीं थे। उन्होंने तर्क दिया कि यह शब्द भगत सिंह और सुखदेव जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि उन नेताओं के लिए जो पैसे और सत्ता के लिए दूसरी पार्टी में चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि छह सांसदों ने खुद को करोड़ों रुपयों में बेच दिया और दावा किया कि सेना का कैडर उद्धव ठाकरे के साथ ही रहा। जब उनसे पूछा गया कि क्या छह सांसदों की बॉडी लैंग्वेज में आत्मविश्वास दिख रहा था, तो राउत ने उन्हें जनता का सामना करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि हमारे दौरे के बाद देखेंगे कि उनमें कितना आत्मविश्वास है... जब धोखा देने के बाद Z-प्लस सुरक्षा मिलती है, तो आत्मविश्वास बढ़ जाता है। 

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जब पूछा गया कि सेना (UBT) छोड़ने वालों ने अपने फैसले के लिए उन्हें क्यों जिम्मेदार ठहराया, तो राउत ने कहा, क्योंकि मैं पार्टी और बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के प्रति वफादार हूं। उन्होंने मुझे भी कई बार तोड़ने की कोशिश की। मैंने एकनाथ शिंदे समेत पहले भी पार्टी छोड़ने वालों को रोकने की कोशिश की थी और उन्हें चेतावनी दी थी कि सत्ता अस्थायी होती है और उन्हें बालासाहेब की पार्टी को तोड़ने का पाप नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विभाजन पैसे के लालच और प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी जांच एजेंसियों के डर से होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि बस हमें एक घंटे के लिए ईडी और सीबीआई दे दीजिए, फिर हम उन्हें दिखा देंगे।

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