खतरनाक साबित हो सकता है फ्री एंटीवायरस एवं वीपीएन इस्तेमाल करना!

खतरनाक साबित हो सकता है फ्री एंटीवायरस एवं वीपीएन इस्तेमाल करना!

वीपीएन यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यूज करने का चलन भी काफी तेजी से बढ़ा है। तमाम लोग अपनी ब्राउजिंग हिस्ट्री किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहते हैं, और कई सारी ऐसी वेबसाइट एक्सेस करना चाहते हैं, जो किसी एक देश में प्रतिबंधित है।

टेक्नोलॉजी की रफ्तार इतनी तेज है, कि उसके सामने कोई सुपर रेसिंग बाइक या सुपर रेसिंग कार भी शरमा जाए! टेक्नोलॉजी के मामले में ज्यों ही आप एक अविष्कार को आजमाने की कोशिश करते हैं, तत्काल उसके विकल्प के रूप में दूसरी चीजें सामने आ जाती हैं।

वास्तव में यह टेक्नोलॉजी हमें सुविधाएं तो प्रदान कर रही है, किंतु अपने मकड़जाल में भी कहीं ना कहीं उलझाए जा रही है।

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टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने में सबसे बड़ा मुद्दा जिस चीज का आता है, वह है सिक्योरिटी का! 

से में आप चाहे कंप्यूटर के माध्यम से कोई चीज एक्सेस करें या फिर मोबाइल के माध्यम से कोई चीज एक्सेस करें, आप का यह सोचना जरूरी है कि क्या वास्तव में आप सिक्योर सर्वर का इस्तेमाल कर रहे हैं? 

नहीं तो एक से वायरस और मैलवेयर जैसे खतरनाक सॉफ्टवेयर भी हैं, जो आपके सिस्टम को करप्ट करने में चंद सेकंड ही लेंगे! चंद सेकेंड में ये वायरस आपके सिस्टम को करप्ट करके आपके कार्य को डिस्टर्ब कर देंगे, और आप निश्चित रूप से अपनी जीवन की रफ्तार रोकने पर विवश हो जाएंगे।

ऐसे में इन चीजों से बचने के लिए एंटीवायरस का इस्तेमाल आम है, और कई सारी कंपनियां तो अपना फ्री एंटीवायरस भी देती हैं, जो बहुत सारे लोग इस्तेमाल भी करते रहे हैं।

इसी प्रकार से वीपीएन यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यूज करने का चलन भी काफी तेजी से बढ़ा है। तमाम लोग अपनी ब्राउजिंग हिस्ट्री किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहते हैं, और कई सारी ऐसी वेबसाइट एक्सेस करना चाहते हैं, जो किसी एक देश में प्रतिबंधित है। 

इसके लिए वह वीपीएन का यूज करते हैं, और वर्चुअली वीपीएन यह शो करता है, कि आप किसी और देश से, किसी और लोकेशन से लॉगिन कर रहे हैं, और ऐसे में जो वेबसाइट आप देखना चाहते हैं, उस पर जा सकते हैं।

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उदाहरण के लिए अगर भारत में कोई एक पूर्ण वेबसाइट प्रतिबंधित है, तो कई सारे वीपीएन इस्तेमाल करने वाले लोग अपनी लोकेशन किसी अन्य देश का दिखला कर वहां से उस वेबसाइट में लॉगिन करते हैं, और इस तरीके से प्रतिबंधित कंटेंट को भी एक्सेस करते हैं। देखा जाए तो ऐसा नहीं करना चाहिए, और इसके लिए कई लोग जो फ्री वीपीएन इस्तेमाल करते हैं, निश्चित रूप से उन को सावधान होने की जरूरत है।

फ्री वीपीएन इस्तेमाल करने वाले और फ्री एंटीवायरस इस्तेमाल करने वाले लोग इस बात को भूल जाते हैं, कि इस वजह से उनको बड़ा नुकसान हो सकता है। अगर आप फ्री एंटीवायरस और फ्री वीपीएन इस्तेमाल करते हैं, तो इसके बदले में आपका डाटा इन कंपनियों को मिल जाता है, और अगर आपका अपना डाटा इन के पास चला गया, तो इसके परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं।

इसके अलावा फ्री एप्लीकेशन अपने साथ तमाम अनचाहे विज्ञापन और मैलवेयर भी लेकर आते हैं। ये आपके फोन के बैकग्राउंड में चलते रहते हैं, इससे आपके फोन की बैटरी तो खराब होती है, ओवर आल उसकी हेल्थ भी गड़बड़ होती है। 

ऐसे में जब भी आप फ्री एंटीवायरस या फ्री वीपीएन इस्तेमाल करें, तो आप देख लें कि वह एप्लीकेशन आपसे कौन-कौन सी परमिशन ले रहा है। कई बार आप बिना देखे जब क्लिक करते जाते हैं, और तमाम परमिशन एक्सेप्ट करते जाते हैं, तो आपके फोन की स्क्रीन रिकॉर्डिंग तक की परमिशन तमाम एप्लीकेशन आप से ले लेते हैं।

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ऐसे में आपके फोन पर क्या किया जा रहा है, कई सारी प्राइवेट वीडियो तक लीक होने के उदाहरण सामने आए हैं। तमाम साइबर क्रिमिनल इस तरह के मौके की तलाश में होते हैं, और फ्री एंटीवायरस और वीपीएन के साथ अपना मैलवेयर जोड़ देते हैं।

इसीलिए अगर आपके मोबाइल में जरूरी डेटा है, और खासकर प्राइवेट सिक्योरिटी की उसको जरूरत है, तो आप पेड सब्सक्रिप्शन ही लें, वह भी अच्छी रेटिंग वाली कंपनियों के ऐप के।

- विंध्यवासिनी सिंह