भरपूर मौज मस्ती के लिए मुम्बई के आसपास खास हैं यह डेस्टिनेशन

  •  डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
  •  नवंबर 16, 2020   18:36
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भरपूर मौज मस्ती के लिए मुम्बई के आसपास खास हैं यह डेस्टिनेशन
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मुम्बई के आसपास 90 किमी दूर पश्चिमी घाट में बसा हुआ मारेथान खूबसूरत हिल स्टेशन पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र विश्व के ऐसे गिने-चुने स्थानों में से एक है, जहां वाहनों के प्रवेश की अनुमति नहीं होने से यहां का वातावरण शांत बना रहता है।

सपनों का शहर मुम्बई सैलानियों के लिए अनेक आकर्षणों से भरपूर है। इस बार आपको बता रहे हैं उस खास स्थलों के बारे में जो मुम्बई के आसपास आपकी मौज-मस्ती के लिए हैं। इन स्थानों की सुंदरता निश्चित ही आपको मोहित कर लेगी और आपको रिलेक्स कर नई ऊर्जा एवं ताजगी से भर देगी। चलिए आप भी इनमें से किसी भी स्थान की सैर का प्रयोग्राम बनाये।

येऊर हिल्स 

मुम्बई से 25 किमी दूर संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पूर्वी भाग में स्थित, येऊर हिल्स झरनों और घने वनक्षेत्र के साथ यह छोटी सी मनमोहक पहाड़ी उन प्रकृति प्रेमियों के लिए जन्नत है जो जंगल के रास्तों पर ट्रेकिंग करते हुए अपना दिन बिताना चाहते हैं। पक्षी विहार के शौकीनों और स्कूली बच्चों के पसंदीदा येऊर हिल्स में कुछ रिज़ॉर्ट्स भी हैं जहां आप आराम करते हुए ज़ायकेदार भोजन का लुत्फ लेकर अपना पूरा दिन बिता सकते हैं।

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मारेथान हिल 

मुम्बई के आसपास 90 किमी दूर पश्चिमी घाट में बसा हुआ मारेथान खूबसूरत हिल स्टेशन पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र विश्व के ऐसे गिने-चुने स्थानों में से एक है, जहां वाहनों के प्रवेश की अनुमति नहीं होने से यहां का वातावरण शांत बना रहता है। यहां आप वन क्षेत्रों में लंबी वॉक और, घुड़सवारी कर सकते हैं। प्राकृतिक नज़रों के साथ हनीमून पॉइंट और शारलट लेक के किनारे पिकनिक मनाने का लुत्फ उठा सकते हैं। 

लोनावाला हिल 

मुंबई से स 96 किमी दूर लोनावाला हिलस्टेशन जितना अपनी चिक्की के लिए मशहूर है उतना ही अपने मनमोहक दृश्यों के लिए पिकनिक स्पॉट के लिये भी प्रसिद्ध है। राजमाची पॉइंट कई लोगों का पसंदीदा स्थल है क्योंकि यह शिवाजी के मशहूर किले– राजमाची- का बेहतरीन दृश्य दिखाता है। टाइगर्स पॉइंट जिसे टाइगर्स लीप भी कहा जाता है, एक अन्य दर्शनीय स्थल है जहां पर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। 650 मीटर से अधिक की खड़ी ढाल और सिर्फ बारिश के मौसम में बहने वाले एक छोटे से झरने के साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए यह बहुत ही रमणिक स्थल है।

एम्बी वैली 

लोनावला से 30 मिनट और मुंबई से 105 किमी की दूरी पर स्थित एम्बी वैली तरह-तरह की गतिविधियों और रोमांच से भरा दिन बिताना पसंद करने वालों और आलीशान मनोरंजक सैर के लिए खूबसूरत पर्यटक स्थल एवं आदर्श पिकनिक स्पॉट है। करीब 10 हज़ार एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली इस वैली के एक लग्ज़री रिज़ॉर्ट में इंडोर और आउटडोर गतिविधियों के साथ बहुत सारे विकल्प उपलब्ध हैं। यहाँ 7 स्टार रेस्टोरेंट, 18-होल गोल्फ कोर्स, फैंसी वाटर पार्क के साथ-साथ बच्चों के लिए एक आकर्षक विशेष खंड भी बना है।

कोलाड

मुंबई से 121 किलोमीटर दूर और सहयाद्री पर्वत श्रृंखला में स्थित, रायगढ़ जिले में कोलाड रोमांचक गतिविधियों का केंद्र है। यहाँ कुंडलिका नदी में व्हाइट वाटर राफ्टिंग और अपने ट्रेकिंग ट्रेल्स के लिए काफी प्रसिद्ध है। राफ्टिंग के अलावा, कनूइंग, कायाकिंग, पैराग्लाइडिंग, रैपलिंग, रॉक क्लाइंबिंग और रिवर ज़िप लाइन क्रॉसिंग जैसे रोमांचक खेलों का आनन्द भी उठा सकते हैं। वाटरफॉल रैपलिंग और माउंटेन बाइकिंग कुछ ऐसी ऐक्टिविटीज़ हैं जो रोमांच पसंद लोगों को कोलाड की ओर आकर्षित करती हैं।

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सुला वाइनयार्ड्स

मुंबई से करीब 230 किमी दूर स्थित वाइनयार्ड में आप आराम और ताज़गी का अनुभव कर सकते हैं। अगर आप ग्रेप-टू-ग्लास का अनुभव करना चाहते हैं तो अंगूर के बागों और वाइनरी की पूरी सैर करें, या सिर्फ एक्सक्लूसिव इन-हाउस विला—सुला बियॉन्ड में कुछ पल बिताएं। सुला वाइनयार्ड एक दिन या सप्ताहान्त ठहराव के लिए बिलकुल उपयुक्त जगह है। वहां के दिन-भर चलने वाले डाइनिंग रेस्टोरेंट कैफे रोज़ में खाना खाने, पूल में तैरने और कंट्री रोड्स पर साइकिल की सवारी करने का अलग ही मज़ा है। सुला की ओर बढ़ते हुए आप वैतरणा नदी पर बने वैतरणा बांध का चक्कर लगा सकते हैं जो अपने सुन्दर लगून तथा मनमोहक परिवेश के लिए लोकप्रिय है।

पंचगनी

सहयाद्री पर्वत श्रृंखला की पांच पहाड़ियों और गांवों से मिलकर बना पंचगनी मुंबई और पुणे के पिकनिक मनाने वालों के लिए एक प्रमुख स्थल बन गया है। पंचगनी मुंबई से 285 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और अपने स्वास्थ्यकर जलवायु के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थित सिडनी पॉइंट पर अवश्य जाएं जहां से आप धोम डैम द डेविलस किचन का नज़ारा देख सकते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार पंचगनी में पांडवों ने अपने निर्वसन काल का कुछ समय बिताया था। पारसी पॉइंट से कृष्णा घाटी का शानदार दृश्य दिखाई देती है।

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल

पत्रकार एवं लेखक







जा रहे हैं जापान तो जरूर जाएं इन मंदिरों में

  •  मिताली जैन
  •  दिसंबर 1, 2020   18:46
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जा रहे हैं जापान तो जरूर जाएं इन मंदिरों में
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हिदा−सन्नोगु ऊंचे पेड़ों से घिरा हुआ है जो इसे बौना लगता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा, तीर्थस्थल को शिंटो सन्नो मात्सुरी उत्सव में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है, जो जापान के तीन सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।

जापान एक ऐसा देश है, जहां पर हजारों मंदिर हैं। इसलिए अगर आप जापान जाएं और वहां के मंदिरों में ना घूमें तो यकीनन आपकी यात्रा अधूरी ही रह जाएगी। यह मंदिर आपको जापान की संस्कृति, परंपराओं और इतिहास की जानकारी देते हैं। वैसे जापान में आपको सिर्फ बौद्ध धर्म से जुड़े मंदिर ही नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के भी रंग देखने को मिलेंगे। तो चलिए आज हम आपको जापान के कुछ मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जहां पर आपको एक बार जरूर जाना चाहिए−

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हिदा−सन्नोगु तीर्थ, तकयामा

हिदा−सन्नोगु ऊंचे पेड़ों से घिरा हुआ है जो इसे बौना लगता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा, तीर्थस्थल को शिंटो सन्नो मात्सुरी उत्सव में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है, जो जापान के तीन सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।

किन्काकुजी मंदिर (क्योटो)

किन्काकुजी मूल रूप से 1397 में एक शोगुन, या सैन्य प्रमुख के घर के रूप में बनाया गया था। इमारत को पूरी तरह से सोने की पत्ती में कवर किया गया था, जिससे इसे गोल्डन पैवेलियन का खिताब मिला। इसके उद्यान आपको धरती पर स्वर्ग का अहसास करवाते हैं।

सेंसो−जी मंदिर (टोक्यो)

जापान में इस मंदिर की अपनी एक अलग मान्यता है। किंवदंती है कि दो भाइयों ने बार−बार देवी कन्नन की एक मूर्ति को सुमिदा नदी में लौटाने की कोशिश की। हर बार, अगले दिन तक मूर्ति लौट आई थी। इसके बाद देवी के सम्मान में उस स्थान पर सेंसो−जी मंदिर बनाया गया था। शाम को मंदिर की सुदंरता देखते ही बनती है। मंदिर असाकुसा स्टेशन से महज पांच मिनट के वॉकिंग डिस्टेंस पर मौजूद है।

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टोडाई−जी मंदिर (नारा)

नारा में टोडाई−जी मंदिर दुनिया की सबसे बड़ी लकड़ी की इमारत है। इसमें बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा भी है। बुद्ध की प्रतिमा की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मध्यम आकार का मानव प्रतिमा के एक नथुने के माध्यम से फिट हो सकता है। यहां पर आने वाले लोग साइट पर घूमने वाले हिरणों के अनुकूल झुंड का भी आनंद लेते हैं।

संजुसांगोन्दे मंदिर (क्योटो)

संजुसांगोन्दे मंदिर जिसे पूर्व में रेंगेइन मंदिर भी कहा जाता है, अपनी धार्मिक मूर्तियों की संख्या के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां के द ग्रेट हॉल में कन्नन देवी के 1,001 लाइफ साइज इमेज मौजूद हैं, जो मंदिर के दृश्य को मनोरम बनाते हैं।

मिताली जैन 







बेजोड़ है राजस्थान की संस्कृति और वीर गाथाओं से भरा है यहां का इतिहास

  •  प्रीटी
  •  नवंबर 27, 2020   15:18
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बेजोड़ है राजस्थान की संस्कृति और वीर गाथाओं से भरा है यहां का इतिहास
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सामान्य बोलचाल की भाषा में राजस्थान के लोग इसे रजवाड़ा कहकर पुकारते थे जबकि कुछ शिक्षित और आधुनिक लोग इसे राजस्थान कहते थे। अंग्रेजों ने इसे 'राजपूताना' कहा। परन्तु इसका शुद्ध और सार्थक नाम राजस्थान ही है।

वैसे तो लगभग सभी राज्यों की संस्कृति अलग−अलग है और प्रत्येक राज्य का अपना एक अलग ऐतिहासिक महत्व है। लेकिन भारत के पश्चिमी राज्यों में शुमार राजस्थान की बात ही अलग है। राजस्थान की संस्कृति सबसे अलग तो है ही साथ ही इस राज्य का साहित्य और वास्तुकला के क्षेत्र में भी खासा योगदान रहा है। इसी प्रदेश में अनेक वीर राजा भी हुए हैं जो आज भी अपनी वीरता और शौर्य के लिए याद किए जाते हैं।

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दरअसल राजस्थान का उल्लेख सर्वप्रथम प्रागैतिहासिक काल में प्रथम बार उभर कर सामने आया था। ईसा पूर्व 2000 और 9000 के बीच के समय में यहां की संस्कृति सिन्धु घाटी की सभ्यता जैसी थी। प्राचीन काल में राजस्थान छोटी−छोटी रियासतों में विभाजित था, जहां भिन्न−भिन्न राजाओं का शासन था। इन छोटी−छोटी रियासतों के अलग−अलग नाम थे, जिन्हें राजस्थान नहीं कहा जाता था, किन्तु यह सत्य है कि राजस्थान में सदैव आर्य जाति के लोगों का राज रहा है। 

सामान्य बोलचाल की भाषा में राजस्थान के लोग इसे रजवाड़ा कहकर पुकारते थे जबकि कुछ शिक्षित और आधुनिक लोग इसे राजस्थान कहते थे। अंग्रेजों ने इसे 'राजपूताना' कहा। परन्तु इसका शुद्ध और सार्थक नाम राजस्थान ही है। देश भर के इतिहास में राजस्थान का इतिहास विशिष्ट स्थान रखता है, जहां बहुत प्राचीन काल में ही आकर आर्य जातियां बस गई थीं। वर्तमान श्रीगंगानगर जिले के कालीबंगा नामक स्थान पर इससे भी पूर्व विस्तृत सिन्धु घाटी सभ्यता के ऐसे चिन्हों का पता लगा है जिनकी सत्यता को आधुनिक काल के इतिहासकारों ने पुष्ट किया है। जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर में भी प्राचीन सभ्यता के जो अवशेष और चिन्ह पाये गये हैं, उनसे भी इस तथ्य की पुष्टि होती है कि यहां विकसित सभ्यता किसी भी प्रकार सिन्धु घाटी की सभ्यता से कम नहीं थी। जयपुर जिले के बैराठ नामक स्थान पर हुई खुदाई से प्राप्त चिन्हों से भी राजस्थान के प्राचीन इतिहास और यहां कि विस्तृत प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का पता चलता है। सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया चीनी यात्री हवेनसांग राजस्थान के 'भीनभाल' नामक स्थान पर भी गया था, जिससे राजस्थान के इतिहास और संस्कृति की प्राचीनता का पता चलता है।

यहां के शासकों और राजाओं की अद्भुत वीरता, अदम्य साहस, असाधारण पराक्रम और अतुलनीय बलिदान जैसी कहानियां राजस्थान के इतिहास में मिलती हैं। भारत के अन्य राज्यों के इतिहास में वीरता, साहस, पराक्रम और बलिदान के उदाहरण राजस्थान की अपेक्षा काफी कम मिलते हैं। राजस्थान के इतिहास में राणा सांगा, महाराणा प्रताप, जयमल व पत्ता, वीर दुर्गादास, हांड़ा रानी, पृथ्वीराज चौहान तथा महारानी पद्मिनी ने अपनी वीरता, शौर्य और बलिदान के जो उदाहरण पेश किये, जिस प्रकार अपनी आन पर मर मिटे, उससे राजस्थान की श्रेष्ठता और महानता में चार−चांद लग गये। रानी पद्मिनी का जौहर, उदय सिंह को बनवीर से बचाने के लिए पन्नाबाई द्वारा अपने पुत्र चन्दन का बलिदान, कृष्ण दीवानी मीराबाई का राजभय से मुक्त धर्म प्रचार आदि ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जिनमें यहां की स्त्रियों की महानता और चरित्र बल झलकता है और जिसने राजस्थान के नाम को गरिमा प्रदान की है।

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पवित्र राजस्थान की मरूभूमि जहां वीर भामाशाह जैसे महापुरूष पैदा हुए, वहीं गुलाबी नगरी जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह भी अपनी कलाप्रियता और श्रेष्ठता के लिए विश्व विख्यात हैं। प्राचीन इतिहास की बात छोड़कर आधुनिक काल की बात करें, तो भी राजस्थान की इस महान घाटी ने अर्जुन लाल सेठी, ठाकुर केसर सिंह, जय नारायण व्यास, जमना लाल बजाज, विजय सिंह 'पथिक' आदि ऐसे महान स्वतंत्रता सैनानियों को जन्म दिया है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जिनकी महानता की अपनी एक चारित्रिक विशेषता है। साहित्य और कला के क्षेत्र में राजस्थान का भक्ति साहित्य बहुत प्रसिद्ध है। कृष्ण−भक्ति पर प्रेम दीवानी मीरा की रचनाओं ने जहां राजस्थान में भक्ति संगीत की धारा प्रवाहित की वहीं दूसरी ओर राजस्थान के निर्गुण कवि दादू और सुन्दरदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से निर्गुण ब्रह्म का गुणगान किया। 

वीर गाथा काल में यहां पृथ्वीराज रासो, खुमाण रासो, वीसल देवरासो और हमीर रासो जैसी वीर रस पर आधारित रचनाओं की प्रमुखता रही। बिहारी की बिहारी सतसई श्रृंगार रस की प्रमुख रचना है, जबकि महाकवि पद्माकर ने यहां 'जगत विनोद' नामक रचना लिखी। शिशुपाल वध महाकवि माघ की और ब्रह्मगुप्त की ब्रह्म स्फुट सिद्धांत ऐसी रचनाएं हैं, जिन्होंने राजस्थान के संस्कृत साहित्य को समृद्ध बनाया है।

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साहित्य की तरह संगीत के क्षेत्र में भी राजस्थान का उल्लेखनीय योगदान रहा है। उदयपुर के राजा कुम्भा की संगीत राज और संगीत मीमांसा नामक रचनाएं, जयपुर के महाराजा प्रताप सिंह की संगीत सार और राग मंजरी नामक पुस्तकें अनूप संगीत विलास तथा अनूप रत्नाकर नामक ग्रंथ संगीत के क्षेत्र में राजस्थान के योगदान के अद्वितीय उदाहरण हैं। स्थापत्य और चित्रकला की दृष्टि से भी राजस्थान का ऐतिहासिक पक्ष काफी धनी है। आबू के दिलवाड़ा के जैन मंदिरों की स्थापत्य कला बहुत उच्चकोटि की है। चित्तौड़, रणथम्भौर और भरतपुर के किलों की तो आज भी कोई सानी नहीं है। हींग, बीकानेर, जैसलमेर, जयपुर और आमेर के राजमहल भी अपनी श्रेष्ठ स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। 

बाड़ोली और रणकपुर के मंदिर अपनी मूर्तिकला हेतु विख्यात हैं। किशनगढ़ और बूंदी शैली की चित्रकला तो अपनी मौलिकता और श्रेष्ठता के लिए जगजाहिर है। गुलाबी शहर जयपुर में बना सिटी पैलेस आज विश्व को किसी आश्चर्य से कम नहीं है। राजस्थान का इतिहास अपनी अनगिनत विशेषताओं के कारण भारत के अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक लोकप्रिय एवं बेजोड़ है। 

-प्रीटी







अफ्रीका जा रहे हैं घूमने तो वहां पर यूनोस्को की विश्व धरोहर स्थलों को जरूर देखें

  •  मिताल जैन
  •  नवंबर 25, 2020   19:17
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अफ्रीका जा रहे हैं घूमने तो वहां पर यूनोस्को की विश्व धरोहर स्थलों को जरूर देखें
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उत्तरी इथियोपिया में लालिबेला शहर का सुदूर पहाड़ी गाँव 11 शानदार मध्ययुगीन चर्चों का घर है और इन्हें एक ही चट्टान से बनाया गया है। इन रहस्यवादी कृतियों ने इस पर्वतीय शहर को उपासकों और आगंतुकों के लिए गौरव और तीर्थ के रूप में बदल दिया है।

पूरे विश्व में, यूनेस्को के सैकड़ों विश्व धरोहर स्थल हैं। ये हमारे समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन्हें आने वाली पीढि़यों के लिए सुरक्षित रखा गया हैं। अकेले अफ्रीका में ही 89 विरासत स्थल हैं जो दुनिया की कुछ सबसे आकर्षक विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। तो चलिए आज हम आपको अफ्रीका की कुछ बेहतरीन यूनोस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स के बारे में बता रहे हैं, जिनके बारे में शायद अब तक भी आपको जानकारी ना हो−

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लालिबेला के रॉक−हेवन चर्च, इथियोपिया

उत्तरी इथियोपिया में लालिबेला शहर का सुदूर पहाड़ी गाँव 11 शानदार मध्ययुगीन चर्चों का घर है और इन्हें एक ही चट्टान से बनाया गया है। इन रहस्यवादी कृतियों ने इस पर्वतीय शहर को उपासकों और आगंतुकों के लिए गौरव और तीर्थ के रूप में बदल दिया है। ये चर्च एक निर्माण परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसका उपयोग 6 वीं शताब्दी से इथियोपिया में किया जाता रहा है। इन विशेष चर्चों का श्रेय राजा लालिबेला को दिया जाता है, जिन्होंने 13 वीं शताब्दी में शासन किया था। यहां जाने का सबसे अच्छा समय टिम्मेट के दौरान है। यह जनवरी में मनाया जाने वाला एक बेहद खास त्यौहार है।

माउंट किलिमंजारो, तंजानिया

माउंट किलिमंजारो, अफ्रीका का सबसे ऊँचा स्थान है, जो आसपास के मैदानों के ऊपर बर्फीली चोटी के साथ खड़ा है। पहाड़ जंगलों से घिरा हुआ है, और महाद्वीप पर पाए जाने वाले कुछ सबसे अद्भुत जानवर हैं। किलिमंजारो के पर्वतारोहियों को आस−पास के सवाना और आकर्षक ग्लेशियरों और प्रभावशाली बर्फ की चट्टानों के विस्मयकारी नजारें देखने का मौका मिलता है।

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प्राचीन थेब्स, मिस्र

यदि आप मिस्र के कुछ वास्तविक इतिहास को देखना चाहते हैं, तो बस लक्सर शहर से दक्षिण की ओर जाएं। यहां पर आपको यूनेस्को साइट प्राचीन थेल्स को देखने का मौका मिलेगा। लक्सर कभी प्राचीन मिस्र की राजधानी थी, लेकिन आज इसे दुनिया के सबसे बड़े ओपन−एयर संग्रहालय के रूप में जाना जाता है। लक्सर और सेटी के राजसी मंदिर परिसरों में शानदार सूर्यास्त का दृश्य होता है। खंडहरों का दौरा करने के बाद, शाम को आप कर्णक मंदिर के साउंड शो में भाग जरूर लें।

महान जिम्बाब्वे, जिम्बाब्वे

एक बार एक प्राचीन व्यापारिक साम्राज्य की राजधानी, ग्रेट जि़म्बाब्वे दक्षिण−पूर्वी पहाडि़यों में पाया जाता है जो अब जि़म्बाब्वे का देश है। भले ही ये खंडहर अफ्रीका में अन्य यूनेस्को साइटों के रूप में आश्चर्यजनक नहीं हैं, लेकिन वे मान्यता के योग्य हैं।

मिताली जैन