हॉकी के 'King' बनेंगे Manpreet Singh, Dilip Tirkey का रिकॉर्ड तोड़ रचेंगे नया इतिहास

Manpreet Singh
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भारतीय हॉकी स्टार मनप्रीत सिंह ने दिलीप टिर्की के सर्वाधिक 412 अंतरराष्ट्रीय मैचों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है और अब उनका लक्ष्य बेल्जियम के जॉन जॉन डोमैन के 481 मैचों के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ना है। मनप्रीत ने लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 तक खेलने की इच्छा जताई है, जिसके लिए वह अपनी फिटनेस पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

 भारत के लिये सर्वाधिक 412 अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच खेलने के दिलीप टिर्की के रिकॉर्ड की बराबरी करने वाले स्टार मिडफील्डर मनप्रीत सिंह की नजरें लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 खेलने और बेल्जियम के जॉन जॉन डोमैन के 481 अंतरराष्ट्रीय मैचों के विश्व रिकॉर्ड पर लगी हैं। एफआईएच प्रो लीग के यूरोप चरण में नीदरलैंड के खिलाफ पहले मैच के साथ ही मनप्रीत ने भारत के पूर्व कप्तान और हॉकी इंडिया अध्यक्ष टिर्की के 412 मैचों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। अब 17 जून को जर्मनी के खिलाफ मैच के जरिये वह भारत के लिये सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन जायेंगे। 33 वर्ष के मनप्रीत ने रोटरडम से को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘मुझे सफर की शुरूआत याद आ रही है जब मीठापुर के एक बच्चे ने भारत के लिये खेलने का सपना देखा था।

यह सफर 15 साल लंबा होगा और 400 से ज्यादा मैच खेलूंगा, यह कभी नहीं सोचा था।’’ उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि सफर अभी थमा नहीं है और उनकी नजरें विश्व रिकॉर्ड तथा ओलंपिक 2028 पर लगी है जिसके लिये वह फिटनेस पर काफी मेहनत कर रहे हैं। 2011 में भारत के लिये पदार्पण करने वाले मनप्रीत ने कहा ,‘‘ निश्चित तौर पर मैं दुनिया में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलना चाहता हूं। बेल्जियम के जॉन जॉन डोम का रिकॉर्ड तोड़ना चाहता हूं लेकिन उसके लिये फिट रहना सबसे अहम है। अगर मैं फिट नहीं हूं तो खुद ही नहीं चाहूंगा कि टीम में रहूं।’’ पेरिस ओलंपिक 2024 में कांस्य पदक जीतने के बाद अपने कैरियर को विस्तार देने के लिये मनप्रीत ने फिटनेस पर काफी मेहनत की है और वह यो यो टेस्ट में सबसे अच्छे नतीजे देने वाले खिलाड़ियों में से हैं।

तोक्यो ओलंपिक 2020 में अपनी कप्तानी में भारत को 41 साल बाद ओलंपिक पदक दिलाने वाले इस मिडफील्डर ने कहा ,‘‘मुझे पेरिस ओलंपिक के बाद लगा कि कैरियर लंबा करना है तो फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देना होगा।बढती उम्र के साथ यह ध्यान देना जरूरी है कि क्या खाना है, क्या नहीं खाना है, जिम में क्या करना है और क्या नहीं। दस साल पहले मैं कुछ भी खा लेता था लेकिन अब सोचना पड़ता है।’’ हाल ही में चैम्पियन क्रिकेटर विराट कोहली ने भारतीय हॉकी खिलाड़ियों की फिटनेस की तारीफ की थी हालांकि मनप्रीत ने कहा कि विराट खुद इस मामले में रोलमॉडल हैं। उन्होंने कहा ,‘‘फिटनेस के मामले में हर खिलाड़ी के लिये विराट खुद रोलमॉडल हैं। 36 वर्ष की उम्र में भी उनकी फिटनेस कमाल की है।

उनसे सीखने को मिलता है कि शीर्ष स्तर पर खेलने के लिये फिटनेस पर ध्यान देना कितना जरूरी है।’’ मनप्रीत ने कहा कि भारत की जर्सी पहनना उनके लिये गर्व की बात रही है और वह अगले ओलंपिक तक खेलते रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा ,‘‘ भारत के लिये खेलने की इच्छा कभी खत्म नहीं होती। मैं हमेशा गर्व के साथ भारत की जर्सी पहनना चाहता हूं। मेरा लक्ष्य विश्व कप, एशियाई खेल ही नहीं लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 तक खेलते रहना और अपना सौ फीसदी देना है। इसके लिये उतार चढावों से घबराना नहीं है और लगातार बेहतर करते रहना है।’’ मनप्रीत ने यह भी कहा कि 412 मैच खेलने को लेकर चल रहे विवादों पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया और पूरा फोकस अपनी फिटनेस और खेल पर रखा था।

उन्होंने कहा ,‘‘मैं सिर्फ अपनी फिटनेस और खेल पर ध्यान दे रहा था। कई बार चीजें आपके नियंत्रण के बाहर होती हैं जिन पर ध्यान देने का कोई फायदा नहीं होता।’’ उन्होंने कहा,‘‘ मैं हॉकी इंडिया और कोचों के संपर्क में था और दिलीप (टिर्की) सर से मिला तो उन्होंने यही कहा था कि एक पूर्व खिलाड़ी होने के नाते वह चाहते हैं कि मैं दुनिया में सबसे ज्यादा मैच खेलूं। उनका , कोचों और टीम का काफी सहयोग रहा।’’ अपने कैरियर के शुरूआती दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस सफर के पीछे परिवार के कई बलिदान थे और उन्हें खुशी है कि वे बेकार नहीं गए। उन्होंने कहा,‘‘ मैं मध्यमवर्गीय परिवार से था और हमने काफी आर्थिक तंगी देखी है। पिताजी की तबीयत खराब रहती थी और घर में कमाने वाला कोई और नहीं था। बड़े भाई अमनदीप को 12वीं के बाद पढाई छोड़नी पड़ी। काफी दिक्कतें झेली लेकिन मेरे परिवार ने हमेशा मेरे सपने को जिंदा रखने में मदद की।’’

मनप्रीत ने कहा ,‘‘ सफलता के मेरे सफर में कई लोगों का हाथ रहा है और मेरी पत्नी ने भी पूरा साथ दिया।’’ सफर के उतार चढावों के बारे में उन्होंने कहा ,‘‘ लंदन ओलंपिक 2012 में हम 12वें स्थान पर रहे जो कैरियर का सबसे खराब दौर था। मैं नया ही टीम में आया था और यह हार देखी। फिर तोक्यो में 41 साल बाद कांस्य पदक जीतना कैरियर की सबसे बड़ी उपलब्धि रही क्योंकि इतने साल से हम इसका सपना देख रहे थे।’’ प्रो लीग के पहले मैच में भारत को नीदरलैंड ने 3 . 2 से हराया लेकिन मनप्रीत को उम्मीद है कि बाकी मैचों में और इस साल बड़े टूर्नामेंटों में टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा ,‘‘ प्रो लीग हमारे लिये काफी अहम है क्योंकि इसमें इग्लैंड और पाकिस्तान के साथ खेलना है और ये दोनों टीमें विश्व कप में हमारे पूल में हैं। यहां अच्छा खेलकर आत्मविश्वास लेकर जाना चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ विश्व कप में लंबे समय से हमने पदक नहीं जीता है और एशियाई खेल ओलंपिक क्वालीफायर है। दोनों टूर्नामेंट अहम है और उसी को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे हैं।’’ जूनियर टीमों के अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित मनप्रीत ने कहा कि भारतीय हॉकी सही ट्रैक पर है और ओलंपिक पदक जीतने का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा ,‘‘पिछले साल अंडर 21 और अब अंडर 18 टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया है। जूनियर खिलाड़ी अच्छे आ रहे हैं और उम्मीद है कि आने वाले समय में ओलंपिक पदक जीतने का सिलसिला कायम रहेगा।

लंबा गैप नहीं आयेगा।’’ पुर्तगाल के स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो के प्रशंसक मनप्रीत उनसे काफी कुछ सीखते हैं। उन्होंने कहा,‘‘रोनाल्डो 41 साल की उम्र में भी विश्व कप खेल रहे हैं जो काफी प्रेरित करते हैं। वह जबर्दस्त जुझारू खिलाड़ी हैं और हार नहीं मानते , उनका यह जज्बा सीखने वाला है।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ मैं एक अच्छे ‘टीम प्लेयर’ के रूप में याद रखा जाना चाहूंगा। आने वाले खिलाड़ी मुझसे यही सीखें कि मनप्रीत मैदान पर अपना शत प्रतिशत देता था और मैदान के बाहर भी फोकस रहता था कि कैसे बेहतर खेलना है और हमें भी उसके जैसा ही बनना है।

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