सरकारी नौकरी की आस छोड़कर शुरु किया खुद का काम, आज लाखों में है आमदनी

farming
प्रतिरूप फोटो
ANI Image
रितिका कमठान । Mar 13 2023 6:46PM

पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड के करमवा पंचायत के एक छोटे से गांव भरवलिया के रहने वाले आर्यन ने ये साबित किया है कि असफलताओं से हारकर बैठने वालों को नहीं बल्कि हारने के बाद फिर मजबूती के साथ खड़े होकर मेहनत करने वालों को ही सफलता मिलती है।

बिहार के चंपारण में एक युवा ने सफलता की नई इबारत लिखी है। असफलताओं में घिरकर निराश होकर ना बैठना और दोबारा शुरुआत करने के बाद फिर सफलता की ऊचाईयों को छूना, इस उपलब्धि को चंपारण के युवा ने हासिल किया है। साथ ही ये भी साबित किया है कि नई शुरुआत करने के लिए कोशिश जरुर करनी चाहिए, क्योंकि बिना जज्बे और कोशिश के कोई मुकाम हासिल नहीं किया जा सकता है।

ये कहानी है पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड के करमवा पंचायत के एक छोटे से गांव भरवलिया के रहने वाले आर्यन की। आर्यन ने ये साबित किया है कि असफलताओं से हारकर बैठने वालों को नहीं बल्कि हारने के बाद फिर मजबूती के साथ खड़े होकर मेहनत करने वालों को ही सफलता मिलती है।

बता दें कि आर्यन को सरकारी नौकरी हासिल करने में असफलता मिली थी, मगर इस हार के बाद भी वो निराश नहीं हुए। उन्होंने हार मानने और हताश होने की जगह अपने दिमाग को सफलता पाने के लिए एकाग्र किया। इसके बाद उन्होंने नौकरी करने का विचार छोड़कर खुद को आत्मनिर्भर बनाने का फैसला किया ताकि कोई उन्हें झुका ना सके।

आर्यन ने आत्मनिर्भर भारत से प्रेरणा लेते हुए चंपारण में ही उन्होंने खेती की शुरुआत की। धीरे धीरे उन्होने गर्मियों में उगने वाली सब्जियों को सर्दी के मौसम में उगाने में सफलता हासिल की। अपनी मेहनत और लगन के बल पर आर्यन गांठ गोभी, ब्रोकली, शिमला मिर्च जैसी सब्जियों को ऑर्गेनिक तरीके से सर्दियों के मौसम में भी उगा रहे है।

आर्यन चंपारण में आधुनिक खेती करते है। उन्होंने करियर बनाने के लिए पहले सरकारी नौकरी करने का निश्चय किया था मगर उसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और ऑर्गेनिक खेती करने का निश्चय किया जिसके लिए आधुनिक तकनीक की मदद भी ली। आर्यन ने खेती करने के लिए पहले इसके लिए पूरी जानाकरी इकट्ठी की। मौसम और बिन मौसम होने वाली खेती को लेकर उन्होंने हर जानकारी प्राप्त की और इसके बाद अपने जीवन की नई शुरुआत की। उन्होंने सरकार के बागवानी मिशन को अपना आधार बनाया।

उन्होंने पास ही के कृषि वैज्ञानिक केंद्र में कृषि वैज्ञानिको की मदद ली। उसके बाद अपनी जमीन को बिन मौसम होने वाली खेती के लिए तैयार भी किया। उन्होंने खेती करने के लिए 25 लाख रुपये खर्च किए, जिसके लिए सरकार की ओर से उन्हें लगभग 19 लाख रूपये की राशि भी मिली। उन्हें शिमला मिर्च उगाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज भी उपलब्ध कराए गए। अब वो कई सब्जियों को  उगा रहे है। 

We're now on WhatsApp. Click to join.
All the updates here:

अन्य न्यूज़