क्या होता है ईआरपी (ERP), क्यों होता है इस्तेमाल?

  •  मिथिलेश कुमार सिंह
  •  अक्टूबर 24, 2020   14:42
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क्या होता है ईआरपी (ERP), क्यों होता है इस्तेमाल?

जाहिर तौर पर किसी बड़े आर्गेनाइजेशन में तमाम डिपार्टमेंट कार्य करते हैं। अब एक व्यक्ति कितनी सारी चीजों को याद रखेगा। उसे तमाम महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ते हैं और मैनुअली इसमें गलती होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। इसीलिए ईआरपी का अविष्कार हुआ।

ईआरपी (ERP) अर्थात एंटरप्राइज रिसोर्स प्लैनिंग। इसे आप सॉफ्टवेयर के युग में सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर भी मान सकते हैं। इसका सीधा सा मतलब यह समझें कि चाहे कोई भी व्यवसाय है, उसे मैनेज करने के लिए आपको अलग-अलग डिपार्टमेंट के साथ डील करना पड़ता है। जैसे किसी कंपनी में प्रोडक्शन डिपार्टमेंट होता है, तो उसी कंपनी में अकाउंटिंग डिपार्टमेंट भी होता है। उसी कंपनी में सेल्स डिपार्टमेंट भी कार्य करता है, तो सपोर्ट डिपार्टमेंट भी उस कंपनी के लिए उतना ही आवश्यक होता है।

इसके अतिरिक्त एचआर यानी ह्यूमन रिसोर्स से लेकर परचेज जैसे महत्वपूर्ण विभागों के ऊपर ही कोई कंपनी चलती है। जब तक किसी कंपनी का साइज छोटा रहता है, तब तक कंपनी का मालिक इन सब चीजों को मैनुअली देख सकता है। लेकिन कल्पना कीजिए कि किसी कंपनी में 1000 का स्टाफ है, या उससे ज्यादा मैन पॉवर हो तो?

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जाहिर तौर पर किसी बड़े आर्गेनाइजेशन में तमाम डिपार्टमेंट कार्य करते हैं। अब एक व्यक्ति कितनी सारी चीजों को याद रखेगा। उसे तमाम महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ते हैं और मैनुअली इसमें गलती होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। इसीलिए ईआरपी का अविष्कार हुआ। इसमें एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से तमाम चीजें सेंट्रलाइज रूप से प्रबंधित की जाती हैं। डिफरेंट डिपार्टमेंट्स इसके माध्यम से इंटरनल कम्युनिकेशन भी आसानी से करते हैं और इस तरीके से कंपनी फंक्शन कर पाती है।

जब आप टेक्नोलॉजी का यूज करते हैं तो तमाम चीजें सेंट्रलाइज डेटाबेस से जुड़ी होती हैं और ऐसी स्थिति में ट्रांसपेरेंसी बढ़ जाती है। सेंट्रलाइज से यहाँ तात्पर्य डेटाबेस के आपस में जुड़े होने से भी है। थोड़ा और आसान शब्दों में कहा जाए तो कोई डिपार्टमेंट किसी दूसरे डिपार्टमेंट की फाइल क्यों नहीं पास कर रहा है, यह ईआरपी में आसानी से नजर आ जाता है।

इतना ही नहीं, आपके पास कितनी इन्वेंटरी पड़ी है, कौन सा प्रोसेस किस जगह पर फंसा हुआ है और उसके ऊपर रिमार्क क्या है, यह तमाम चीजें ईआरपी सॉफ्टवेयर में निहित होती हैं। 

सच कहा जाए तो किसी भी कंपनी को ईआरपी लागू करने से बड़ा फायदा होता है। जैसे इसके द्वारा आप अपनी कंपनी के फाइनेंसियल मैनेजमेंट को बिल्कुल सटीक रूप से समझ सकते हैं और उस पर नियंत्रण भी रख सकते हैं। इसी प्रकार किसी बिजनेस में उसके ग्राहक सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और उनसे जुड़ी तमाम जानकारियां, सपोर्ट, डिस्ट्रीब्यूशन मैनुअली संभव नहीं हो पाता है और ईआरपी इस कार्य को बेहद आसानी से प्रबंधित करता है और सिंगल क्लिक में आपके सामने रिपोर्ट आ जाती है कि कौन सी चीज डिलीवर हुई, किस प्रोडक्ट में फाल्ट है, किस बिल का पेमेंट हो गया है अथवा किस डिपार्टमेंट में हायरिंग का कोई प्रोसेस, किस जगह पहुंचा है। 

कोई प्रोडक्ट अगर आपकी कंपनी में डेवलप हो रहा है तो उसके स्टैंडर्डाइजेशन के लिए, टाइमली डिलीवरी तक के लिए ईआरपी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है तो मानव संसाधन में भी यह काफी उपयोगी होता है।

मुख्य रूप से ईआरपी 3 तीन तरह की श्रेणी में रखे जाते हैं। 

स्माल बिजनेस ईआरपी

छोटे बिजनेस के लिए। मतलब इस तरह के ईआरपी वहां इंस्टाल किये जाते हैं, जहाँ अपेक्षाकृत कम लोग कार्य करते हैं। इसे इंप्लीमेंट करने की कॉस्ट भी अपेक्षाकृत कम ही आती है। हालाँकि, कितना भी कम कास्ट रहे, किन्तु सामान्य सॉफ्टवेयर इंस्टालेशन से यह महंगा ही होता है। बहरहाल, इस तरह का ईआरपी जहाँ इनस्टॉल किया जाता है, उन कंपनियों में अपेक्षाकृत डिपार्टमेंट भी कम होते हैं। जाहिर तौर पर आप इसे शुरुआती लेवल का ईआरपी मान सकते हैं। सामान्य तौर पर यह सभी तरह के बिजनेस में अप्लाई हो जाती है और एक तरह से यह कॉमन ईआरपी कही जा सकती है।

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इंडस्ट्री ओरिएंटेड ईआरपी 

कल्पना कीजिए कि आप रियल एस्टेट का बिजनेस करते हैं अथवा आप ऑटो इंडस्ट्री के पार्ट्स बनाते हैं या फिर आप एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स का बिजनेस करते हैं। जाहिर तौर पर इसी तरह के दूसरे बिजनेस एक दूसरे से नेचर में अलग होते हैं। ऐसी स्थिति में कोई ईआरपी सभी इंडस्ट्रीज पर लागू नहीं हो सकती। खासकर तब जब कंपनी की साइज़ बड़ी हो। ऐसी स्थिति में किसी भी उद्योग की स्पेसिफिक ज़रूरतों के आधार पर ईआरपी डिवेलप की जाती है और उस उद्योग की ईआरपी को कंपनी के अनुसार कस्टमाईज एवं डिजिटलाइज किया जाता है। इसमें ट्रांसपेरेंट सिस्टम बनाया जाता है और समय अनुसार उसमें सुधार भी किया जाता है।

क्लाउड ईआरपी 

आज के समय में अधिकांश सॉफ्टवेयर क्लाउड बेस्ड हो गए हैं और इसमें आसान बात यह होती है कि कहीं से भी आप लागइन कर के एक-एक रिपोर्ट देख सकते हैं, अपना फीडबैक-रिमार्क दे सकते हैं। कई बार एक कंपनी की अलग-अलग जगहों पर डिफरेंट ब्रांच होती हैं या डिफरेंट प्लांट्स होते हैं, तो तमाम प्लांट्स को या अपनी कंपनी की ब्रांचेज को एक जगह से मैनेज करने में क्लाउड ईआरपी काफी लाभदायक होती है। इसलिए यह बड़ी संख्या में उपयोग में आने लगी है।

आप समझ ही चुके होंगे कि ईआरपी किसी में बिजनेस के लिए क्यों आवश्यक है। ऐसे में अगर पॉपुलर ईआरपी सिस्टम्स की बात किया जाए तो एसएपी (SAP) का नाम आता है। यह जर्मनी आधारित एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी है और तमाम बड़ी कंपनीज में इसका सिस्टम इंप्लीमेंट किया गया है। यह बेहद सक्सेसफुल ईआरपी मानी जाती है और इसके तमाम मॉड्यूल इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी कंपनी अपने रिसोर्सेज का बेहतर से बेहतर इस्तेमाल कर सके।

इसी प्रकार अमेरिका स्थित ओरेकल कंपनी भी क्लाउड ओरिएंटेड ईआरपी बनाती है और इसका सॉफ्टवेयर भी काफी प्रसिद्ध है। डेटाबेस मैनेज करने में ओरेकल का स्तर बाकी तमाम कंपनियों से काफी ऊंचा है। वस्तुतः डेटाबेस मैनेज करने में ओरेकल को महारत हासिल है।

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इनके अलावा भी माइक्रोसॉफ्ट डायनामिक्स, नेटसुईट, सिसप्रो, फाइनेंसियल फ़ोर्स, ओडू, डेस्केरा इत्यादि कम्पनियाँ वैश्विक स्तर के ईआरपी सॉफ्टवेयर बनाती हैं। लोकल स्तर पर भी कई ईआरपी सॉफ्टवेयर आप ले सकते हैं, जो अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं। इंटरनेट पर अगर आप सर्च करेंगे, अपने बिजनेस पर आधारित तो कई सारी छोटी कंपनियों के ईआरपी सॉफ्टवेयर मिल जाएंगे, जो संभवतः आपके बिजनेस को सूट करे। बजट के अनुसार कई कम्पनियां सस्ते ईआरपी सॉफ्टवेयर इन्स्टाल कराना प्रीफर करती हैं।

पर एक बात समझने लायक है कि आज के समय की बिजनेस की मूलभूत जरूरत बन गई है ईआरपी! क्योंकि अगर आप इसे इंप्लीमेंट नहीं करते हैं तो कंपटीशन में अपने प्रतिद्वंद्वियों से आप काफी पीछे जा सकते हैं। 

- मिथिलेश कुमार सिंह







असुरक्षित यौन संबंधों के कारण फैलता है हर्पीस, बीमारी होने पर नजर आते हैं यह लक्षण

  •  मिताली जैन
  •  जनवरी 29, 2020   14:05
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असुरक्षित यौन संबंधों के कारण फैलता है हर्पीस, बीमारी होने पर नजर आते हैं यह लक्षण

हर्पीस का सबसे पहला और मुख्य लक्षण है दाने निकलना। आमतौर पर लोग इन्हें एलर्जी समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन हर्पीस होने पर दानों में पानी होता है। यह दाने प्राइवेट पार्ट सहित शरीर के कई हिस्सों पर हो सकते हैं। यह हर दिन साइज में बढ़ते ही जाते हैं।

असुरक्षित यौन संबंध अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आते हैं। आमतौर पर लोग मानते हैं कि असुरक्षित यौन संबंधों के कारण व्यक्ति को एड्स हो सकता है। लेकिन हर्पीस भी एक ऐसी ही बीमारी है, जो असुरक्षित यौन संबंधों के कारण फैलती है। यह समस्या होने पर व्यक्ति के प्राइवेट पार्ट से लेकर शरीर के अन्य हिस्सों पर पानी भरे दाने निकल आते हैं। धीरे−धीरे यह थोड़े बड़े होते जाते हैं और फिर फूट जाते हैं। जब यह पानी शरीर के अन्य भागों पर फैलता है तो इससे शरीर के अन्य हिस्सों पर भी वह दाने हो जाते हैं। हर्पीस की समस्या होने पर इस इंफेक्शन को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लक्षण बार−बार उभरते हैं और उस समय के केवल उसका इलाज किया जा सकता है। यह समस्या होने पर दानों के अलावा भी कई लक्षण नजर आते हैं। तो चलिए जानते हैं इन लक्षणों के बारे में−

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पानी के दाने

हर्पीस का सबसे पहला और मुख्य लक्षण है दाने निकलना। आमतौर पर लोग इन्हें एलर्जी समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन हर्पीस होने पर दानों में पानी होता है। यह दाने प्राइवेट पार्ट सहित शरीर के कई हिस्सों पर हो सकते हैं। यह हर दिन साइज में बढ़ते ही जाते हैं।


खुजली का अहसास

जब व्यक्ति को हर्पीस की समस्या होती है तो दानों के साथ−साथ व्यक्ति को काफी खुजली भी होती है। हर्पीस के सबसे आम लक्षण आपकी योनि, योनी, गर्भाशय ग्रीवा, लिंग, बट, गुदा या आपकी जांघों के अंदर खुजली या दर्दनाक फफोले का एक समूह है। 


होता है दर्द

हर्पीस होने पर होने वाले दाने दर्दरहित नहीं होते। मूत्रत्याग करते समय जब पेशाब घावों को छूता है तो इससे काफी जलन व दर्द का अहसास होता है। साथ ही व्यक्ति को जननांगों के आसपास भी दर्द होता है। कई बार व्यक्ति को दानों के निकलने से पहले ही व्यक्ति को दर्द होना शुरू हो जाता है। इसके अलावा इस रोग के कारण व्यक्ति को पूरे शरीर में दर्द का अहसास होता है। ऐसा व्यक्ति अमूमन जोड़ों में दर्द, सिरदर्द व थकान की शिकायत करता है। 

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अन्य लक्षण

अगर हर्पीस एसएसवी−2 के कारण होता है, तो रोगी को फ्लू जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं, जैसे− श्रोणि क्षेत्र, गले व अंडरआर्म्स के नीचे सूजन ग्रंथियां, बुखार, ठंड लगना आदि।

रखें इसका ध्यान

हर्पीस के लक्षण आते हैं और चले जाते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर्पीस का संक्रमण दूर हो गया। जब व्यक्ति को एक बार हर्पीस हो जाता है तो यह ताउम्र आपके शरीर में रहता है और इसलिए आपसे इसे दूसरों को फैलने की संभावना बनी रहती है।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


इनडिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर वाला वीवो एक्स 21 लॉन्च, जानें कीमत

  •  शैव्या शुक्ला
  •  मई 31, 2018   17:22
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इनडिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर वाला वीवो एक्स 21 लॉन्च, जानें कीमत

चाइना निर्माता कंपनी वीवो ने अपने एक्स 21 स्मार्टफोन को नई दिल्ली में आयोजित एक इवेंट में लॉन्च कर दिया है। इस फोन की जो सबसे खास बात है, वो है इसका अंडर-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर फीचर।

चाइना निर्माता कंपनी वीवो ने अपने एक्स 21 स्मार्टफोन को नई दिल्ली में आयोजित एक इवेंट में लॉन्च कर दिया है। इस फोन की जो सबसे खास बात है, वो है इसका अंडर-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर फीचर। जिसका मतलब है कि इसमें डिस्प्ले के नीचे फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है। ऐसा स्मार्टफोन बनाने वाली वीवो दुनिया की पहली कंपनी बन गई है। इसके अलावा, यह फोन उन चुनिंदा स्मार्टफोन्स में शामिल है जिन्हें ऐंड्रॉयड पी बीटा डिवेलेपर प्रिव्यू 2 अपडेट मिला है। यह फोन वीवो ने सबसे पहले इसी साल मार्च में चीन में लॉन्च किया था। चीनी मार्केट में इस स्मार्टफोन के दो वेरिएंट उतारे गए थे- वीवो एक्स 21 और वीवो एक्स 21 यूडी। हालांकि, चाइना में वीवो एक्स 21 यूडी वेरिएंट इनडिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर के साथ आता है। वो सभी स्मार्टफोन यूज़र्स जो इस फोन का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे, वह इसे फ्लिपकार्ट से खरीद सकते हैं।

तो चलिए डालते हैं एक नज़र इस फोन के स्पेसिफिकेशंस पर-

वीवो एक्स 21 में 6.28 इंच एचडी+ (1080x2280 पिक्सल) सुपर एमोलेड डिस्प्ले है जिसका आस्पेक्ट रेशियो 19:9 है। यह फोन एंड्रॉयड 8.1 ओरियो पर आधारित फनटच ओएस 4.0 पर चलता है। साथ ही, इस फोन में 6 जीबी रैम के साथ क्वॉलकॉम स्नैपड्रैगन 660 प्रोसेसर के साथ एड्रेनो 512 जीपीयू दिया गया है। इस डुअल सिम फोन का रियर ग्लास का बना है और फोन के डिस्प्ले पर नॉच भी दिया गया है। फोन में लेटेस्ट इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनिंग टेक्नॉलजी दी गई है। कंपनी का मानना है कि यूज़र के लिहाज़ से नई फिंगरप्रिंट सेंसर टेक्नॉलजी बेहद सुविधाजनक है। इस हैंडसेट में ऊपर की तरफ एक आइरिस स्कैनर भी लगा हुआ है। इसकी इंटरनल मेमरी 128 जीबी है, जिसे मेमरी कार्ड की मदद से 256 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है। 

कैमरा: 

वीवो एक्स 21 में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। जिसमें प्राइमरी सेंसर 12 मेगापिक्सल का है जो एफ/1.8 अपर्चर से लैस है और सेकेंडरी सेंसर 5 मेगापिक्सल का है। फोन के फ्रंट में अपर्चर एफ/2.0, आईआर फिल लाइट और 3डी मैपिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसके साथ में एलईडी फ्लैश भी दिया गया है। फोन के रियर कैमरे में एआई एचडीआर, स्लो मोशन वीडियो रिकॉर्डिंग, पोर्ट्रेट और बोकेह मोड, लाइव फोटो, एआर स्टीकर्स और शॉट रीफोकस फीचर्स हैं। 

वीवो एक्स 21 के फीचर्स:

इस डिवाइस में एक खास तरह का एआई आधारित फेस अनलॉक फीचर और ब्यूटी मोड भी दिया गया है। फोन में 3200 एमएएच की पावरफुल बैटरी दी गई है जो फास्ट चार्जिंग सपॉर्ट करती है। यह स्मार्टफोन लेटेस्ट ओएस एंड्रॉयड 8.1 ओरियो पर रन करता है। यह फोन वीवो के अपने वर्चुअल असिस्टेंस जोवी से लैस है। वीवो एक्स 21 में कनेक्टिविटी के लिए 4जी वीओएलटीई, डुअल बैंड वाई-फाई 802.11 एसी, ब्लूटूथ 5.0, जीपीएस/ए-जीपीएस और माइक्रो-यूएसबी जैसे फीचर्स हैं। इस स्मार्टफोन का डाइमेंशन 154.5x74.8x7.4 मिलीमीटर और वज़न 156.2 ग्राम है। साथ ही, वीवो के इस फोन में म्यूज़िक लवर्स के लिए डीपफील्ड साउंड इफेक्ट दिया गया है। 

वीवो एक्स 21 की कीमत और उपलब्धता-

भारत में इस फोन को 35,990 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया है। यह स्मार्टफोन ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर एक्सक्लुसिवली बिक्री के लिए उपलब्ध है। फोन को एक्सचेंज ऑफर में खरीदने पर 3,000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलेगी। वहीं, एसबीआई कार्ड यूज़र्स के लिए 5 प्रतिशत का अतिरिक्त डिस्काउंट भी दिया गया है। दूसरे बैंकों के क्रेडिट कार्ड के ज़रिये भुगतान करने पर वीवो एक्स 21 को 12 महीने के लिए नो कॉस्ट ईएमआई पर खरीदा जा सकता है। साथ ही, यूज़र्स वीवो के ऑनलाइन स्टोर पर जाकर स्मार्टफोन को 2,000 रुपये एडवांस भुगतान के साथ प्री-बुक कर सकते हैं। इस फोन को तीन कलर वैरिएंट- ब्लैक, रूबी रेड और व्हाइट कलर में खरीदा जा सकता है।

मार्केट में इस फोन का मुकाबला वनप्लस 6 और हॉनर 10 जैसे प्रीमियम फोन्स से हो सकता है। अब देखना यह है कि लोगों को यह कितना पसंद आता है और किस फोन को कितनी टक्कर दे पाता है।

-शैव्या शुक्ला







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