Manu Bhaker को ओलिंपिक मेडल दिलाने वाले महागुरु Jaspal Rana का आकस्मिक निधन, 49 की उम्र में छोड़ी दुनिया

Manu Bhaker
ANI
रेनू तिवारी । Jun 12 2026 10:21AM

भारत के मशहूर निशानेबाजी कोच और एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता जसपाल राणा का निधन हो गया है। वह 49 वर्ष के थे। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव के अनुसार राणा ने बृहस्पतिवार की रात को दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।

भारत के मशहूर निशानेबाजी कोच और एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता जसपाल राणा का निधन हो गया है। वह 49 वर्ष के थे। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव के अनुसार राणा ने बृहस्पतिवार की रात को दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। राणा जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल की वापसी की उड़ान के दौरान बीमार पड़ गए थे और उन्हें एक चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था। नयी दिल्ली में उतरते ही उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें स्टेंट डाले गए थे। राणा भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के लिए ‘हाई परफार्मेंस कोच’ के रूप में कार्यरत थे।

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मॉडर्न शूटिंग पर राणा का असर

भारतीय शूटिंग में एक अहम नाम, राणा हाल के सालों में भारत के पिस्टल प्रोग्राम को आगे बढ़ाने में गहराई से जुड़े रहे हैं। एक कोच के तौर पर, उन्होंने कई बेहतरीन शूटर्स के करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई, जिनमें डबल ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर भी शामिल हैं। वह नेशनल सेटअप के साथ हाई-परफॉर्मेंस कोच के तौर पर भी काम कर रहे थे।

वह 2024 पेरिस ओलंपिक के दौरान मनु की कोचिंग टीम का हिस्सा थे, जहाँ मनु ओलंपिक के एक ही एडिशन में दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं।

राणा का सिल्वर मेडल तक का सफ़र

1976 में उत्तराखंड में जन्मे राणा ने 1988 में अहमदाबाद में हुई 31वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में अपने डेब्यू पर सिल्वर मेडल जीतकर नेशनल लेवल पर अपनी पहली बड़ी कामयाबी हासिल की।

उन्होंने कई इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में भारत का प्रतिनिधित्व किया और अपने करियर की शुरुआत में ही 1994 में हिरोशिमा में हुए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर बड़ी सफलता हासिल की। ​​समय के साथ, वह भारत के सबसे कामयाब शूटर्स में से एक बन गए, खासकर 25 मीटर पिस्टल इवेंट्स में, और उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के कई एडिशन में मेडल भी जीते। मैनचेस्टर में हुए 2002 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने भारत के लिए छह मेडल जीते।

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अपने कॉम्पिटिटिव करियर के बाद, वह कोचिंग के क्षेत्र में आए और भारत के मॉडर्न पिस्टल शूटिंग इकोसिस्टम को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कई बेहतरीन एथलीट्स के साथ मिलकर काम किया और इंटरनेशनल लेवल पर उनका मार्गदर्शन किया। ISSF इवेंट्स में भारत के प्रदर्शन को बेहतर बनाने का श्रेय उनके कोचिंग के तरीकों और टेक्निकल जानकारी को दिया जाता है।

राणा को भारत के कुछ सबसे बड़े स्पोर्ट्स सम्मान भी मिले हैं, जिनमें एक एथलीट के तौर पर उनकी उपलब्धियों के लिए 1994 में अर्जुन अवॉर्ड और 1997 में पद्म श्री शामिल हैं। समय के साथ, वह भारतीय शूटिंग में एक अहम हस्ती बन गए और शूटर्स की नई पीढ़ी को तैयार करने और ग्लोबल स्टेज पर भारत की मौजूदगी को मजबूत करने के लिए उनका सम्मान किया जाता है। 

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