Ahmedabad की Azista ने 300 KM दूर से मूविंग सैटेलाइट की तस्वीरें खींचकर चौंकाया

Space Station
प्रतिरूप फोटो
CANVA PRO
एकता । Feb 8 2026 4:40PM

अहमदाबाद की कंपनी अजिस्टा इंडस्ट्रीज ने अंतरिक्ष में एक सैटेलाइट से दूसरे (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) की तस्वीरें लेकर इतिहास रचा है। यह उपलब्धि भारत की 'स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस' क्षमता को बढ़ाती है, जो अंतरिक्ष में भारतीय सैटेलाइट्स की निगरानी और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

अहमदाबाद की अजिस्टा इंडस्ट्रीज (Azista Industries) ने एक ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी डेवलप की है, जिससे वह ऑर्बिट में दूसरे सैटेलाइट या स्पेस स्टेशन पर नजर रख सकती है। कंपनी द्वारा डेवलप किए गए एक छोटे सैटेलाइट ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की साफ तस्वीरें ली हैं, जब वह पृथ्वी का चक्कर लगा रहा था। यह पहली बार है जब किसी प्राइवेट भारतीय कंपनी ने यह उपलब्धि हासिल की है, और यह भारत की सुरक्षा और अंतरिक्ष में हमारे सैटेलाइट को संभावित खतरों या स्पेस डेब्रिस से बचाने के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

यह कैसे किया गया?

इस काम के लिए, कंपनी ने अपने 80 किलोग्राम के सैटेलाइट, AFR का इस्तेमाल किया। यह प्रयोग 3 फरवरी को किया गया था। जब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन बहुत तेज गति से आगे बढ़ रहा था, तो अजिस्टा के सैटेलाइट ने उसे ट्रैक किया और लगभग 245 से 300 किलोमीटर की दूरी से 15 अलग-अलग तस्वीरें लीं।

अंतरिक्ष में इतनी तेज गति से घूम रही किसी चीज की साफ तस्वीरें लेना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन कंपनी ने इसे 100 प्रतिशत सफलता के साथ पूरा किया।

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यह खबर इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

तकनीकी भाषा में, इसे 'स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस' कहा जाता है। आसान शब्दों में, इसका मतलब है कि अंतरिक्ष में क्या हो रहा है, इस पर नजर रखना। इसके कई बड़े फायदे हैं, जैसे  यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि दूसरे देशों के सैटेलाइट हमारे सैटेलाइट के पास क्या कर रहे हैं। यह टेक्नोलॉजी भविष्य में दुश्मन की मिसाइलों को ट्रैक करने और उन्हें रोकने में मदद कर सकती है।

भारत के पास अंतरिक्ष में रुपये 50,000 करोड़ से ज्यादा के सैटेलाइट हैं (जैसे टीवी, इंटरनेट और जीपीएस के लिए)। यह जानना कि उनके पास क्या घूम रहा है, उनकी सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।

कंपनी क्या कहती है?

कंपनी के एमडी, श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि यह पूरी टेक्नोलॉजी भारत में विकसित की गई है। यह साबित करता है कि भारतीय कंपनियां अब न केवल सैटेलाइट बनाने में, बल्कि अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने में भी दुनिया की बड़ी कंपनियों के साथ मुकाबला कर सकती हैं।

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