भारत के अंतिम छोर कन्याकुमारी की रहस्य और रोमांच से भरी हैं ये 6 जगह

By रेनू तिवारी | Publish Date: Jun 1 2018 3:41PM
भारत के अंतिम छोर कन्याकुमारी की रहस्य और रोमांच से भरी हैं ये 6 जगह

भारत की धरती का अंतिम छोर कन्याकुमारी जो चारों तरफ से विशाल समुद्र को अपनी आगोश में समेटे हुए है। जहाँ तक नज़र उठा कर देखो बस ऐसा लगता है कि एक नीली सी चादर बिछी हुई है।

भारत की धरती का अंतिम छोर कन्याकुमारी जो चारों तरफ से विशाल समुद्र को अपनी आगोश में समेटे हुए है। जहाँ तक नज़र उठा कर देखो बस ऐसा लगता है कि एक नीली सी चादर बिछी हुई है। नीले सागर की लहरें मानो धरती पर नीला रंग बिखेर रही हों। समुद्र की लहरों की आवाज एक अलग सुकून देती है। और अगर बात सनसेट की जाए तो यहां से खूबसूरत सनसेट आपको यकीन मानिए कहीं ओर देखने को नहीं मिलेगा। कन्याकुमारी खूबसूरत पर्यटन स्थल होने के साथ साथ तीर्थ स्थल भी है। आज हम आपको कन्याकुमारी के कुछ रहस्य और रोमांच से भरी जगहों के बारे में बताएंगे।

तिरूवल्लुवर मूर्ति
 
कन्याकुमारी के दक्षिणी सिरे पर संत तिरुवल्लुवर की 133 फुट लंबी प्रतिमा बनाई गई है जहां अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर मिलते हैं। 133 फुट, तिरुक्कुरल के 133 अध्यायों या अथियाकरम का प्रतिनिधित्व करते हैं। तिरुवल्लुवर एक प्रख्यात तमिल कवि हैं जिन्होंने तमिल साहित्य में नीति पर आधारित कृति थिरूकुरल का सृजन किया। और उनकी तीन अंगुलियां अरम, पोरूल और इनबम नामक तीन विषय अर्थात नैतिकता, धन और प्रेम के अर्थ को इंगित करती हैं।
 


पद्मानभापुरम महल
 
वैसे तो भारत में ऐसी बहुत सी हवेलियां हैं जिनका एक लंबा इतिहास है। लेकिन कन्याकुमारी में राजा त्रावनकोर द्वारा बनाई गई यह विशाल हवेली अपनी सुदंरता और भव्यता के लिए बहुत मशहूर है। धार्मिक के साथ-साथ आप यहां यह ऐतिहासिक महल भी देख सकते हैं।
 
अम्मन मंदिर
 


कुमारी अम्मन मंदिर कन्याकुमारी, तमिलनाडु में स्थित है। समुद्र के तट पर स्थित 'कुमारी अम्मन मंदिर' दक्षिण भाषी लोगों की श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केन्द्र है। इस मंदिर का निर्माण पाण्ड्य राजवंश के शासन काल में हुआ था।
 
नागराज मंदिर
 
यह कन्याकुमारी से 20 किमी दूर नगरकोल में नागराज का मन्दिर नाग देव को समर्पित है। यहाँ पर भगवान विष्णु और शिव के दो अन्य मन्दिर भी हैं। 


 
कोरटालम झरना
 
कन्याकुमारी में घूमने के लिए बहुत कुछ है लेकिन घने जंगल के बीच बहता झरना बेहद खूबसूरत हैं। इस झरने के पानी को औषधीय गुणों से युक्त माना जाता है। यह झरना कन्याकुमारी से 137 किमी दूर है।
 
विवेकानंद रॉक मेमोरियल
 
विवेकानन्द रॉक मेमोरियल रामकृष्ण परमहंस के भक्त स्वामी विवेकानन्द को समर्पित है। श्री रामकृष्ण रामकृष्ण मिशन के संस्थापक थे। विवेकानन्द रॉक मेमोरियल को 1970 ई0 में नीले तथा लाल ग्रेनाइट के पत्थरों से निर्मित किया गया था। यह समुद्रतल से 17 मीटर की ऊँचाई पर एक पत्थर के टापू की चोटी पर स्थित है। 
 
कैसे पहुंचें 
 
कन्याकुमारी पहुंचने के लिए अगर आप प्लेन से आ रहे हैं तो नजदीकी 'त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा' पर उतरें। रेल मार्ग के लिए आप कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं, जो भारत के कई अहम शहरों से जुड़ा हुआ है। आप चाहें तो सड़क मार्ग से भी यहां तक पहुंच सकते हैं। दक्षिण भारत के कई अहम शहर सड़क मार्गों के द्वारा कन्याकुमारी से जुड़े हुए हैं।
 
-रेनू तिवारी

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