India Open 2026 में भारतीय चुनौती फिर फीकी, कुछ उम्मीदों के साथ कई सवाल

India Open 2026
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Ankit Jaiswal । Jan 20 2026 9:16PM

इंडिया ओपन 2026 में एक बार फिर भारतीय चुनौती निराशाजनक रही, जहां लक्ष्य सेन और सात्विक-चिराग जैसे शीर्ष खिलाड़ी निर्णायक मौकों पर विफल रहे और विश्व चैंपियनशिप से पहले तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

इंडिया ओपन 2026 की चर्चा इस बार खेल से ज़्यादा आयोजन की खराब व्यवस्थाओं और राजधानी की खराब हवा को लेकर रही, लेकिन कोर्ट के अंदर भी भारतीय बैडमिंटन के लिए तस्वीर ज्यादा उत्साहजनक नहीं रही। गौरतलब है कि एक बार फिर टूर्नामेंट के वीकेंड तक पहुंचते-पहुंचते भारतीय चुनौती लगभग समाप्त हो गई, जो हाल के वर्षों में एक दोहराता हुआ पैटर्न बनता जा रहा है।

बता दें कि 2023 में सुपर 750 का दर्जा मिलने के बाद से इंडिया ओपन के निर्णायक दौर में भारत की मौजूदगी बेहद सीमित रही है। पिछले तीन वर्षों में अगर किसी ने उम्मीद जगाई है तो वह केवल सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी रहे हैं, जो 2024 में फाइनल और 2025 में सेमीफाइनल तक पहुंचे थे, जबकि एचएस प्रणय ने 2024 में अंतिम चार में जगह बनाई थी। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस साल भारतीय खिलाड़ियों में सबसे आगे लक्ष्य सेन रहे, लेकिन उन्हें भी क्वार्टरफाइनल में हार का सामना करना पड़ा।

गौरतलब है कि यह टूर्नामेंट अगस्त में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले एक अहम अभ्यास मंच माना जा रहा है। ऐसे में आयोजन को लेकर फेडरेशन के सामने चुनौतियां तो हैं ही, साथ ही कोर्ट पर मिले नतीजे भी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे। पुरुष एकल और पुरुष युगल ऐसे दो वर्ग थे, जहां भारत को खिताब या कम से कम फाइनल तक पहुंचने की सबसे ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन दोनों ही मोर्चों पर पसंदीदा खिलाड़ी निर्णायक क्षणों में अटक गए।

लक्ष्य सेन ने शुरुआती दौर में आयुष शेट्टी और केंटा निशिमोतो के खिलाफ अपने पुराने तेवर दिखाए, लेकिन सेमीफाइनल की राह में लिन चुन-यी की तेज़ आक्रामक खेल शैली उनके लिए भारी पड़ गई। पूरे सप्ताह के दौरान स्टेडियम के भीतर बहती प्राकृतिक हवा कई खिलाड़ियों के लिए परेशानी का सबब बनी, जहां तेज़ मूवमेंट और आक्रमण पर निर्भर खिलाड़ी ज्यादा सहज नजर आए। कई खिलाड़ियों ने माना कि वे शटल पर नियंत्रण नहीं बना सके और हालात के अनुरूप खुद को जल्दी ढालने में चूक गए।

सात्विक और चिराग की बात करें तो उनका प्रदर्शन भी असमान रहा। जापान की जोड़ी हिरोकी मिदोरिकावा और क्योहेई यामाशिता के खिलाफ उनकी हार ने एक बार फिर उनकी काउंटर-अटैक के खिलाफ कमजोरी को उजागर किया। बता दें कि पहले दौर में वॉकओवर मिलने के कारण उन्हें मैच खेलने का मौका देर से मिला, जिससे लय बनाने में भी परेशानी हुई।

इस बीच, अपने करियर के अंतिम दौर में माने जा रहे किदांबी श्रीकांत और एचएस प्रणय ने यह दिखाया कि उनमें अब भी जुझारूपन बाकी है। श्रीकांत ने जहां तरुण मन्नेपल्ली के खिलाफ तीन गेम का मुकाबला जीता, वहीं फ्रांस के फॉर्म में चल रहे क्रिस्टो पोपोव के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। प्रणय ने भी पिछले साल के फाइनलिस्ट ली चेउक यिउ को सीधे गेमों में हराकर आत्मविश्वास बढ़ाया और फिर लो कीन यू के खिलाफ तीन गेम तक मुकाबला खींचा।

महिला एकल में पीवी सिंधु की शुरुआत साल की शुरुआत में मलेशिया ओपन के सेमीफाइनल से मजबूत रही थी, लेकिन इंडिया ओपन में वियतनाम की गुयेन थूई लिन्ह के खिलाफ उन्हें लगातार तीसरी हार झेलनी पड़ी। हालांकि, इस वर्ग में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले। घुटने की गंभीर चोट से लौट रहीं मालविका बंसोड़ ने भले ही बाहर का रास्ता देखा, लेकिन विश्व नंबर तीन हान यूए को कड़ी चुनौती देकर यह दिखा दिया कि वह जल्द लय में लौट सकती हैं।

सबसे रोमांचक प्रदर्शन 17 वर्षीय तन्वी शर्मा का रहा, जिन्हें आखिरी समय में टूर्नामेंट में एंट्री मिली थी। उन्होंने विश्व नंबर दो वांग झीयी को दो गेम तक कड़ी टक्कर देकर सभी का ध्यान खींचा, हालांकि निर्णायक गेम में अनुभव की कमी साफ दिखी। कुल मिलाकर इंडिया ओपन 2026 भारतीय बैडमिंटन के लिए सवाल भी छोड़ गया और कुछ उम्मीद की किरणें भी, जिन पर आगे की तैयारी टिकी रहेंगी।

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