Satwik-Chirag World Championship में कंधे की चोट के बावजूद आक्रामक खेल पर कायम रहेंगे

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भारतीय पुरुष युगल जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने घरेलू सरजमीं पर होने वाली विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में चोट की समस्याओं के बावजूद अपनी आक्रामक शैली को बरकरार रखने का फैसला किया है। सात्विक की कंधे की चोट के कारण इस जोड़ी को हाल ही में कई टूर्नामेंट्स से हटना पड़ा था। दोनों खिलाड़ियों का विशेष ध्यान अब रैलियों की शुरुआती चार गेंदों पर केंद्रित रहेगा।

कंधे की बार-बार उभरने वाली चोट ने सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी के लिए मुश्किलें बढ़ाई हैं और कई बार उनके जोड़ीदार चिराग शेट्टी के लिए भी यह स्थिति “परेशान करने वाली” रही है, लेकिन भारतीय पुरुष युगल जोड़ी घरेलू सरजमीं पर विश्व चैंपियनशिप में अपने पदक के रंग को बेहतर करने के लक्ष्य के साथ अपने आक्रामक और तेजतर्रार खेल पर कायम रहेगी। सात्विक पिछले कुछ वर्षों से कंधे की इस समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके कारण शानदार टूर्नामेंट के बाद भी उनके लिए लय बरकरार रखना मुश्किल रहा है। इस जोड़ी ने दो साल के अंतराल के बाद अपना पहला खिताब जीतते हुए सिंगापुर ओपन सुपर 750 अपने नाम किया था, लेकिन इसके बाद चोट फिर उभर आई और उन्हें इंडोनेशिया ओपन में मुकाबले के बीच से हटना पड़ा तथा जापान ओपन से नाम वापस लेना पड़ा।

सात्विक ने पीटीआई से कहा, ‘‘कंधे की चोट के साथ खेलना हमेशा मुश्किल होता है। मैं पिछले कुछ वर्षों से इसे संभाल रहा हूं। यह समस्या बार-बार उभरती रहती है।

कभी मैं अच्छा महसूस करता हूं तो कभी स्थिति ठीक नहीं होती। यह निराशाजनक है। जाहिर तौर पर जब आप लय में होते हैं तो उसे जारी रखना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, ‘‘आप अच्छा टूर्नामेंट खेलें और फिर दोबारा बाहर हो जाएं तो यह आपके जोड़ीदार के लिए भी परेशान करने वाला होता है।

यह आसान नहीं है, लेकिन अब हम इसके अभ्यस्त हो चुके हैं। हमें पता है कि ऐसी स्थिति से कैसे निपटना है। साथ ही हमें अपने शरीर की स्थिति का भी सम्मान करना होगा।’’ सात्विक और चिराग पुरुष युगल वर्ग की उन शीर्ष पांच जोड़ियों में शामिल हैं, जिन पर विश्व चैंपियनशिप में खास नजर रहेगी।

पुरुष युगल का मुकाबला परंपरागत रूप से बेहद खुला रहा है और पिछले छह संस्करणों में पांच देशों की छह अलग-अलग जोड़ियां खिताब जीत चुकी हैं। चिराग ने कहा, “समय के साथ युगल बैडमिंटन काफी बदल गया है। खेल अब ज्यादा तेज हो गया है, फ्लैट रैलियां और लंबी रैलियां अधिक देखने को मिलती हैं तथा इस टूर्नामेंट में हर जोड़ी काफी मजबूत है।

पुरुष युगल में यह कहना मुश्किल है कि कौन सी जोड़ी खिताब जीतेगी। इसलिए मैं किसी एक जोड़ी को प्रबल दावेदार नहीं मानूंगा। मुकाबला खुला है और हर जोड़ी पदक जीतने में सक्षम है।’’ मुकाबले की शुरुआत के आदान-प्रदान निर्णायक साबित हो सकते हैं।

सात्विक और चिराग दोनों ही रैली के शुरुआती चार शॉट्स को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं और इसी पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। चिराग के लिए रैली के शुरुआती आदान-प्रदान पर ध्यान देने की रणनीति पहले ही कारगर साबित हो चुकी है। उन्होंने कहा, ‘‘रैली शुरू होते ही हमें शुरुआती कुछ शॉट्स पर पूरा ध्यान केंद्रित करना होगा।

मुझे लगता है कि लंबी रैलियों को हम संभाल सकते हैं, लेकिन शुरुआती चार शॉट निश्चित रूप से बेहद महत्वपूर्ण होंगे। आप सर्व कर रहे हों या रिसीव, दोनों ही स्थिति में ये शॉट काफी अहम हो जाते हैं।” उन्होंने कहा, “सिंगापुर ओपन में भी यह रणनीति हमारे लिए काफी अच्छी रही थी। कोचिंग टीम से हमें कुछ बेहतरीन सुझाव मिले थे।

इस विश्व चैंपियनशिप के लिए भी हमें यही कहा गया है कि खेल को सरल रखें और एक समय में सिर्फ एक मुकाबले पर ध्यान दें।’’ सात्विक ने भी चिराग की बात से सहमति जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से कोच टैन के मार्गदर्शन में इसी रणनीति के साथ तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमें बस उस छोटे से ब्रेक की जरूरत थी। हम कुछ समय से इसी तरह प्रशिक्षण ले रहे हैं।

इसमें कुछ नया नहीं है और हमारी रणनीति भी वही रहेगी।” सात्विक ने कहा कि कोच का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि एक समय में सिर्फ एक मैच पर ध्यान दें, ज्यादा न सोचें और खुद पर बहुत अधिक अपेक्षाओं का दबाव न डालें। उन्होंने कहा कि चोट से वापसी के बाद लय हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा, इसलिए उन्हें अपनी लय तलाशकर मुकाबले में ज्यादा से ज्यादा देर तक टिके रहने की कोशिश करनी होगी। विश्व नंबर एक किम वोन हो और सियो सेउंग जे ने 2025 की अपनी शानदार फॉर्म को इस सत्र की शुरुआत में भी जारी रखा था, लेकिन मई में थॉमस कप फाइनल के बाद उनकी कमजोरियां नजर आई हैं।

इससे फजार अल्फियां-मुहम्मद शोहिबुल फिकरी, गोह से फी-नूर इज्जुद्दीन और भारतीय जोड़ी जैसी चुनौती पेश करने वाली जोड़ियों के लिए उम्मीदें बढ़ी हैं। सात्विक ने कहा कि फजार-फिकरी और गोह-नूर की जोड़ियां रैली के शुरुआती चार शॉट्स में काफी मजबूत हैं। उनकी रैकेट स्पीड तेज है और वे शटल को पढ़ने तथा शुरुआती आदान-प्रदान को भांपने में माहिर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘उनके रैकेट काफी तेज हैं और रैकेट से गेंद पर नियंत्रण भी शानदार है। वे शटल को अच्छी तरह पढ़ते हैं और शुरुआती चार शॉट्स को भांपने में माहिर हैं। इसके बाद वे विपक्षी खिलाड़ियों पर काफी दबाव बना देते हैं।” उन्होंने कहा, “इनके खिलाफ खेलना आसान नहीं है।

उनका सामना करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। एक बार जब आप उनकी खेल शैली के अभ्यस्त हो जाते हैं तो कुछ सहज महसूस करने लगते हैं। इसके अलावा, वे आपको कोर्ट पर सहज होने का मौका नहीं देते।

आपको कुछ हद तक असहज परिस्थितियों में खेलना पड़ता है, इसलिए दोनों जोड़ियों के खिलाफ मुकाबला हमेशा कड़ा होता है।” घरेलू परिस्थितियों को सात्विक अतिरिक्त दबाव के बजाय चुनौती के रूप में लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह मजेदार, चुनौतीपूर्ण और रोमांचक है। कोई दबाव नहीं है।

सभी कहते हैं कि दबाव एक विशेषाधिकार है और हमें चुनौती स्वीकार करना पसंद है। उम्मीद है कि हम इसे सकारात्मक तरीके से संभालेंगे। उम्मीद है कि बड़ी संख्या में लोग स्टेडियम आएंगे और देखेंगे कि भारत में बैडमिंटन किस तरह आगे बढ़ रहा है।

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