• Lockdown का एक महीना पूरा, कोरोना फैलने की गति को स्थिर रखने में भारत सफल

दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने बेहद कम दाम में कोविड-19 बीमारी की जांच के लिए एक तरीका विकसित किया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इसे अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस महामारी के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान समाज के सबसे कमजोर वर्गों की मदद के लिए उनकी सरकार द्वारा उठाए गये कदमों को रेखांकित करने के लिए वित्त मंत्रालय का एक ट्वीट साझा किया। मोदी ने ट्वीट साझा करते हुए लिखा, ‘‘सबसे कमजोर लोगों की मदद के लिए उठाए गये कुछ कदम।’’ मंत्रालय ने कहा कि 33 करोड़ से अधिक गरीब लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (पीएमजीकेपी) के तहत 22 अप्रैल तक 31,235 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मिली। इसमें कहा गया, ‘‘सरकार द्वारा स्थापित मजबूत डिजिटल भुगतान ढांचे ने पीएमजीकेपी के तहत त्वरित नकदी हस्तांतरण सुनिश्चित किया है।’’ सरकार ने 26 मार्च को पीएमजीकेपी की घोषणा की थी।

लॉकडाउन के 30 दिनों में कोरोना संक्रमण की दर रही स्थिर

कोरोना संकट से निपटने के लिये लागू किये गये देशव्यापी बंद (लॉकडाउन) के दौरान संक्रमण फैलने की गति को स्थिर रखने में मिली कामयाबी को सरकार ने अहम उपलब्धि करार दिया। देश में लागू बंद को बृहस्पतिवार को 30 दिन पूरे हो गए। कोरोना संकट से निपटने के लिये सरकार द्वारा गठित वरिष्ठ अधिकारियों के समूह की अध्यक्षता कर रहे पर्यावरण सचिव सीके मिश्रा ने नियमित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पिछले एक महीने में कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने की गति और संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि की गति में निरंतर गिरावट आ रही है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि महामारी का प्रकोप बढ़ने की गति स्थिर बनी हुयी है। उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस की महामारी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर देश में 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ पर अमल के बाद केंद्र सरकार ने 25 मार्च से 21 दिन का देशव्यापी लॉकडाउन घोषित किया था। बाद में इसकी अवधि को तीन मई तक के लिये बढ़ाया गया है। मिश्रा ने लॉकडाउन की अवधि में इस महामारी को रोकने के लिये किये गये उपायों और इनसे हुये लाभ का ब्योरा देते हुये बताया कि 23 मार्च तक किये गये कुल परीक्षण में 4.5 प्रतिशत संक्रमित मरीज थे और 22 अप्रैल को भी कुल परीक्षण में संक्रमित मरीजों की हिस्सेदारी 4.5 प्रतिशत ही है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि देश में वायरस के संक्रमण की प्रसार दर स्थिर बनी है। उन्होंने बताया कि 23 अप्रैल तक देश में कोरोना वायरस के कुल 14915 परीक्षण किये गये थे, और 22 अप्रैल को यह संख्या पांच लाख को पार कर गयी है। मिश्रा ने कहा कि लॉकडाउन लागू होने के बाद परीक्षण में 33 गुना और संक्रमित मरीजों की संख्या में 16 गुना की वृद्धि हुयी है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि अमेरिका, इटली, ब्रिटेन सहित अन्य विकसित देशों की तुलना में भारत में संक्रमण की वर्तमान स्थिति संतोषजनक है। मिश्रा ने इसे लॉकडाउन के लिहाज से अहम उपलब्धि बताते हुये कहा, ‘‘इन 30 दिनों में हम वायरस को फैलने से रोकने और इसके संक्रमण के खतरे को न्यूनतम करने में कामयाब रहे। मिश्रा ने कहा कि महामारी के बढ़ने के खतरे से निपटने के लिये पिछले एक महीने में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और इलाज की खोज सहित अन्य मोर्चों पर महत्वपूर्ण कार्य किये गये। उन्होंने बताया कि इसके तहत पिछले एक महीने में कोविड-19 के लिए निर्धारित अस्पतालों की संख्या 3.5 गुना बढ़ी, जबकि पृथक बिस्तरों की संख्या में 3.6 गुना वृद्धि हुई है। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि बीते 24 घंटे में कोरोना वायरस के 1409 नये मामले सामने आये। इसके साथ ही संक्रमित मामलों की कुल संख्या 21,393 हो गयी है। अग्रवाल ने कहा कि कोविड-19 से संक्रमित 4257 मरीज अब तक स्वस्थ हो चुके हैं। इसके साथ ही स्वस्थ होने वाले मरीजों का प्रतिशत भी बढ़कर अब 19.89 फीसदी हो गया है। संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कोरोना के खिलाफ देशव्यापी अभियान में अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के रूप में कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों वाला अध्यादेश जारी करने के लिये चिकित्सकों की ओर से सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. गुलेरिया ने संक्रमण के लक्षण उभरने के बाद भी संक्रमण की जांच के लिये मरीजों के देर से अस्पताल पहुंचने पर चिंता व्यक्त करते हुये देशवासियों से संक्रमण से बचने और दूसरों को बचाने के लिये अस्पताल तक पहुंचने में तत्परता दिखाने का आह्वान किया। इस दौरान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि पिछले एक महीने में संक्रमण की पहचान के लिये देश में परीक्षण का दायरा तेजी से बढ़ा है। उन्होंने बताया कि देश में सरकारी और निजी क्षेत्र की कुल 325 प्रयोगशालायें कार्यरत हैं।

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ममता ने राज्यपाल पर लगाए आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को राज्यपाल जगदीप धनखड़ पर आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन के कामकाज में वह लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं और उनसे कहा कि वह फैसला करें कि संवैधानिक धर्म की सीमा रेखा किसने लांघी है। राज्यपाल को सात पन्ने के कड़े शब्दों में लिखे पत्र में बनर्जी ने कहा कि धनखड़ भूल गए हैं कि वह (ममता) ‘‘एक गौरवशाली भारतीय राज्य की निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं’’ जबकि वह नियुक्त किए गए हैं। बनर्जी ने पत्र में कहा, ‘‘यह आपको फैसला करना है कि किसने संवैधानिक धर्म का उल्लंघन किया है और संवैधानिक पदाधिकारियों में किसने मर्यादा के मूल नियमों को लांघा है।’’

कार्यालयों में एक तिहाई से अधिक कर्मियों को नहीं बुलाया जाए

केंद्र सरकार के सभी विभागों को बृहस्पतिवार को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि भीड़भाड़ रोकने के लिए उपसचिव से नीचे स्तर के एक तिहाई से अधिक कर्मचारियों को कार्यालय नहीं बुलाया जाए तथा आपस में दूरी बनाकर चलने के नियम का अनुपालन हो। कार्मिक मंत्रालय ने ऐसा परिपत्र जारी किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब यह देखा गया कि कुछ मंत्रालयों/ विभागों में उपसचिव स्तर से नीचे के एक तिहाई से अधिक कर्मी कार्यालय में बुलाये जा रहे हैं। परिपत्र में कहा गया है, ''इससे कार्यालय में अवांछनीय भीड़ हो जाती है और कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए किये गये एहतियाती उपाय कमजोर पड़ पायेंगे।’’ मंत्रालय ने कहा कि यह दोहराया जा रहा है कि उपसचिव स्तर से नीचे के कर्मियों की उपस्थिति संबंधी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए। केंद्र सरकार के फिलहाल 48.34 लाख कर्मी हैं। मंत्रालय ने गृहमंत्रालय द्वारा 15 अप्रैल को लॉकडाउन के संबंध में जारी किये गये संशोधित दिशानिर्देश का हवाला दिया है जिसमें कहा गया है कि उपसचिव के स्तर से ऊपर के सभी अधिकारी कार्यालय पहुंचेंगे जबकि बाकी कर्मियों का एक तिहाई हिस्से को ही जरूरत के मुताबिक कार्यालय पहुंचना है। कार्मिक मंत्रालय ने कहा, ''इस दिशानिर्देश की भावना यह है कि कार्यालयों में भीड़भाड़ से बचा जाए और आपस में दूरी सुनिश्चित किया जाए।’’ उसने कहा कि विभागों के प्रमुख कार्यालयों/कार्यस्थलों पर भीड़भाड़ रोकने के लिए अपने कर्मियों को अलग अलग कालखंडों पर कार्यालय आने का निर्देश दे सकते हैं। कार्मिक मंत्रालय ने पिछले महीने कर्मचारियों के लिए तीन कालखंडों सुबह नौ बजे से साढे पांच बजे तक, साढ़े नौ बजे से शाम छह बजे तक और दस बजे से शाम साढ़े छह बजे तक का सुझाव दिया था।

भीड़ का हंगामा, बेरिकेड क्षतिग्रस्त किए

महाराष्ट्र में नासिक जिले के मालेगांव शहर में अपने इलाके से बाहर निकलने से रोकने पर कुछ लोगों ने बृहस्पतिवार को कथित रूप से बैरिकेड को क्षतिग्रस्त कर हंगामा किया। पुलिस ने इस क्षेत्र को कोरोना वायरस संक्रमण के कारण निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर रखा है, जिससे वह उन्हें बाहर जाने से रोक रही थी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने उन्हें रोका, फिर 70-80 लोगों की भीड़ वहां आ गई और पुलिस के बेरिकेडों को तोड़ दिया तथा हंगामा किया। उन्होंने वहां रखी कुर्सियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने बताया, ''जब घटना हुई तब वहां दो तीन पुलिस कर्मी ड्यूटी पर थे। सूचना मिलने के बाद, अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया गया।" अधिकारियों ने बताया कि मालेगांव में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अबतक नौ लोगों की मौत हो गई है जबकि संक्रमण के 110 मामले सामने आए हैं।

केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि पर लगाई रोक

कोरोना वायरस महामारी का असर अब सरकारी कर्मचारियों पर भी पड़ने लगा है। केंद्र सरकार ने इस संकट के कारण बढ़े वित्तीय बोझ के चलते 50 लाख सरकारी कर्मचारियों और 61 लाख के करीब पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में जून 2021 तक कोई वृद्धि नहीं करने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पन्न संकट को देखते हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते में एक जनवरी 2020 से मिलने वाली किस्त का भुगतान नहीं करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही एक जुलाई 2020 से और एक जनवरी 2021 में जारी होने वाली महंगाई भत्ते की अगली किस्तों का भुगतान भी नहीं करने का निर्णय लिया गया है।’’ हालांकि, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मौजूदा दर पर महंगाई भत्ते का लाभ मिलता रहेगा। ज्ञापन में कहा गया है कि एक जुलाई 2021 के बाद जब भी सरकार महंगाई भत्ते और मंहगाई राहत की अगली किस्त जारी करने का फैसला करेगी, उस समय एक जनवरी 2020, एक जुलाई 2020 और एक जनवरी 2021 में प्रभावी महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की बढ़ी दर को आगे के लिये इसमें समाहित कर दिया जायेगा और एक जुलाई 2021 से उसी बढ़ी दर पर भत्ता दिया जायेगा। हालांकि, इसमें स्पष्ट किया गया है कि एक जनवरी 2020 से लेकर 30 जून 2021 तक की अवधि के लिये महंगाई भत्ते अथवा महंगाई राहत के बकाये का भुगतान नहीं किया जायेगा। सूत्रों के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि को रोकने के इस कदम से सरकार को चालू वित्त वर्ष 2020-21 और अगले वित्त वर्ष 2021-22 में कुल मिलाकर 37,530 करोड़ रुपये की बचत होगी। आमतौर पर इस मामले में राज्य सरकारें भी केंद्र सरकार का अनुसरण करती हैं। राज्य सरकारों को इस अवधि में महंगाई भत्ते की बढ़ी दर का भुगतान नहीं करने से 82,566 करोड़ रुपये तक की बचत होगी। कुल मिलाकर केंद्र और राज्यों के स्तर पर इससे 1.20 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। इससे सरकारों को राजस्व के संग्रह में आ रही कमी के संकट से जूझने में मदद मिलेगी। इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी 2020 से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता चार प्रतिशत बढ़ाकर 21 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। अब बृहस्पतिवार को लिये गये निर्णय से इस वृद्धि को भी रोक दिया गया है। अब अगले साल 30 जून तक महंगाई भत्ते की प्रभावी दर 17 प्रतिशत ही रहेगी।

आर्थिक कामों को शुरू करने की जल्दी इजाजत दी जाएगी

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग जगत को आश्वस्त किया कि जहां भी संभव होगा, काम धंधे शुरू करने की इजाजत जल्द से जल्द दी जाएगी। उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने एक बयान में इसकी जानकारी दी। गोयल ने उद्योग जगत को कारोबार के जोखिम का आकलन करने, कारोबार बढ़ाने के नवोन्मेषी तरीकों पर विचार करने तथा धैर्य न खोने की सलाह भी दी है। बयान के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने पीएचडीसीसीआई के सदस्यों को बुधवार को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम आश्वस्त करते हैं कि जहां भी संभव होगा, आर्थिक गतिविधियों को जल्दी शुरू किया जाएगा।’’ उन्होंने लोगों से कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये सरकार द्वारा जारी किये गये दिशानिर्देशों का पालन करने का भी अनुरोध किया। गोयल ने कहा, ‘‘ऐसा देखा गया है कि जिन देशों ने अपने नागरिकों के स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिया और लोगों की जान बचाने के कठोर उपाय किये, उन देशों ने इस आपदा का बेहतर सामना किया तथा लॉकडाउन समाप्त होने के बाद ऐसे देशों ने तेजी से वापसी की।’’ उन्होंने कहा, ‘‘‘यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है कि सरकार से आयात को रोकने अथवा आयात पर भारी-भरकम शुल्क लगाने की अपेक्षा रखने के बजाय हम भारत में बने उत्पादों को ही खरीदें और उनका ही उपभोग करें।’’ इस मौके पर पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष डी.के. अग्रवाल ने अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग जगत पर कोरोना वायरस महामारी के कारण हुए असर को कम करने के लिये सरकार से 16 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की मांग की।

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मध्य प्रदेश में 100 नये मामले सामने आये

मध्य प्रदेश में बुधवार को कोरोना वायरस से संक्रमण के 100 नये मामले सामने आए। इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 1,687 तक पहुंच गयी है। प्रदेश सरकार के ताजा स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार प्रदेश में कोविड-19 से बृहस्पतिवार को तीन और मरीजों के मौत की जानकारी मिली है। इनमें से दो मौतें खरगोन में और एक मौत इंदौर में हुई है। इसी के साथ प्रदेश में अब तक कोरोना वायरस की महामारी से 83 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। कोरोना वायरस की महामारी से प्रदेश में हुई 83 मौतों में से सबसे अधिक 53 मौतें अकेले इंदौर में हुई है, जबकि भोपाल एवं उज्जैन में सात-सात, देवास में छह, खरगोन में पांच और छिंदवाड़ा, जबलपुर, आगर मालवा, धार तथा मंदसौर में एक-एक मरीज की मौत हुई है। प्रदेश के कुल 52 में से 25 जिलों में कोविड-19 मामले सामने आए हैं। उज्जैन में बृहस्पतिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे अधिक 35 नये मामले सामने आयें। इसके अलावा इंदौर में 22, भोपाल में 20 एवं खरगोन में 10 नये मामलों की पुष्टि हुई। इसी के साथ कोरोना वायरस की महामारी से बुरी तरह प्रभावित इंदौर में अबतक कोविड-19 की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 945 हो गयी है। वहीं भोपाल में 323, उज्जैन में 76 एवं खरगोन में 51 मामले सामने आए हैं। वहीं, जबलपुर में 30 लोग अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं, जबकि रायसेन में 26, रतलाम में 12, देवास में 21, खंडवा में 35, होशंगाबाद में 26 लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। इनके अलावा, धार जिले में अब तक 36 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गये हैं, जबकि आगर मालवा में 11, बड़वानी में 24, मुरैना में 16, विदिशा में 13, मंदसौर में आठ, शाजापुर में छह, सागर में पांच, श्योपुर, छिंदवाड़ा एवं ग्वालियर में चार-चार, अलीराजपुर में तीन, शिवपुरी एवं टीकमगढ़ में दो-दो और बैतूल में एक कोरोना वायरस संक्रमण का मामला सामने आया है। वहीं, तीन मरीज अन्य राज्य के हैं। प्रदेश में अब तक 203 कोविड-19 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ्य भी हो चुके हैं। कोरोना के घातक संक्रमण को रोकने के लिए प्रदेश में प्रभावित जिलों में कुल 461 निषिद्ध क्षेत्र बनाए गए हैं। यहां लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। प्रदेश में कुल 1,401 कोरोना वायरस मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार किया जा रहा है। इनमें से 1367 की हालत स्थित है जबकि 34 मरीजों की हालत गंभीर हैं।

बिहार में मास्क पहनना अनिवार्य

बिहार सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर अब घर से निकलने वालों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक आदेश में कहा गया है कि कोरोना वायरस की आपदा के समय सरकार की ओर से इसकी रोकथाम एवं उपचार के लिए अथक कार्य किये जा रहे हैं। हालांकि प्रायः रोजाना कोरोना संक्रमण के नये मामले सामने आ रहे हैं। आदेश में कहा गया कि प्राय: यह देखने में आ रहा है कि कई लोग इस संक्रमण काल में भी बिना मास्क लगाए घरों से बाहर निकलते हैं। इस स्थिति में न केवल वे स्वयं संक्रमित हो सकते हैं बल्कि अपने आसपास के लोगों में भी संक्रमण फैला सकते हैं। कुमार ने आदेश में कहा, ‘‘उक्त परिप्रेक्ष्य में महामारी रोग अधिनियम-1897 के तहत तथा 2020 के बिहार महामारी रोग कोविड-19 अधिनियम में प्रदत्त शक्ति के तहत यह आदेश दिया जाता है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए अन्यथा इस आदेश की अवहेलना के आलोक में संबंधित व्यक्ति दंड के भागी होंगे।'' आदेश में कहा गया है कि इसलिए सभी आमजनों, फल बेचने वाले, सब्जी बेचने वाले, सफाई कर्मी, किराना दुकानदार, सुधा डेयरी, दवा के दुकानदार एवं वहां के कर्मी तथा साथ ही उन दुकानों में आवश्यक सामग्रियों के क्रय करने के लिए जाने वाले सभी व्यक्तियों के लिए मास्क लगाना अनिवार्य है। इस क्रम में यह भी विदित हो कि एन-95 मास्क के अतिरिक्त सामान्य दोहरे कपड़े से घर में सिले हुए, जीविका समूहों एवं अन्य समरूप समूहों द्वारा तैयार किए गए मास्क भी संक्रमण को रोकने के लिए काफी कारगर हैं। यहां यह भी स्पष्ट किया जाता है कि एन-95 मास्क कोविड-19 की जांच एवं चिकित्सा में संलग्न चिकित्सा पदाधिकारी एवं कर्मियों के लिए आवश्यक है। शेष पदाधिकारी, कर्मचारी एवं आम नागरिकों के लिए तीन परत वाले मास्क अथवा कपड़े के दो परत वाले मास्क काफी उपयोगी हैं। कपड़े से बने मास्क की सफाई कर उसे पुनः उपयोग में लाया जा सकता है। आदेश में कहा गया है कि सभी जिला पदाधिकारी, सभी वरीय आरक्षी अधीक्षक, आरक्षी अधीक्षक एवं समी सिविल सर्जन अपने जिले में इस आदेश का अनुपालन कराना सुनिश्चित करेंगे। उल्लेखनीय है कि बिहार में पहला कोरोना संक्रमण का मामला 21 मार्च को सामने आया था और अबतक 150 कोविड-19 मरीज प्रदेश में सामने आ चुके हैं तथा दो लोगों की मौत हो चुकी है।

मकान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा

दिल्ली के मुख्य सचिव विजय देव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे उन मकान मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें, जो प्रवासी श्रमिकों और छात्रों से कोरोना वायरस पर काबू के लिए लागू लॉकडाउन में किराए की मांग कर रहे हैं। देव ने 22 अप्रैल को जारी आदेश में कहा कि सभी जिला मजिस्ट्रेट अपने अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाएंगे और "प्रभावित व्यक्तियों" को ऐसे मकान मालिकों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करने की सलाह देंगे। इसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने 29 मार्च को एक आदेश जारी किया था, जिसमें मकान मालिकों से कहा गया था कि वे श्रमिकों और प्रवासियों से एक महीने की अवधि के लिए किराए की मांग नहीं करेंगे। उस आदेश में यह भी कहा गया था कि यदि कोई मकान मालिक मजदूरों और छात्रों को अपना परिसर खाली करने के लिए मजबूर करता है, तो उनके खिलाफ आपदा प्रबंधन कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। मुख्य सचिव ने नए आदेश में कहा कि छात्रों को किराए के भुगतान के लिए मजबूर करना या उन्हें मकान खाली करने की धमकी देने जैसी घटनाएं सरकार के संज्ञान में आयी हैं। उन्होंने आदेश में कहा कि जिला मजिस्ट्रेट श्रमिकों और छात्रों के उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाएंगे और प्रभावित व्यक्तियों को '100' नंबर पर कॉल कर पुलिस नियंत्रण कक्ष में शिकायतें दर्ज करने की सलाह देंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस उपायुक्त इस तरह की शिकायतों के बारे में साप्ताहिक रिपोर्ट भेजेंगे। इससे पहले, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मकान मालिकों से अनुरोध किया है कि वे ऐसे व्यक्ति से किराया नहीं मांगें जो लॉकडाउन के कारण भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं। गृह मंत्रालय ने भी 29 मार्च को एक आदेश जारी किया था जिसमें छात्रों, श्रमिकों और प्रवासी मजदूरों से एक महीने के लिए किराए की मांग करने पर रोक लगायी गयी है।

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शाही इमाम की अपील

जामा मस्जिद और फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमामों ने रमजान के पवित्र महीने के दौरान मुसलमानों से घरों में ही नमाज अदा करने की अपील की है। साथ ही कोरोना वायरस के प्रसार की रोकथाम के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के दिशानिर्देशों का भी सख्ती से पालन करने की अपील की है। रमजान का महीना शनिवार से शुरू होने की उम्मीद है। जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने एक वीडियो संदेश में लोगों से कहा कि अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और रमजान के दौरान घरों में रहकर ही इबादत करें। बुखारी ने कहा, 'दो दिन बाद रमजान मुबारक की शुरुआत हो रही है। नमाज और तरावीह घरों में ही अदा की जानी चाहिए। इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिए कि एक साथ तीन या चार से अधिक लोग तरावीह नहीं पढ़ें क्योंकि महामारी के मद्देनजर अधिक संख्या में एकत्र होना समाज और परिवारों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।' फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने कहा कि जो लोग पृथक-वास में हैं और रोजा रखने की हालत में नहीं हैं तो वह 'कजा' के जरिए बाद में रोजे रख सकते हैं। अहमद ने कहा, 'कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन लागू है और लोग घरों में रहने को मजूबर हैं। लेकिन रमजान के दौरान अधिकारियों को मुस्लिम इलाकों में दुकानों और ठेली वालों को अनुमति देनी चाहिए ताकि रोजेदार इफ्तारी और सहरी के लिए भोजन खरीद सकें।' उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि मुस्लिम बहुल इलाकों में जरूरी इतंजाम किए जाएं ताकि लोग तड़के और शाम के समय जरूरत का सामान खरीद सकें।

केंद्र से आर्थिक पैकेज की मांग उठाने की अपील

पंजाब के लिए आर्थिक राहत पैकेज की मांग करने के कुछ दिन बाद मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बृहस्पतिवार को देशभर के अपने समकक्षों से राज्यों को कोविड-19 संकट से निपटने में सहयोग के लिए उनके द्वारा प्रस्तावित रणनीति को केंद्र सरकार के सामने उठाने की अपील की। इक्कीस अप्रैल को सिंह ने राज्यों के घटते राजस्व के आलोक में केंद्र से पंजाब के लिए तीन माह के लिए वित्तीय पैकेज तथा 15 वें वित्तीय आयोग द्वारा उसकी अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के लिए विस्तार की मांग की थी। देश के अन्य सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में सिंह ने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखने की अपील की है। उन्होंने राज्यों से इस संकट का मुकाबला करने के लिए उनके द्वारा सुझायी गयी रणनीति पर विचार करने की प्रधानमंत्री से अपील करने का आह्वान किया था। सिंह ने कहा कि यह चिंता का विषय है क्योंकि सभी राज्य कोविड-19 के चलते घटते राजस्व और कल्याण एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरतों में वृद्धि के प्रभाव से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार से यह अनुरोध करने की जरूरत है कि वह राज्यों को तीन महीने के लिए विशेष वित्तीय पैकेज दे तथा स्थानीय स्थिति के अनुसार उसके व्यय में राज्यों को लचीलापन प्रदान किया जाए। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे वित्त आयोग द्वारा इस वित्त वर्ष के लिए अपनी सिफारिशों में समीक्षा की मांग करे क्योंकि इस महामारी के चलते जमीनी स्थिति बिल्कुल बदल गयी है। उन्होंने अपने समकक्षों से अपील की कि वे वित्त आयोग की पूर्ण रिपोर्ट को एक साल के लिए टालने की मांग करें ताकि कोविड-19 के बाद की स्थिति में आर्थिक बहाली, राहत एवं पुनर्वास के लिए राज्यों की जरूरतों का पूरी तरह आकलन किया जा सके एवं उसका समुचित समाधान हो सके। सिंह ने सुझाव दिया कि वित्त आयोग की पंचवर्षीय रिपोर्ट कोविड-19 के असर को ध्यान में रखकर 2020 के बजाय एक अप्रैल, 2021 से शुरू होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से अपील की कि इस महामारी को फैलने से रोकने के प्रयासों की अगुवाई कर रहे मोदी के सामने वे इस मामले को उठाएं। आयोग अप्रैल, 2020 से अगले पांच वित्त वर्षों के लिए करों के बंटवारे और अन्य विषयों को लेकर अपनी सिफारिश देने वाला है।

योगी आदित्यनाथ का निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को निर्देश दिये कि प्रदेश के जिन जिलों में 20 या उससे अधिक कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले आए हैं वहां वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारी भेजे जायें और यह अधिकारी वहां जाकर स्थिति का जायजा लें। अपर मुख्य सचिव सूचना और गृह अवनीश अवस्थी ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि 'मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिये कि 20 या उससे अधिक कोरोना पॉजिटिव मामले वाले जनपदों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी भेजे जायें। ये अधिकारी सम्बन्धित जनपद में कम से कम एक सप्ताह डेरा डाल वहां संचालित स्वास्थ्य सहित विभिन्न कार्यो का पर्यवेक्षण करेंगे।' अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने ऐसे प्रत्येक जनपद में पुलिस महानिक्षक (आईजी) स्तर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (जहां पहले से आईजी स्तर के अधिकारी की तैनाती नहीं है) को भी भेजने के निर्देश दिये हैं। यह पुलिस अधिकारी आवंटित जनपद में लॉकडाउन व्यवस्था को और प्रभावी ढंग से लागू कराएंगे तथा अपनी रिपोर्ट भी प्रेषित करेंगे।' उन्होंने बताया कि ये वरिष्ठ अधिकारी एक सप्ताह तक उस जिले में डेरा डालेंगे और वहां रोगियों के इलाज से लेकर जनता को बंटने वाले राशन और सामुदायिक रसोईघर आदि की व्यवस्था पर गहरी नजर रखेंगे। उन्होंने बताया कि 'जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक सहित क्षेत्र में तैनात सभी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मंडी तथा घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नियमित गश्त करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि आवश्यक सामग्री की आपूर्ति प्रणाली से जुड़े वाहन छूट का दुरुपयोग न करने पायें। यह चेतावनी जारी की जाए कि जो भी ट्रक सवारी ढोते पाए जाए उसे तत्काल जब्त कर लिया जाएगा।' अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने सामुदायिक रसोईघर, घर-घर सामान पहुंचाने की सुविधा तथा खाद्यान्न वितरण की नवीनतम स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि एक मई, 2020 से प्रारम्भ होंने वाले खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम में यह सुनिश्चित किया जाए कि पुराने राशन कार्ड धारकों के साथ-साथ नये राशन कार्ड धारकों को भी राशन उपलब्ध हो। प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद द्वारा अवगत कराया गया कि अन्त्योदय कार्ड धारकों को प्रति कार्ड 20 किलो गेंहू तथा 15 किलो चावल तथा अन्य श्रेणी के लाभार्थियों यथा मनरेगा श्रमिक, पंजीकृत निर्माण श्रमिक, ठेला, खोमचा लगाने वाले, रिक्शा, ई-रिक्शा चलाने वालों आदि को प्रति यूनिट तीन किलो गेहूं तथा दो किलो चावल उपलब्ध कराया जाएगा। अवस्थी ने बताया कि समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि आश्रय गृह तथा सामुदायिक रसोईघर को नियमित तौर पर संक्रमण मुक्त किया जाए। आश्रय गृह में रह रहे लोगों का पूल टेस्ट कराया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि सामुदायिक रसोईघर का भोजन गुणवत्तापरक हो तथा भोजन पर्याप्त मात्रा में तैयार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री का पीड़ित सहायता कोष-कोविड केयर फंड’ स्थापित किया गया है। इस कोष की धनराशि का उपयोग कोविड-19 के उपचार व बचाव के लिए किया जाएगा। कोष की धनराशि से जांच, एल-1, एल-2 तथा एल-3 अस्पतालों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण, रणनीतिक तैयारी यथा पीपीई किट, एन-95 मास्क, वेंटिलेटर्स आदि की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कोष की धनराशि से पीपीई क्रय करने, इमरजेंसी सेवाएं प्रारम्भ करने वाले अस्पतालों को जिलाधिकारी के माध्यम से इन्हें उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित जनपदों में पीपीई तथा एन-95 मास्क प्राथमिकता पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये। अपर मुख्य सचिव सूचना और गृह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने टेलीमेडिसिन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से लोगों को उपचार सम्बन्धी परामर्श उपलब्ध कराने वाले चिकित्सकों की टेलीफोन नम्बर युक्त सूची का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे लोगों को घर बैठे चिकित्सीय परामर्श मिल सके। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आपात सेवा प्रदान करने वाले अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के प्रोटोकॉल के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने बताया कि 4,000 से अधिक केंद्रों पर गेहूं खरीद शुरू हो गयी है। अब तक मंडियों व क्रय केंद्रों के माध्यम से लगभग 36 लाख कुंतल से अधिक गेहूं की खरीद हो चुकी है। उवर्रक की 53,000 कीटनाशक की 37,000 तथा बीज की 36,000 दुकाने संचालित हो रही हैं। जायद फसल के तहत 8.12 लाख हेक्टेयर भूमि में बुआई हो गयी है। मेंथा फसल की बुआई लगभग दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में हो चुकी है। मनरेगा के अन्तर्गत भारत सरकार से 1,227 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है। इससे मनरेगा योजना के कार्यों को गति मिलेगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से प्रदेश के दो करोड़ से अधिक किसानों को 4,100 करोड़ रुपये की मदद प्रदान की गयी है। अवस्थी ने बताया कि कोरोना से अप्रभावित जनपदों में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप औद्योगिक इकाइयों का संचालन कराया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि औद्योगिक इकाइयां सामाजिक दूरी का अनुपालन करते हुए कार्य करें। थर्मल स्कैनर से कार्मिकों की नियमित जांच की जाए। कामगारों के रहने व भोजन आदि की व्यवस्था इकाई के परिसर में ही हो।

1.5 प्रतिशत रह सकती है देश की वृद्धि दर

उद्योग संगठन सीआईआई का मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण लागू लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है और सबसे अच्छी स्थिति में भी भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में ज्यादा से ज्यादा 1.5 प्रतिशत रह सकती है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने एक रिपोर्ट ‘अ प्लान फोर इकोनॉमिक रिकवरी’ में यह अनुमान व्यक्त किया है। संगठन ने तीन स्थितियों में वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। उसके अनुसार चालू वित्त वर्ष के दौरान सबसे खराब स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था के आकार में 0.9 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, जबकि सबसे अच्छी स्थिति में आर्थिक वृद्धि दर 1.5 प्रतिशत रह सकती है। रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भी 2020-21 के लिये भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 0.8 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी तथा इसकी रोकथाम के लिये दुनिया भर में लागू लॉकडाउन के कारण अप्रत्याशित वैश्विक आर्थिक मंदी आ रही है। सीआईआई की इस रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन के समाप्त होने के बाद भी माल तथा लोगों की आवाजाही के बाधित रहने के अनुमान हैं। यदि ऐसी स्थिति बनी रही और लॉकडाउन के समाप्त होने के बाद भी आर्थिक गतिविधियां प्रभावित रहीं तो चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 0.6 प्रतिशत रह सकती है। संगठन ने कहा कि इस स्थिति में आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान रह सकते हैं, निवेश से संबंधित गतिविधियों में धीमा सुधार हो सकता है, कुछ समय के लिये कामगारों का अभाव रह सकता है तथा लोगों की आय कम होने से मांग की वृद्धि नरम रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि सबसे अच्छी स्थिति होगी जब लॉकडाउन की अवधि के समाप्त होने बाद आर्थिक गतिविधियों में तेजी से सुधार हो। ऐसी स्थिति में देश की आर्थिक वृद्धि दर 1.5 प्रतिशत रह सकती है। संगठन ने कहा कि यदि परिस्थितियां बिगड़ती हैं और संक्रमण के मौजूदा हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पाबंदियों की अवधि बढ़ायी जाती है तथा नये हॉटस्पॉट भी उभरकर सामने आते हैं तो ऐसे में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) चालू वित्त वर्ष में 0.9 प्रतिशत कम हो सकता है। सीआईआई ने कहा कि ऐसे में तत्काल वित्तीय हस्तक्षेप करने की जरूरत है। संगठन ने 1.7 लाख करोड़ रुपये के घोषित राहत उपायों के अतिरिक्त जन धन खाता धारकों को दो लाख करोड़ रुपये तक की सहायता देने का सुझाव दिया। इसके अलावा संगठन ने बैंकों को परिचालन के लिये अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने, एमएसएमई के लिये रिजर्व बैंक की गारंटी से युक्त कर्ज का प्रावधान करने समेत अन्य सुझाव भी दिये।

इंग्लैंड में सबसे ज्यादा प्रभावित है भारतीय समुदाय

ब्रिटेन में भारतीय समुदाय कोरोना वायरस महामारी से सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वाले समूहों में शामिल है। इंग्लैंड के अस्पतालों में कोविड-19 की वजह से हुई मौतों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह जानकारी सामने आई है राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) इंग्लैंड द्वारा इस सप्ताह जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि 17 अप्रैल तक अस्पतालों में कोरोना वायरस से मरने वाले 13,918 रोगियों में 16.2 प्रतिशत मरीज अश्वेत समुदाय, एशियाई और अल्पसंख्यक जातीय (बीएएमई) पृष्ठभूमि के थे जिनमें भारतीय मूल के लोगों की संख्या 3 प्रतिशत है। इनमें से इन समुदायों से मरने वाले लोगों की संख्या 2,252 थी जिनमें भारतीय समुदाय के लोगों की संख्या 420 है। इसके बाद कैरीबियाई समुदाय दूसरा सबसे बड़े प्रभावित जातीय समूह है। कोविड-19 से मरने वाले लोगों की कुल संख्या में इस समूह की संख्या 2.9 प्रतिशत है। इसके बाद पाकिस्तानी लोगों की संख्या है, जो 2.1 प्रतिशत है। ब्रिटेन सरकार ने बीएएमई आबादी के बीच कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की समीक्षा जारी की है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने पिछले हफ्ते समीक्षा जारी करते हुए कहा, ‘‘बहुत अधिक अनुपात में अल्पसंख्यक पृष्ठभूमि के लोगों की मौत हुई है जिसने वास्तव में मुझे चिंता में डाल दिया है।’’ बीएएमई समूहों के लोगों की मौतों का अनुपात उनकी कुल आबादी के अनुपात की तुलना में बहुत अधिक है। इन समूहों की आबादी कुल आबादी की लगभग 13 प्रतिशत है। मृतकों में श्वेत लोगों की संख्या 73.6 प्रतिशत है। 16.2 प्रतिशत बीएएमई के आंकड़ों में, बांग्लादेशी लोगों की संख्या 0.6 प्रतिशत, अन्य एशियाई पृष्ठभूमि के लोगों की संख्या 1.6 प्रतिशत, अफ्रीकी मूल के लोगों की संख्या 1.9 प्रतिशत, किसी भी अन्य अश्वेत पृष्ठभूमि के लोगों की संख्या 0.9 प्रतिशत, चीनी लोगों की संख्या 0.4 प्रतिशत और बाकि अन्य जातीय समूह की संख्या 2.8 प्रतिशत है। ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन (बीएमए) के परिषद के अध्यक्ष डॉ. चांद नागपाल ने कहा, ‘‘सरकार को इस भयानक अंतर को दूर करने और देश के सभी समुदायों की समान रूप से सुरक्षा करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाने चाहिए।’’ ‘ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडियन ओरिजिन’ ने हाल ही में इंपीरियल कॉलेज लंदन के साथ एक नए शैक्षणिक गठजोड़ की घोषणा की, ताकि ब्रिटेन में चिकित्सा पेशे के भीतर इस असमानता की पड़ताल करने के लिए एक शोध मंच का गठन किया जा सके। इस बीच, कोविड-19 से एनएचएस कर्मियों की मौत के आंकड़े के विश्लेषण में भी मृतकों में बीएएमई समुदाय के लोगों का अनुपात अधिक होने का पता चला है, जिसमें ब्रिटेन के पहले सिख आपातकालीन चिकित्सा सलाहकार डॉ. मंजीत सिंह रियात की मौत भी शामिल है। कोविड-19 से अब तक एनएचएस के 69 की कर्मियों की जान जा चुकी है। सरकार ने बुधवार को कहा कि देश में कोरोना वायरस से 759 और लोगों की मौत हो गई है, जिससे मृतकों की संख्या 18,100 हो गई है।

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सुरक्षा का विश्वास दिलाना बड़ी चुनौती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लक्ष्य जल्द से जल्द देशव्यापी लॉकडाउन खत्म करना है लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को यह समझाने की है कि उनके लिए घरों से बाहर निकलना और रोजमर्रा की जिदंगी फिर से शुरू करना सुरक्षित है। व्हाइट हाउस के सलाहकार और आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व प्रमुख केविन हसेट ने कहा, ''हमें अमेरिका में इस तरह का विश्वास पैदा करने की जरूरत है कि हर कोई अपने काम पर वापस जा सकता है। यह विश्वास होना चाहिए कि लोगों का कार्यस्थल उनके काम करने के लिए सुरक्षित है।’’ पिछले बृहस्पतिवार को व्हाइट हाउस ने गवर्नरों को इस बात के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे कि वे कैसे अपने राज्यों में सुरक्षित तरीके से कामकाज फिर से शुरू कराएं। इसके बाद, मोंताना के गवर्नर ने मई के शुरू से स्कूलों को खोलने की इजाजत दे दी है। वहीं ओकलाहोमा में शुक्रवार से नाई, स्पा आदि की दुकानें खुलेंगी। हसेट ने कहा कि ट्रंप ने अमेरिकों से वादा किया है कि राष्ट्रव्यापी बंद फिर से नहीं होगा। हम फिर उन स्थितियों से नहीं गुजरेंगे जिनसे पिछले दो महीने में गुजरे हैं। राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक लैरी कुडलॉ ने कहा कि व्हाइट हाउस को उम्मीद है कि जब कारोबारी संस्थान फिर से खुलेंगे तो वे जनता को उस सुरक्षात्मक उपायों के बारें बताएंगे जो वे उठाएंगे। जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के मुताबिक, महामारी ने दुनिया भर में 25 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित किया है और करीब 1,80,000 लोगों की मौत हुई है। सिर्फ अमेरिका में ही 46,000 लोगों की मौत हुई है।

अतिरिक्त तीन करोड़ डॉलर के अनुदान की घोषणा

चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ वैश्विक मुहिम में मदद करने के लिए अतिरिक्त तीन करोड़ डॉलर का अनुदान देने की घोषणा की है। कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी की वित्तीय सहायता रोकने के फैसले पर चीन ने ‘गहरी चिंता’ प्रकट की थी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में अतिरिक्त अनुदान दिए जाने की घोषणा की। दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले चीन ने पूर्व में डब्ल्यूएचओ को दो करोड़ डॉलर का अनुदान दिया था। शुआंग ने कहा, ‘‘चीन ने विकासशील देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में मदद के तहत कोरोना वायरस के खिलाफ वैश्विक मुहिम को समर्थन के लिए पूर्व में दिए गए दो करोड़ डॉलर के अतिरिक्त तीन करोड़ डॉलर का अनुदान देने का फैसला किया है।’’ उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त तीन करोड़ डॉलर अनुदान देने का मकसद कोविड-19 के खिलाफ मुहिम को मजबूत करना और विकासशील देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मदद करना है। चीन ने 15 अप्रैल को ही संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी को वित्तीय योगदान देने का संकेत दिया था। नये अनुदान की घोषणा के वक्त शुआंग ने ट्रंप की आलोचना का जिक्र किए बिना डब्ल्यूएचओ और इसके महानिदेशक डॉ. जनरल टेड्रोस अधानम घेब्रेयासस को पूरा समर्थन देने की बात कही। शुआंग ने वायरस को ‘‘सबका साझा दुश्मन’’ बताते हुए कहा कि इसे परास्त करने के लिए एकजुटता ही एकमात्र हथियार है।

-नीरज कुमार दुबे