Balogun Controversy: Donald Trump की पैरवी और FIFA की मेहरबानी भी नहीं आई काम, Belgium ने अमेरिका को चटाई धूल

अमेरिका और बेल्जियम के महत्वपूर्ण मुकाबले से पहले फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड निलंबन रद्द होना खेल और राजनीति के संदिग्ध अंतर्संबंधों की नई बहस को जन्म दे रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फीफा अध्यक्ष के बीच हुई निजी बातचीत के बाद लिए गए इस विवादास्पद फैसले ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की गरिमा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि मैदान पर अमेरिका को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन यह मामला भविष्य में फीफा के न्यायिक ढांचे में सुधार की आवश्यकता को मजबूती से रेखांकित करता है। फीफा विश्व कप विवाद, जियानी इन्फैन्टिनो, अमेरिका बनाम बेल्जियम, खेल राजनीति, फोलारिन बालोगुन प्रतिबंध।
फीफा विश्व कप 2026 से अमेरिका की विदाई को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन टीम के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का निलंबन हटाने का मामला अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका को अंतिम 16 के मुकाबले में बेल्जियम के हाथों 4-1 से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उससे पहले बालोगुन को मिली राहत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बालोगुन का एक मैच का स्वतः लागू होने वाला निलंबन पूरी अनुशासन समिति की बैठक में नहीं, बल्कि केवल समिति के अध्यक्ष मोहम्मद अल कमाली ने अकेले हटाया था। बताया जा रहा है कि उन्होंने समिति के अन्य 17 सदस्यों से औपचारिक राय लिए बिना ही यह फैसला लिया।
गौरतलब है कि बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ मुकाबले में लाल कार्ड मिलने के बाद फोलारिन बालोगुन पर एक मैच का प्रतिबंध लगाया गया था। बाद में यही प्रतिबंध हटाकर उसे एक वर्ष की निगरानी में बदल दिया गया, जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ अंतिम 16 के मुकाबले में खेलने के लिए उपलब्ध हो गए थे।
इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब फीफा के अनुशासन समिति प्रमुख मोहम्मद अल कमाली से इस फैसले को लेकर सवाल पूछे गए। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस विषय पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और मीडिया के सवालों का जवाब दिए बिना वहां से चले गए।
बता दें कि इससे पहले कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बालोगुन के लाल कार्ड के बाद फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो से कई बार बातचीत की थी। इसके कुछ दिन बाद ही खिलाड़ी का निलंबन हटाए जाने से राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए गए थे।
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया था कि उन्होंने जियानी इन्फैन्टिनो से बातचीत की थी, लेकिन उनका कहना था कि उन्होंने कभी भी लाल कार्ड का फैसला बदलने की मांग नहीं की। वहीं जियानी इन्फैन्टिनो ने भी स्पष्ट किया कि उनसे कई देशों के प्रमुख विभिन्न विषयों पर बातचीत करते हैं और इस मामले में भी उन्होंने केवल यह बताया था कि फैसला फीफा की स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।
आखिरकार फोलारिन बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ मैदान में उतरे, लेकिन अमेरिका को 4-1 की करारी हार के साथ विश्व कप से बाहर होना पड़ा। मुकाबले के बाद बेल्जियम के खिलाड़ियों ने अपनी जीत का जश्न मनाया, जबकि बेल्जियम फुटबॉल महासंघ के आधिकारिक सामाजिक माध्यम खाते पर किया गया एक व्यंग्यात्मक संदेश भी काफी चर्चा में रहा हैं।
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