शिवभक्त हैं तो भारत के इन मंदिरों के जरूर करें दर्शन

  •  मिताली जैन
  •  अक्टूबर 2, 2020   19:06
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शिवभक्त हैं तो भारत के इन मंदिरों के जरूर करें दर्शन

लिंगराज मंदिर ओडिशा में भुवनेश्वर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। कलिंग शैली की वास्तुकला का एक अद्भुत चमत्कार, लिंगराज का शानदार मंदिर भगवान हरिहर के समर्पण में बनाया गया है, जो भगवान शिव के एक अवतार के रूप में जाने जाते हैं।

भारत के हर राज्य में आपको कई मंदिर देखने को मिलेंगे। कश्मीर की उत्तरी घाटियों से लेकर तमिलनाडु के दक्षिणी तटों तक, आपको पूरे कस्बों और शहरों में कई मंदिर मिलेंगे। अगर यह कहा जाए कि यहां हर मोड़ पर एक मंदिर है, तो गलत नहीं होगा। भारत की आस्था व यहां के मंदिर दूर−दूर से श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लाते हैं। वैसे तो हर मंदिर की अपनी एक अलग खासियत है, लेकिन भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित हैं। ऐसे में शिव भक्तों को इन मंदिरों के दर्शन जरूर करने चाहिए। तो चलिए आज हम आपको भारत में मौजूद कुछ शिव मंदिरों के बारे में बता रहे हैं−

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लिंगराज मंदिर

लिंगराज मंदिर ओडिशा में भुवनेश्वर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। कलिंग शैली की वास्तुकला का एक अद्भुत चमत्कार, लिंगराज का शानदार मंदिर भगवान हरिहर के समर्पण में बनाया गया है, जो भगवान शिव के एक अवतार के रूप में जाने जाते हैं। भले ही यह मंदिर शुरू में सोमवंशी वंश के शासकों द्वारा स्थापित किया गया था, लेकिन बाद में इसे पुनर्निर्मित किया गया और गंगा वंश के शासकों द्वारा थोड़ा संशोधित किया गया। 

दक्षेश्वर महादेव मंदिर

दक्षेश्वर महादेव मंदिर वर्ष 1810 में दनकौर की रानी द्वारा स्थापित किया गया था। यह बालद्वार से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर का नाम देवी सती के पिता के नाम पर रखा गया है। वर्ष 1962 में इसका जीर्णोद्धार भी किया गया है। महाशिवरात्रि के अवसर पर इस आकर्षक मंदिर में एक महान उत्सव मनाया जाता है।

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अन्नामलाईयार मंदिर

अन्नामलाईयार मंदिर तिरुवनमलाई में स्थित है और तमिलनाडु में प्रसिद्ध शिव मंदिरों की सूची में सबसे ऊपर आता है। इस मंदिर की वास्तुकला हर किसी को बेहद आकर्षित करती है। यह तमिल क्षेत्र के कई शास्त्रों के लिए भी एक प्रेरणा है और अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि एक ही दिन में पांच अनुष्ठान होते हैं। इस मंदिर में जाने का सबसे अच्छा समय कार्तिगई दीपम त्योहार के समय का है।

भवनाथ महादेव मंदिर

गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित, यह मंदिर हिंदू धर्म के साथ−साथ जैन धर्म के लोगों के लिए मुख्य स्थानों में से एक है। इस मंदिर का एक मुख्य आकर्षण भवनाथ मेला है। यहां पर नागा साधुओं की उपस्थिति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपको इस मेले के समय यहां रहना चाहिए।

मिताली जैन







वीकेंड हॉलिडे के लिए एकदम परफेक्ट है रानीखेत, जानिए इस खूबसूरत जगह के बारे में

  •  मिताली जैन
  •  मार्च 2, 2021   18:22
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वीकेंड हॉलिडे के लिए एकदम परफेक्ट है रानीखेत, जानिए इस खूबसूरत जगह के बारे में

रानी झील एक आर्टिफिशियल झील है जिसे भारतीय सेना के कैंटोनमेंट बोर्ड ने वर्षा जल संचयन के उद्देश्य से बनाया था, लेकिन यह अब रानीखेत में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है। 2500 फीट की ऊंचाई पर स्थित, रानी झेल पिकनिक, रोमांटिक सैर और नौका विहार के लिए एक सुंदर स्थान है।

हिमालय की शांति के बीच, 1,869 मीटर की ऊंचाई पर एक छोटा रानीखेत स्थित है। रानीखेत भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक प्रमुख पहाड़ी पर्यटन स्थल है। इस छोटे से शहर की घाटियों में, दिन भर में सैकड़ों घंटियाँ और हिमालयी वन की मधुर ध्वनि सुन सकते हैं। देवदार और बलूत के वृक्षों से घिरे रानीखेत में घूमने के लिए कई बेहतरीन स्थान हैं जो दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों के हजारों पहाड़ी प्रेमियों को इस छावनी में आकर्षित करते हैं। तो चलिए आज हम आपको रानीखेत में घूमने के कुछ बेहतरीन स्थानों के बारे में बता रहे हैं−

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चौबटिया गार्डन

600 एकड़ की रोलिंग भूमि में फैला, चौबटिया गार्डन रानीखेत के सबसे अच्छे पर्यटन स्थलों में से एक है। प्लम, नाशपाती, सेब और खुबानी के रोपण के लिए जाना जाता है, यह विभिन्न रंगों के साथ चित्रित एक सुंदर बाग है। यह खूबसूरत दृश्यों का आनंद लेते हुए इत्मीनान से टहलने और परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए एक आदर्श स्थान है। यहाँ से नंदादेवी, त्रिशूल और नीलकंठ जैसी हिमालय की चोटियाँ भी साफ−सुथरी धूप में दिखाई दे सकती हैं। यह सबसे खूबसूरत रानीखेत पर्यटन स्थलों में से एक है।

रानी झील 

रानी झील एक आर्टिफिशियल झील है जिसे भारतीय सेना के कैंटोनमेंट बोर्ड ने वर्षा जल संचयन के उद्देश्य से बनाया था, लेकिन यह अब रानीखेत में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है। 2500 फीट की ऊंचाई पर स्थित, रानी झेल पिकनिक, रोमांटिक सैर और नौका विहार के लिए एक सुंदर स्थान है। यह निश्चित रूप से रानीखेत में सबसे रोमांटिक पर्यटन स्थलों में से एक है।

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कुमाऊँ रेजिमेंटल सेंटर संग्रहालय

इस संग्रहालय की स्थापना 1970 के दशक की शुरुआत में भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट ने इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत को दर्शाने के लिए की थी। यह संग्रहालय भारतीय सेना में कुमाऊं और गढ़वाल रेजीमेंट के गौरवशाली योगदान और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाली युद्ध कलाकृतियों का घर है। यह रानीखेत में सबसे अधिक देखी जाने वाली पर्यटक जगहों में से एक है। संग्रहालय में कारगिल युद्ध से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रानी लक्ष्मी बाई के कुछ चांदी के स्केप्टर्स भी रखे हैं।

मजखली

प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध, मजखली शांति साधकों के लिए रानीखेत में सबसे अच्छी जगहों में से एक है। अल्मोड़ा रोड पर स्थित, रानीखेत से 12 किलोमीटर दूर− मजखली एक विचित्र और मनोरम हैमलेट है, जो हिमालय की चोटियों, विशेष रूप से त्रिशूल को देखने के लिए लोकप्रिय है। यह जगह वनस्पतियों और जीवों की समृद्ध किस्मों के लिए एक निवास स्थान है और एक विंटेज काली मंदिर के लिए भी लोकप्रिय है।

मिताली जैन







सफेद शहर उदयपुर में मौजूद हैं घूमने की कई बेहतरीन जगहें, जानिए

  •  मिताली जैन
  •  फरवरी 27, 2021   16:54
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सफेद शहर उदयपुर में मौजूद हैं घूमने की कई बेहतरीन जगहें, जानिए

पिछोला झील एक कृत्रिम झील है, यह झील शहर की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी झील है। पिछोला झील का दौरा नाव की सवारी के बिना अधूरा है। यह झील कई सुरम्य दृश्य प्रदान करती है और यहां पर सूर्यास्त का भी एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता हैं।

उदयपुर, राजस्थान का एक बेहद ही खूबसूरत शहर है और इसका एक शानदार इतिहास है। उदयपुर लोकप्रिय रूप से द सिटी ऑफ लेक के रूप में जाना जाता है और यह स्थान वेनिस और पूर्व के तथाकथित वेनिस का अहसास देता है। इसे भारत के व्हाइट सिटी के रूप में भी जाना जाता है और उदयपुर के व्हाइट सिटी होने के पीछे का कारण यह है कि यह आश्चर्यजनक झीलों और खूबसूरत संगमरमर वास्तुकला का एक घर है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको उदयपुर में घूमने की कुछ खूबसूरत जगहों के बारे में बता रहे हैं−

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पिछोला झील 

पिछोला झील एक कृत्रिम झील है, यह झील शहर की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी झील है। पिछोला झील का दौरा नाव की सवारी के बिना अधूरा है। यह झील कई सुरम्य दृश्य प्रदान करती है और यहां पर सूर्यास्त का भी एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता हैं। यह स्थान दंपतियों के लिए आदर्श है क्योंकि वे झील के आसपास के रास्ते में टहल सकते हैं और सूर्यास्त का भी आनंद ले सकते हैं।

विंटेज कार म्यूजियम

उदयपुर न केवल किलों और झीलों के लिए जाना जाता है बल्कि यहां पर एक विंटेज कार म्यूजियम भी है। इस संग्रहालय में कई पुरानी कारें हैं जो उदयपुर के मेवाड़ राजवंश द्वारा उपयोग की जाती थीं। यहां आपको विंटेज रोल्स रॉयस, मर्सिडीज के मॉडल देखने को मिलेंगी, ये सभी कारें कस्टम और रॉयल्स के स्वामित्व वाली थीं। 1934 में रोल्स रॉयस फैंटम को यहां संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है जिसका उपयोग प्रसिद्ध जेम्स बॉन्ड फिल्म में किया गया था। यहां लगभग 20 प्राचीन कारें मौजूद हैं जो मोटर प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है।

बागोर की हवेली

इसे 18 वीं शताब्दी में पिछोला झील के तट पर बनाया गया था। बाद में इस जगह को एक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया। इस संग्रहालय में राजपूतों द्वारा उपयोग की जाने वाली चीजें जैसे गहने, हाथ के पंखे, तांबे के बर्तन आदि हैं। इस हवेली में 100 से अधिक कमरे हैं और इसकी वास्तुकला की अनूठी शैली शानदार है। हवेली का मुख्य आकर्षण "धरोहर डांस शो" है और इसे हर शाम आयोजित किया जाता है और यह राजस्थान की संस्कृति और लोक परंपरा को प्रदर्शित करता है।

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फतह सागर झील 

फतह सागर झील उदयपुर में एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो अरावली पहाडि़यों से घिरी हुई है। यह जगह शहर की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। कोई भी मोती−मगरी सड़क पर ड्राइविंग करके फतह सागर झील की परिधि देख सकता है। यहां पर आप हाथ बोटिंग से लेकर कुछ वाटर स्पोर्ट्स का मजा ले सकते हैं।

मिताली जैन







कृष्ण जन्मभूमि मथुरा है बेहद खास, इन प्रसिद्ध जगहों पर जरूर जाएं एक बार!

  •  सिमरन सिंह
  •  फरवरी 24, 2021   10:17
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कृष्ण जन्मभूमि मथुरा है बेहद खास, इन प्रसिद्ध जगहों पर जरूर जाएं एक बार!

अगर आप मथुरा जा रहे हैं तो सबसे पहले कृष्ण जन्मभूमि मंदिर ही जाएं। कृष्ण जन्मभूमि से ही आपको ये साफ हो गया होगा कि ये कृष्ण भगवान का जन्म स्थान है। बता दें कि इस मंदिर को उसी कारागार के बाहर बनाया गया है जहां भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था।

भगवान कृष्ण की नगरी कहलाई जाने वाला धार्मिक स्थल मथुरा दुनियाभर में पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध है। यहां भगवान कृष्ण के दर्शन करने के लिए विश्वभर से पर्यटक आते हैं। ये स्थल भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि से भी जाना जाता है। विशेषतौर होली मानाने के लिए यहां दूर-दूर से लोग आया करते हैं। यहां कृष्ण मंदिर के अलावा कई अन्य जगह भी हैं जहां आप घूमने के लिए जा सकते हैं। मथुरा से करीब 56 किलोमीटर की दूरी पर आगरा है। आप चाहें तो मथुरा के साथ-साथ आगरा भी घूमने जा सकते हैं। वहीं, अगर आप मथुरा घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आज हम आपको जिन प्रमुख जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं वहां आप घूमने जा सकते हैं। आइए आपको मथुरा के कुछ प्रमुख स्थानों के बारे में बताते हैं...

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कृष्ण जन्मभूमि

अगर आप मथुरा जा रहे हैं तो सबसे पहले कृष्ण जन्मभूमि मंदिर ही जाएं। कृष्ण जन्मभूमि से ही आपको ये साफ हो गया होगा कि ये कृष्ण भगवान का जन्म स्थान है। बता दें कि इस मंदिर को उसी कारागार के बाहर बनाया गया है जहां भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था। कहते हैं कि यहां कृष्ण भगवान की शुद्ध सोने से बनी 4 मीटर की मूर्ति थी, जिसको महमूद गजनवी द्वारा चुरा लिया गया था। 

बांके बिहारी मंदिर

मथुरा के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक बांके बिहारी मंदिर है। ये राधा वल्लभ मंदिर के पास स्थित है। बता दें कि भगवान कृष्णा का दूसरा नाम बांके बिहारी भी है। इस मंदिर में बांके बिहारी की मूर्ति काले रंग की होती है। इस मंदिर में पहुंचने के लिए आपको संकरी गलियों से जाना पड़ेगा।

द्वारकाधीश मंदिर

अगर आप भगवान कृष्ण से संबंधित घटनाएं कलाकृतियां देखना चाहते हैं तो द्वारकाधीश मंदिर जा सकते हैं। ये मंदिर विश्राम घाट के निकट स्थित है। इसका निर्माण साल 1814 में किया गया था। इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है, खासतौर पर जन्माष्टमी में यहां ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है।

मथुरा संग्रहालय

मंदिर के दर्शन करने के अलावा आप म्यूजियम भी देखने जा सकते हैं। साल 1974 में मथुरा संग्रहालय का निर्माण किया गया था। इस संग्रहालय का पहले नाम "कर्जन म्यूजियम ऑफ आर्कियोलॉजी" था। यहां आप कुषाण और गुप्त वंश से संबंधित कई कलाकृतियां देख सकते हैं। यहां अनोखी वास्तुकला और कई कलाकृतियों हैं, इसका चित्र भारत सरकार के स्टैंप पर भी छापा गया है।

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कुसुम सरोवर

मथुरा के प्रमुख स्थानों में से एक कुसुम सरोवर है। ये लगभग 60 फीट गहरा और 450 फीट लंबा है। इस सरोवर का नाम राधा के नाम पर रखा गया है। कहते हैं कि यहां भगवान कृष्ण और राधा मिलने के लिए आया करते थे। कुसुम सरोवर में कई लोग नहाने भी आते हैं, यहां का पानी शांत और साफ-सुथरा है। यहां पर होने वाली शाम की आरती यहां का मुख्य आकर्षण केंद्र, कई पर्यटक इस दृष्य को अपने कैमरे में भी कैद करते हैं।

गोवर्धन पर्वत

अगर आप मथुरा घूमने आए हैं तो गोवर्धन पर्वत के दर्शन करने भी जरूर जाएं। इसका हिन्दू पौराणिक साहित्य में बेहद खास महत्व है। पौराणिक ग्रंथो के अनुसार भगवान कृष्ण ने अपनी एक छोटी उंगली से इस पर्वत को उठा लिया था। इस पर्वत का दर्शन करने वाले लोग इसके चक्कर जरूर लगाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करना अच्छा होता है और भगवान कृष्ण की खास कृपा होती है।

कंस किला

जयपुर के महाराजा मानसिंह द्वारा कंस किले का निर्माण किया गया था। अकबर के नवरत्नों में मानसिंह शामिल थे। हिन्दू और मुगल वास्तुकला के मिश्रण का अच्छा नमूना ये मंदिर यमुना नदी के किनारे स्थित है।

- सिमरन सिंह







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