सियासी दंगल में किसका होगा मंगल? नेताओं के वार-पलटवार में दिख रही तकरार

  •  अंकित सिंह
  •  फरवरी 27, 2021   16:13
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सियासी दंगल में किसका होगा मंगल? नेताओं के वार-पलटवार में दिख रही तकरार

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। इन चार राज्यों व केंद्र शासित पुडुचेरी में 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच अलग-अलग चरणों में मतदान संपन्न होगा। मतों की गिनती दो मई को होगी।

4 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है। चुनाव आयोग ने इन राज्यों के चुनावी तारीखों का ऐलान कर दिया है। ऐलान के साथ ही इन राज्यों में आचार संहिता भी लागू हो गया है। चुनाव आयोग के तारीखों के ऐलान को लेकर विपक्ष सवाल भी उठा रहा है जबकि भाजपा स्वागत कर रही है। इन सबके बीच असम में जहां भाजपा के लिए वापसी करना एक बड़ी चुनौती है वही पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के लिए ममता को हराना बेहद ही जरूरी है। केरल वाम का एकमात्र गढ़ बचा हुआ है और उसे हर हाल में अपने इस गढ़ को बचाना है। वहीं, तमिलनाडु में डीएमके और सत्ताधारी एआईएडीएमके के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। इन सब के बीच जिस तरीके की राजनीति सियासी दलों के बीच देखने को मिल रहे हैं इससे साफ जाहिर होता है कि जैसे-जैसे चुनावी प्रचार का पारा चढ़ेगा, नेताओं की वाणी में और भी तीखापन देखने को मिल सकता है। इन चुनावों में पेट्रोलियम पदार्थ दामों को भी विपक्ष भुनाने की कोशिश करेगा। इन्हीं सब मुद्दों पर हमने अपने साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में चर्चा की। इस चर्चा में हमेशा की तरह मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे।

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बंगाल में आठ, असम में तीन, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी में एक-एक चरण में चुनाव: आयोग

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। इन चार राज्यों व केंद्र शासित पुडुचेरी में 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच अलग-अलग चरणों में मतदान संपन्न होगा। मतों की गिनती दो मई को होगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में चुनावी तारीखों की घोषणा की। इसके साथ ही सभी चुनावी राज्यों और पुडुचेरी में आचार संहिता लागू हो गई। अरोड़ा ने चुनावी तारीखों का ऐलान करते हुए कहा कि चार राज्यों व केंद्र शासित पुडुचेरी को मिलाकर कुल 824 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा और इस दौरान कुल 18.68 करोड़ मतदाता 2.7 लाख मतदान केंद्रों पर मतदान करने के पात्र होंगे। पश्चिम बंगाल में 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच आठ चरणों में जबकि असम में 27 मार्च से छह अप्रैल के बीच तीन चरणों में मतदान संपन्न होगा। तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में एक चरण में छह अप्रैल को मतदान होगा। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत राज्य के पांच जिलों की 30 विधानसभा सीटों पर 27 मार्च को, दूसरे चरण के तहत चार जिलों की 30 विधानसभा सीटों पर एक अप्रैल, तीसरे चरण के तहत 31 विधानसभा सीटों पर छह अप्रैल, चौथे चरण के तहत पांच जिलों की 44 सीटों पर 10 अप्रैल, पांचवें चरण के तहत छह जिलों की 45 सीटों पर 17 अप्रैल, छठे चरण के तहत चार जिलों की 43 सीटों पर 22 अप्रैल, सातवें चरण के तहत पांच जिलों की 36 सीटों पर 26 अप्रैल और आठवें चरण के तहत चार जिलों की 35 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां सात चरणों में मतदान संपन्न हुआ था। पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 30 मई को पूरा हो रहा है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पिछले 10 सालों से सत्ता में है। इस बार भाजपा और अन्य विपक्षी दल उसे चुनौती दे रहे हैं। भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को 211 सीटों पर विजय हासिल हुई थी जबिक भाजपा को महज तीन सीटों से संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस को इस चुनाव में 44 सीटें और माकपा को 26 सीटें मिली थी। 

इसी प्रकार असम में पहले चरण के तहत राज्य की 47 विधानसभा सीटों पर 27 मार्च को, दूसरे चरण के तहत 39 विधानसभा सीटों पर एक अप्रैल और तीसरे व अंतिम चरण के तहत 40 विधानसभा सीटों पर छह अप्रैल को मतदान संपन्न होगा। असम में विधानसभा की 126 सीटें हैं। असम विधानसभा का कार्यकाल 31 मई को पूरा हो रहा है। इस बार असम में भाजपा को अपनी सत्ता बचाने की चुनौती है। वहां उसका सामना कांग्रेस और एआईयूडीएफ के गठबंधन से है। भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में 10 सालों के कांग्रेस शासन का अंत करते हुए पहली बार पूर्वोत्तर के किसी राज्य में सत्ता हासिल की थी। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 60, उसके सहयोगियों असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को क्रमश 14 और 12 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस को 26 सीटों पर जीत मिली थी जबकि सांसद बदरूदृदीन अजमल के नेतृत्व वाले एआईयूडीएफ को 13 सीटें मिली थी। भाजपा ने तत्कालीन सांसद सर्वानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री बनाया था। तमिलनाडु में विधानसभा की कुल 234 सीटें हैं और इसका कार्यकाल 24 मई को पूरा हो रहा है। केरल में विधानसभा की 140 सीटें है और यहां विधानसभा का कार्यकाल एक जून को पूरा हो रहा है। पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए चुनाव होगा और यहां विधानसभा का कार्यकाल आठ जून को पूरा हो रहा है। 

तमिलनाडु में पिछले 10 सालों से ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नद्रमुक) का शासन है। राज्य की जनता ने वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक प्रमुख जे जयललिता को दोबारा गद्दी सौंपी थी। इस चुनाव में अन्नाद्रमुक को 135 सीटों पर विजय हासिल हुई थी जबकि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) 88 सीटों पर सिमट गई थी। कांग्रेस को आठ सीटें मिली थी जबकि भाजपा का खाता भी नहीं खुल सका था। इस बार के विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक और भाजपा का गठबंधन हुआ है और उसका मुकाबला द्रमुक और कांग्रेस गठबंधन से होगा। केरल में फिलहाल वाम लोकतांत्रिक मोर्चा की सरकार है। उसका मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे से है। पिछले विधानसभा चुनाव में माकपा को 58 सीटों पर जबकि उसकी सहयोगी भाकपा को 19 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस को 22 सीटें और आईयूएमएल को 18 सीटों पर विजय हासिल हुई थी। भाजपा को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा था। वर्ष 2016 के चुनाव के बाद पुडुचेरी में वी नारायणसामी के नेतृत्व में कांग्रेस और द्रमुक गठबंधन की सरकार बनी थी और वी नारायणसामी राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। हाल ही में विधायकों के इस्तीफे के बाद यह सरकार अल्पमत में आ गई थी और इसके बाद मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अरोड़ा ने कहा कि टीकाकरण से चुनाव के लिए अनुकूल माहौल बना है और चुनाव ड्यूटी पर तैनात सभी लोगों को टीकाकरण अभियान के लिए अग्रिम मोर्चे का कर्मी घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान आवश्यक केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।

टीएमसी, अन्य ने बंगाल में आठ चरणों में चुनाव पर सवाल उठाए, भाजपा ने आयोग के फैसले का स्वागत किया

तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव कराने पर शुक्रवार को सवाल उठाया, जबकि भाजपा ने चुनाव आयोग के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि शांतिपूर्ण चुनावों के लिए असामाजिक तत्वों को नियंत्रित करने की जरूरत है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव कार्यक्रम पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग से विनम्रता से कहना चाहती हूं कि सवाल उठ रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में इतने चरणों में चुनाव क्यों हो रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में एक चरण में चुनाव होने जा रहा है। अगर चुनाव आयोग लोगों से न्याय नहीं करेगा तो लोग कहां जाएंगे।’’ बहरहाल उन्होंने कहा कि ‘‘इन सभी युक्तियों के बावजूद’’ वह चुनाव जीत जाएंगी। कोलकाता में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने पूछा, ‘‘मेरे पास सूत्रों से सूचना है कि भाजपा जो तारीख चाहती थी, उसी अनुरूप चुनाव कार्यक्रम तय किए गए हैं। क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सुझावों के मुताबिक तारीखों की घोषणा की गई है?’’ बहरहाल, भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव का स्वागत किया और कहा कि निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए यह आवश्यक था। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘चुनावों की घोषणा के साथ पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराने के लिए असामाजिक तत्वों को नियंत्रित करना होगा। साथ ही राज्य के हर जिले में निष्पक्ष अधिकारियों की तैनाती करनी होगी ताकि चुनाव में कोई बाधा नहीं आए।’’ भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने ‘‘नंबर गेम’’ पर सवाल उठाए। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘चेन्नई में पांच दिनों का टेस्ट मैच अहमदाबाद में दो दिनों का रह गया। तमिलनाडु में एक दिन में होने वाला चुनाव पश्चिम बंगाल में आठ चरणों तक खिंच गया। क्या आपमें से कोई इस नंबर गेम के बारे में बता सकता है?’’ कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने पूछा कि क्या कोई ‘‘कुटिल योजना’’ है। उन्होंने पूछा, ‘‘अगर केरल- 140, तमिलनाडु-234 और पुडुचेरी- 30 (कुल 404 सीटों) पर चुनाव एक चरण में कराए जा सकते हैं तो असम-126 और पश्चिम बंगाल- 294 (कुल 420 सीट) के लिये सात-आठ चरणों की क्या जरूरत है? क्या कोई कुटिल योजना है?’’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा का सहयोग करने का प्रयास किया है। अनवर ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि यह जानबूझ कर किया गया है और चुनाव आयोग ने भाजपा का सहयोग करने का प्रयास किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें (भाजपा) लगता है कि इससे उन्हें सहयोग मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं है जितना मैं बंगाल के लोगों को जानता हूं। वे आंदोलनकारी प्रकृति के हैं...वे कुछ समय के लिए विचलित हो सकते हैं लेकिन बंगाल बंगाल है।’’ बंगाल से भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो ने चुनाव आयोग के कदम का स्वागत किया और कहा कि राज्य में बदलाव का समय आ गया है। असम के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा नेता हिमंत बिस्व सरमा ने चुनाव कार्यक्रम का स्वागत किया। उनके राज्य में 27 मार्च से तीन चरणों में चुनाव होंगे।

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मोदी ने ‘उत्तर-दक्षिण’ वाले बयान के लिए राहुल पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस और उसकी पूर्ववर्ती पुडुचेरी सरकार पर करारा हमला बोला और कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने अपने कार्यकाल के दौरान यहां की जनता की नही, बल्कि दिल्ली की ‘‘हाई कमांड’’ की सेवा कर रही थी जो ‘‘बांटो, झूठ बोलो और शासन करो’’ की नीति पर विश्वास करती है। उन्होंने यहां एक जनासभा को संबोधित करते हुएकहा कि कांग्रेस सरकार के पतन के बाद यहां की जनता ‘‘कुशासन’’ से आजादी मिलने का जश्न मना रही है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ‘‘उत्तर-दक्षिण’’ वाले बयान और केंद्र में मत्स्य पालन मंत्रालय ना होने के दावे के दावे को लेकर उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2016 में पुडुचेरी की जनता ने बहुत उम्मीदों के साथ कांग्रेस की सरकार बनाई थी, ताकि उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति हो सके लेकिन उन्हें जनता की सरकार नहीं मिली। उन्हें ऐसी सरकार मिली जो दिल्ली में बैठी अपनी हाई कमांड (शीर्ष नेतृत्व) की सेवा करने में व्यस्त थी।’’ उन्होंने आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की अगली सरकार जनता की सरकार होगी। 

राहुल ने केरल विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंका

कांग्रेस ने केरल विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया। पार्टी ने एक रैली का आयोजन किया जिसमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल की सत्तारूढ़ एलडीएफ और केंद्र की भाजपा सरकार पर विवादित कृषि कानूनों और तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर निशाना साधा। वायनाड से सांसद गांधी ने यह भी सवाल किया कि माकपा नीत सरकार पर भाजपा हमला क्यों नहीं कर रही है और ‘‘मुख्यमंत्री कार्यालय के खिलाफ मामलों पर नरम क्यों हो रही है?’’ गांधी ने यह भी कहा कि उत्तर भारत में उन्हें ‘‘अलग तरह की राजनीति’’ की आदत हो गई थी और केरल आना उनके लिए नये तरह का अनुभव है क्योंकि यहां के लोग ‘मुद्दों’ में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। गांधी ने आरोप लगाया कि पहले दो कानून देश के कृषि क्षेत्र को नष्ट करते हैं, वहीं तीसरा किसानों को न्याय से वंचित करता है। वह यहां विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला के नेतृत्व में 22 दिवसीय ऐश्वर्या यात्रा के समापन पर आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। वायनाड से कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘हर दिन, जब आप अपने वाहन में यात्रा करते हैं, तो यह याद रखें कि केंद्र और राज्य दोनों ही आपसे पैसे लेकर इस देश के सबसे अमीर लोगों को दे रहे हैं। यह वह राजनीति है जिसे हम बदलने की कोशिश कर रहे हैं। हम गरीबों के लिए काम करना चाहते हैं।’’ गांधी ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए सवाल किया कि वह माकपा नीत सरकार पर हमला क्यों नहीं कर रही है और ‘‘मुख्यमंत्री कार्यालय के खिलाफ मामलों पर नरम क्यों हो रही है?’’ गांधी ने कहा, ‘‘मैं हर रोज भाजपा और आरएसएस की विचारधारा से लड़ता हूं। भाजपा मेरे हर कदम पर हमला करती है। अभी, वे इस भाषण को देख रहे हैं और सोच रहे हैं कि वे मुझ पर कैसे हमला कर सकते हैं। मुझे समझ में नहीं आता, वे मुख्यमंत्री कार्यालय के खिलाफ मामलों पर नरम क्यों हैं? 

भारतीयों का अपमान राहुल गांधी का पसंदीदा शगल है: जावड़ेकर

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तर और दक्षिण भारतीयों के संबंध में दिए गए बयान को लेकर जारी राजनीति के बीच केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को उन्हें ‘‘बनावटी’’ जानकारी वाला नेता करार दिया और कहा कि ‘‘भारतीयों का अपमान’’ करना उनका पसंदीदा शगल है। जावड़ेकर ने यह भी कहा कि इस बयान के लिए राहुल गांधी की सोशल मीडिया पर ‘‘धुनाई’’ हो रही है जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके सहयोगी रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उनके बयान से सवाल उठता है कि एक राष्ट्रीय पार्टी के पूर्व अध्यक्ष कितने जिम्मेदार हैं। जावड़ेकर ने ट्वीट कर कहा, ‘‘भारतीयों का अपमान करना राहुल गांधी का पसंदीदा शगल है। भारतीय लोग बनावटी जानकारी रखने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि आप हैं।’’

- अंकित सिंह







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