स्मार्टफोन बैटरी लाइफ का बड़ा मिथक, खरीदने से पहले जानें सच्चाई

Smartphone Battery Life
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फोन की बैटरी कितनी देर चलेगी, इसमें डिस्प्ले का बहुत बड़ा हाथ होता है। उच्च रिफ्रेश रेट वाले OLED पैनल – जैसे 120Hz या 144Hz – ज्यादा पावर खपत करते हैं। यदि फोन लगातार हाई रिफ्रेश रेट पर चलता है तो बैटरी जल्दी खत्म हो सकती है। सिर्फ़ रिफ्रेश रेट ही नहीं, स्क्रीन का रिज़ॉल्यूशन भी मायने रखता है।

नया स्मार्टफोन खरीदते समय सबसे ज्यादा ध्यान किस चीज़ पर जाता है? ज़्यादातर लोग बैटरी लाइफ पर फोकस करते हैं। फोन कंपनियां भी इसे खूब प्रमोट करती हैं और बड़े-बड़े आंकड़े देती हैं – जैसे कि 5,000mAH, 7,000mAH या यहां तक कि 7,500mAH की बैटरी। ऐसे आंकड़े देखकर आम लोग यह मान बैठते हैं कि जितनी बड़ी बैटरी, उतनी लंबी चलने वाली बैटरी लाइफ। लेकिन क्या यह सच है?

सच्चाई यह है कि 2025 में स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ सिर्फ mAH यानी बैटरी क्षमता पर निर्भर नहीं करती। यह कई और फैक्टर्स पर निर्भर करती है – जैसे फोन कितनी पावर इस्तेमाल करता है, उसका डिस्प्ले कैसा है, प्रोसेसर कितना स्मार्ट है, और सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड को कैसे मैनेज करता है।

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बड़ी बैटरी के बावजूद भ्रम में मत रहें

नई बैटरी टेक्नोलॉजी ने स्मार्टफोन उद्योग में क्रांति ला दी है। सिलिकॉन-कार्बन जैसी तकनीक की वजह से चीनी कंपनियां 5,000mAH की पारंपरिक सीमा को पार कर चुकी हैं। उदाहरण के लिए, Xiaomi 17 Pro Max में 7,500mAH की बड़ी बैटरी है। वहीं iQOO 15, OnePlus 15 और Realme GT के कई मॉडल 7,000mAH बैटरी के साथ आते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ये फोन हमेशा ज्यादा देर तक चलेंगे। बैटरी क्षमता एक तरफ़ फैक्टर है, लेकिन डिस्प्ले, प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

डिस्प्ले का बड़ा रोल

फोन की बैटरी कितनी देर चलेगी, इसमें डिस्प्ले का बहुत बड़ा हाथ होता है। उच्च रिफ्रेश रेट वाले OLED पैनल – जैसे 120Hz या 144Hz – ज्यादा पावर खपत करते हैं। यदि फोन लगातार हाई रिफ्रेश रेट पर चलता है तो बैटरी जल्दी खत्म हो सकती है। सिर्फ़ रिफ्रेश रेट ही नहीं, स्क्रीन का रिज़ॉल्यूशन भी मायने रखता है। Full HD+ पैनल वाले फोन, QHD+ वाले फोन की तुलना में कम पावर लेते हैं। इसका मतलब यह है कि बड़ी बैटरी होने के बावजूद, अगर डिस्प्ले हाई रिफ्रेश रेट और हाई रेज़ॉल्यूशन पर है तो पावर ज्यादा लगेगी।

प्रोसेसर भी प्रभावित करता है बैटरी लाइफ

फोन का प्रोसेसर बैटरी लाइफ पर सीधा असर डालता है। नए प्रोसेसर जैसे Snapdragon 8 Elite Gen 5 या Dimensity 9500 स्मार्ट पावर मैनेजमेंट के साथ आते हैं। अगर आप हैवी गेम खेलते हैं या कैमरा का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो प्रोसेसर और फोन हीट हो सकते हैं, जिससे पावर की खपत बढ़ जाती है। इसलिए नया फोन खरीदते समय प्रोसेसर को जरूर ध्यान में रखें। अपग्रेडेड प्रोसेसर बैटरी लाइफ बढ़ाने में मदद करता है।

फास्ट चार्जिंग और स्मार्ट मैनेजमेंट

आजकल कई फोन फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करते हैं। 100W से 120W वायर्ड चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग आम हो गई हैं। इससे फोन जल्दी चार्ज हो जाते हैं। लेकिन चार्जिंग के दौरान हीटिंग कैसे कंट्रोल होती है, यह भी देखना जरूरी है। बाईपास चार्जिंग और शेड्यूल नाइट चार्जिंग जैसी सुविधाएं फोन की बैटरी को लंबा चलाने में मदद करती हैं।

सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन: बैटरी की असली ताकत

किसी भी फोन में सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन बैटरी लाइफ बढ़ाने में बहुत जरूरी है। iPhone 17 Pro Max और Galaxy S25 Ultra में बहुत बड़ी बैटरी नहीं होती, लेकिन उनका सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड प्रोसेस, लोकेशन सर्विस और नेटवर्क स्विचिंग को अच्छी तरह मैनेज करता है। iOS और One UI जैसी सिस्टम्स बैकग्राउंड में अनावश्यक पावर खर्च को रोकती हैं और फोन की बैटरी को लंबे समय तक टिकाए रखती हैं।

खरीदते समय ध्यान रखने योग्य बातें

- mAH या वॉट-आवर (Wh) का मतलब सिर्फ़ चार्ज स्टोर करने की क्षमता है।

- 7,000mAH की बैटरी, 5,000mAH वाले फोन से कभी-कभी जल्दी खत्म हो सकती है।

- बजट फोन में कभी-कभी प्रीमियम फोन की तुलना में बैटरी ज्यादा टिकती है, क्योंकि उसमें कम पावर खर्च करने वाले फीचर्स होते हैं।

तो अगली बार नया स्मार्टफोन लेने से पहले केवल बड़ी बैटरी देखकर आकर्षित न हों। डिस्प्ले, प्रोसेसर, सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन और चार्जिंग टेक्नोलॉजी को भी ध्यान में रखें। यही सही तरीका है लंबी और टिकाऊ बैटरी अनुभव पाने का।

- डॉ. अनिमेष शर्मा

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