हैप्पीनेस मंत्र: धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

हैप्पीनेस मंत्र: धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

कबीर दास ने कहा था धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय। इसका मतलब है कि मन में धीरज रखने से सब कुछ होता है। अगर कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे, तब भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेगा!

नमस्कार प्रभासाक्षी की स्पेशल सीरीज 'हैप्पीनेस मंत्र' में आज बात करेंगे भारतीय रहस्यवादी कवि और संत कबीर दास के उस दोहे कि जिसने जिंदगी में धैर्य के महत्व को समझाया। कबीर दास ने कहा था "धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।" इसका मतलब है कि मन में धीरज रखने से सब कुछ होता है। अगर कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे, तब भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेगा! इस दोहे से उन्होंने ये कहने का प्रयास किया है कि हर चीज का एक सही समय होता है। उस चीज को उसी सही समय पर करना चाहिए। अगर कोई कोशिश आप सही समय पर नहीं कर रहे तो वह कोशिश नाकाम रहेगी। 

"धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।" का मतलब

संत कबीर के इस दोहे को समझना आज की जनरेशन के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि आज लोगों में धैर्य न के बराबर होता जा रहा है। कबीर के दोहे  धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय। में माली और फल को लेकर कबीर ने जिंदगी मे समय के महत्व को समझाने का प्रयास किया है। आसान शब्दों में आप इसे कुछ इस तरह से समझ सकते हैं कि जैसे कि जब किसी छोटे बच्चे का जन्म हो और उसकी मां चाहने लगे कि वह एक महीने में चलने लग जाए तो क्या यह संभव है, बिलकुल संभव नहीं है, जन्म के एक महीने में वास्तव में कोई बच्चा नहीं चल सकता क्योंकि शिशु कै शरीर खड़ा होने में एक महीने के अंदर सक्षम नहीं हो सकता। शिशु को चलने में एक साल का वक्त लगेगा। आप कुछ भी कर ले वह साल भर का होने से पहले चल नहीं सकेगा। मां को धैर्य रखना होगा। 

समय और धैर्य की प्रबलता को समझने के लिए और अपने निजी जीवन से जुड़ी चीजों पर भी ध्यान दिजिए। यदि आपकी किसी से दोस्ती होती है तो क्या ये दोस्ती एक दिन में गहरी हो जाएगी। अपको अपनी दोस्ती को गहरा बनाने में वक्त लगेगा। धीरे-धीरे आपकी दोस्ती में विश्वास बढ़ेगा और एक समय आएगा जब आप अपनी दोस्ती में बहुत कुछ करने के लिए तैयार हो जाएगें। आप मुश्किल घड़ी में अपने दोस्त को बेझिझक आर्थिक मदद करने के लिए भी तैयार हो जाएगें क्योंकि आपका रिश्ता मजबूद हो चुका है। वहीं अगर आपकी दोस्ती को ज्यादा समय नहीं हुई है और यदि आपसे कोई आर्थिक मदद मांगे तो आपके मन में एक बार संदेह जरूर आएगा क्योंकि आपकी दोस्ती में अभी मजबूती नहीं है। एक अच्छा दोस्त समय और धैर्य के साथ ही बनेगा। 

कहानी के माध्यम से समझे

एक बात तो आप सभी ने सुनी होगी बड़े-बूढ़ों को कहते हुए कि जल्दी का काम शैतान का होता है। आराम से को खराब नहीं होगा। यह बात पूरी तरह से सही है। एक कहानी बताती हूं मैं आपकों एक आम का बगीचा होता है। इस बगीचे में बहुत सारे बंदर रहते हैं। जब बंदरो को भूख लगती और वह बगीचे का आम तोड़ते तो बगीचे के रखवालों बंदरों को पत्थर से मारते थे। बेचारे बंदरों के हाथ आम तो एक-आदा ही आता पत्थर ज्यादा पड़ जाते थे। एक दिन बंदरों की मीटिंग होती है और सरदार निर्णय लेता है कि रोज-रोज की मार खाने से तो अच्छा है कि हम अपना एक अलग बगीचा बना ले और उसके फल खा सकें बिना मार खाए। सभी को बंदरों के सरदार का ये सुझाव अच्छा लगा। सभी ने यत किया कि वह अब अपना बगीचा बना कर रहेंगे। बंदरों ने मिल कर आम की गुठलियों को इकट्ठा किया और जमीन को खोद कर बो दिया।

 

बंदरों ने बहुत सारी गुठलियों की बुआई कर दी थी। सभी बड़े खुश थे कि अब हमारा बगीचा होगा लेकिन यह क्या कुछ ही घंटे गुजरे थे कि बंदरों ने जमीन खोदकर गुठलियाँ बाहर निकाल लीं ताकि यह देख सकें कि गुठलियों से पेड़ निकला है या नहीं! देखते ही देखते सारा बाग उजड़ गया। दूर से यह सब देख रहे बाग के मालिक ने अपने सहचरों से कहा- “कर्मों का इच्छानुसार यदि फल प्राप्त करना हो तो प्रयत्न के अतिरिक्त धैर्य की भी बहुत ही आवश्यकता होती है।

कौन थे कबीर दास

कबीर के नाम का अर्थ महानता से है। वे भारत के महानतम कवियों में से एक थे। कबीर दास 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे।  वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। इनकी रचनाओं ने हिन्दी प्रदेश के भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। उनका लेखन सिखों के आदि ग्रंथ में भी देखने को मिलता है। वे हिन्दू धर्म व इस्लाम को न मानते हुए धर्म निरपेक्ष थे। उन्होंने सामाज में फैली कुरीतियों, कर्मकांड, अंधविश्वास की निंदा की और सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना की थी। उनके जीवनकाल के दौरान हिन्दू और मुसलमान दोनों ने उन्हें अपने विचार के लिए धमकी दी थी। इसके बाद भी उन्होंने अपना मार्ग नहीं बदला।

जिंदगी को क्या सिखाया

कबीर ने अपने दोहे से जिंदगी को सिखाया कि हमे सही बुद्धि का इस्तेमाल करके अपने कर्म करते रहने चाहिए सही समय आने पर उसका फल हमें मिलने लगेगा। फल मिलने में समय लगता है उसके लिए आपको धैर्य रखना आना चाहिए। धैर्य आपको एक प्रबल व्यक्ति बनाता है। आज के हैप्पीनेस मंत्र नें इतना ही अगले लेख में हम कुछ और ऐसे मंत्र लेकर आएंगे जो आपको जिंदगी में कुछ और अच्छी सीख दे सके।