गुरूद्वारा पौंटा साहिब: सिखों के दसवें गुरू गोबिन्द सिंह जी ने बिताए थे चार वर्ष

By कमल सिंघी | Publish Date: Jun 22 2019 4:39PM
गुरूद्वारा पौंटा साहिब: सिखों के दसवें गुरू गोबिन्द सिंह जी ने बिताए थे चार वर्ष
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पौंटा साहिब गुरूद्वारे पर गुरू गोबिन्द सिंह जी और उनके जीवन से जुड़ी कई स्मृतियां आज भी यहां मौजूद है। गुरूद्वारे में एक म्यूजियम बना हुआ है। जहां गुरू गोबिन्द सिंह जी से जुड़ी हुई कई स्मृतियां समेट कर रखी गई है। यहां गुरू गोबिन्द सिंह जी की कमल मौजूद है।

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित पौंटा साहिब गुरूद्वारा सिख समुदाय का प्रसिद्ध गुरूद्वारा है। यहां सिखों के दसवें गुरू, गुरू गोबिन्द सिंह जी द्वारा दसम ग्रंथ लिखा गया था। उन्हीं की याद में यहां गुरूद्वारा बनाया गया है। यहां हजारों पर्यटक हर वर्ष आते हैं। आज भी यहां गुरू गोबिंद सिंह जी की कलम इत्यादि सामान मौजूद है। जिन्हें दर्शन हेतु म्यूजियम में रखा गया है। सिख समुदाय में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति इस गुरूद्वारे में दर्शन के लिए जाना चाहता है। श्री पौंटा साहिब गुरूद्वारे के इतिहास से जुड़े कुछ रोचक तथ्य भी आज हम आपको बताएगें। यहां जो भी व्यक्ति अपनी मुराद लेकर पहुंचता है गुरु गोबिंद सिंह जी की कृपा से उसकी मुराद जल्द ही पूरी होती है। 


चार साल बिताकर गुरू गोबिंदसिह जी ने की थी दसम ग्रन्थ की रचना- 
सिख धर्म के अनुयायियों के बीच एक बहुत ही धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व रखने वाले श्री पौंटा साहिब गुरूद्वारे पर गुरू गोविंद सिंह जी ने 4 वर्ष बिताए थे। गुरू गोबिन्द सिंह जी ने यहां गुरूद्वारे की स्थापना कर दशम ग्रन्थ की रचना की थी। इसलिए यहां मांगे जाने वाली हर मुराद पूरी होती है। बताया जाता है कि वर्षों पूर्व एक भक्त द्वारा अपनी मन्नत पूरी होने पर उसने शुद्ध सोने से बनी पालकी भेंट की थी। जो आज भी गुरूद्वारे में मौजूद है। 
 
यमुना नदी से किया था शांति से बहने का अनुरोध, आज भी बहती है शांत-
गुरू गोबिंद सिंह जी की स्मृति में विशाल रूप से निर्मित किया गया पौंटा साहिब गुरूद्वारा अपने आप में विशेष महत्व रखता है। यह गुरूद्वारा यमुना नदी के तट पर स्थित है। पौंटा शब्द का अर्थ "पैर" होता है और कहा जाता है कि गोबिन्द सिंह जी अश्व रोहण करके यहां से गुजरे थे और यहां आकर रूके थे। इसलिए इस जगह को पवित्र माना गया। गुरूद्वारे के समीप यमुना नदी बहती है। बताया जाता है कि यमुना नदी पहले बहुत शोर के साथ बहती थी। नदी से गुरू गोबिन्द सिंह जी ने शांति से बहने का अनुरोध किया और नदी के पास बैठकर दशम ग्रंथ की रचना की। जिसके बाद से आज तक यहां यमुना नदी शांति से बहती है।


आज भी मौजूद है यहां गुरू गोबिन्द सिहं जी की कमल-


पौंटा साहिब गुरूद्वारे पर गुरू गोबिन्द सिंह जी और उनके जीवन से जुड़ी कई स्मृतियां आज भी यहां मौजूद है। गुरूद्वारे में एक म्यूजियम बना हुआ है। जहां गुरू गोबिन्द सिंह जी से जुड़ी हुई कई स्मृतियां समेट कर रखी गई है। यहां गुरू गोबिन्द सिंह जी की कमल मौजूद है। बताया जाता है कि यह वही कलम है जिससे गुरू गोबिन्द सिंह जी ने दशम ग्रंथ की रचना की थी। यहां बने म्यूजियम में गुरूजी की कलम और उनके हथियारों को दर्शन हेतु रखा गया है। साथ ही गुरू गोबिन्द सिंह जी इस्तेमाल किया हुआ सामान भी मौजूद है।
 
- कमल सिंघी
 

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