पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश्ड बुक और संसद में हंगामा! जनरल नरवणे की किताब में चीन पर ऐसा क्या लिखा है?

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद (एमएम) नरवणे की लिखी किताब का नाम है डेस्टिनी ऑफ़ फोर स्टार मतलब कि जो चार सितारे मतलब डेस्टिनी फोर स्टार मतलब जो जनरल होते हैं उनकी नियति या उनकी डेस्टिनी क्या होती है? लेकिन किन बिंदुओं पे आपत्ति है और किताब क्या रिलीज़ हुई है? नहीं रिलीज़ हुई है? किताब का क्या स्टेटस है? किताब को लेकर क्या विवाद है?
संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव जो परंपरा और मर्यादा का क्षण होता है उसे भी आज राहुल गांधी ने टकराव और सनसनी का मंच बना डाला। दरअसल आज राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवने की अनपब्लिश्ड किताब का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम में चार चीनी टैंक भारत की सीमा में पहुंच गए थे। राहुल के ऐसा कहते ही पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फिर गृह मंत्री शाह ने उन्हें टोका। इसके बाद स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें रोका भी। पर राहुल कहां रुकने वाले? राहुल बोलते रहे। स्पीकर डांटते रहे। बार-बार सदन की कारवाही को स्थगित करनी पड़ी। राहुल ने आरोप लगाया कि वह नेशनल सिक्योरिटी जैसे गंभीर मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सरकार चर्चा से भाग रही है। तो सत्ता पक्ष ने कहा कि देश की सुरक्षा पर आधी अधूरी बात बिना प्रमाण के दावा और अपुष्ट किताबों का जिक्र यह बहस नहीं भ्रम फैलाने की कोशिश है। रक्षा मंत्री और गृह मंत्री दोनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। ऐसा कितनी ही दफा होता है कि जब नेता प्रतिपक्ष बोलने खड़े हो और सामने से गृह मंत्री जवाब दे रहे हो और जवाब तल्ख लहजे में आ रहा हो। ऐसा कितनी ही दफा होता है कि जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हों और उधर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खड़े हो जाएं जवाब देने में और जवाब तल्ख लहजे में आता है और दोनों तरफ से तल्खी बराबर की थी। दोनों तरफ से एकदम बहस हुई और उस बहस में एक किताब केंद्र में थी। उस किताब को लेकर राहुल गांधी ने संसद के पटल पर बात की और उसके बाद जो रूप दिखा सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का वो अपने आप में एक देखने लायक चीज थी कि किस तरीके से संसद में जो देश के टॉप लीडर्स कहे जाते हैं उनकी आपस में नोकझोंक होती है तू तू मैंम होती है और वो किताब जिस किताब का राहुल गांधी ने जिक्र किया वो किताब आई कहां से, किताब में ऐसा क्या लिखा है कि उस किताब का जिक्र करते ही अमित शाह भड़क गए। उस किताब का जिक्र करते ही राजनाथ सिंह भड़क गए। पूरी बीजेपी पूरी बीजेपी का सत्ता पक्ष का खेमा भड़क गया। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद (एमएम) नरवणे की लिखी किताब का नाम है डेस्टिनी ऑफ़ फोर स्टार मतलब कि जो चार सितारे मतलब डेस्टिनी फोर स्टार मतलब जो जनरल होते हैं उनकी नियति या उनकी डेस्टिनी क्या होती है? लेकिन किन बिंदुओं पे आपत्ति है और किताब क्या रिलीज़ हुई है? नहीं रिलीज़ हुई है? किताब का क्या स्टेटस है? किताब को लेकर क्या विवाद है? ऐसा लिखा क्या गया है? आज का एमआरआई स्कैन इसी पर करेंगे।
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कैसे शुरू हुआ विवाद
जब भी कोई किताब पब्लिश होने वाली होती है तो उस उस किताब के कुछ जो है हिस्से वो जर्नलिस्ट के पास में भेजे जाते हैं। पत्रकारों के पास में भेजे जाते हैं कि उसको पढ़ के पहले उसके ऊपर कुछ अर्ली कमेंट करें तो रीडर्स की उसमें दिलचस्पी बने और वो उस किताब को खरीदें। जनरल नरवणे 31 दिसंबर 2019 से लेकर 30 अप्रैल अप्रैल 2021 तक ये इस अपने पद पे रहे थे। 2 साल का इनका कार्यकाल था और उसके बाद में जब वो रिटायर हो के आए हैं तो उन्होंने पहली अपनी किताब लिखी उसका नाम था फोर स्टार ऑफ़ डेस्टिनी। मतलब फोर स्टार क्योंकि जो सेना चीफ होता है वह फोर स्टार जनरल होता है। फोर स्टार जनरल उसको कहा जाता है। फील्ड मार्शल फाइव स्टार जनरल होता है। जिस समय किताब के कुछ हिस्से हमारे पास में आए थे। उस समय विवाद जो था वो दरअसल अग्निवीर स्कीम पर था। इस किताब को लॉन्च अप्रैल 2024 में होना था। 2024 के लोकसभा इलेक्शन से पहले अग्निवीर स्कीम को विपक्ष ने बहुत अलग-अलग तरीकों से उठाया था और कहा था कि नौजवानों को एक तरीके से सेना में जो रोजगार था उससे उसे महरूम रखने की उससे हटा देने की जो है ये साजिश है। इसके ऊपर खासा विवाद हुआ था। इसमें जनरल नारायण ने अपने किताब में कोट अनकोट ये लिखा था कि सेना के लिए घटनाक्रम जो है अग्निवीर स्कीम का लांच करना 2022 में वो चौंकाने वाला था। लेकिन नौसेना और वायु सेना के लिए तो ऐसा था जैसे बिल्कुल आसमान से बिजली गिरी है। ये उन्होंने लिखा था और इसको बार-बार यह विवाद हुआ था।
चीनी टैंक कैलाश रेंज पर आ गए थे?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक किताब जनवरी 2025 तक छपकर पब्लिक डोमेन में आने वाली थी। लेकिन फिर इसे रिव्यू के लिए भेज दिया गया। क्योंकि वह सेना प्रमुख थे तो आर्मी और रक्षा मंत्रालय के पास किताब रिव्यू के लिए भेजी गई। इस बात को 2 साल हो गए। इसी बीच पिछले दिनों caravan मैगजीन में इस अप्रकाशित किताब में लिखी बातों का जिक्र करते हुए एक डिटेल लेख छापा गया। उसमें लिखा कि भारतीय सेना की नॉर्थ कमान के तत्कालीन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को 31 अगस्त 2020 की रात 8:15 बजे एक फोन कॉल आया। चार चीनी टैंक, पैदल सैनिकों के साथ पूर्वी लद्दाख के रेचिन ला की ओर ऊपर बढ़ रहे थे। चीनी टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय सेना की पोस्ट से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे। इसके बाद जनरल नरवणे ने देश के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को फोन करना शुरू किया। वे यही पूछ रहे थे कि मेरे लिए क्या ऑर्डर है। इसमें लिखा है कि उनके वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई साफ निर्देश नहीं मिला। चीनी टैंक रुके नहीं थे। वे चोटी से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर रह गए थे। किताब में नरवणे ने लिखा है कि मेरी स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी। रात 10:30 बजे रक्षा मंत्री का फोन आया। टॉप लीडरशिप से निर्देश सिर्फ एक पंक्ति का था 'जो उचित समझो, वो करो।'
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'गलवान झड़प अचानक या अप्रत्याशित?
किताब के हवाले से कहा गया है कि अगस्त 2020 में गलवान की झड़प कोई अचानक या अप्रत्याशित घटना नही थी, बल्कि यह चीन की ओर से कई हफ्तों तक बढ़ती आक्रामकता का नतीजा थी। स्थानीय कमाडर पर्याप्त रूप से तैयार नहीं थे और उन्होंने स्थिति को कमतर दिखाने की कोशिश की। ये भी लिखा है कि हमारे कई जवान जो या तो रास्ता भटक गए थे या फिर PLA की ओर से कुछ समय के लिए बिना खाना और इलाज दिए रोके गए थे, वापस अपने बेस पर लौट आए।
किताब को क्लियरेंस क्यों नहीं मिला?
पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की ऑटोबायोग्राफी 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' क्या रिलीज होगी या नहीं? जब से 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' की रिलीज रूकी तबसे ही यह सवाल बार बार पूछा जा रहा है कि क्यों यह रूकी और कब पब्लिश होगी। पिछले साल अक्टूबर में खुशवत सिह लिट फेस्ट में जब एक गेस्ट की तरफ से जनरल नरवणे से ये पूछा गया कि आपकी किताब अभी तक क्लियर क्यों नहीं हुई और पब्लिश क्यों नहीं हुई जो जनरल नरवणे ने हसते हुए जवाब दिया कि मैं भी ये जानना चाहता हु। ये पब्लिशर का काम है कि वे रक्षा मंत्रालय से परमिशन लें। ये अभी अडर रिव्यू है। लेकिन क्या रक्षा मंत्रालय इसका रिव्यू कर रहा है और इसकी क्या प्रक्रिया होती है? इसका मंत्रालय की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। न ही भारतीय सेना ने इसका जवाब दिया कि क्या उन्हें इस किताब से कोई आपत्ति है।
ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट वजह
एक अधिकारी ने बताया कि हर सरकारी कर्मचारी जिसमें सशस्त्र सेनाओं के लोग भी शामिल होते हैं, वे ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट से बंधे होते हैं। सर्विस में रहते हुए और रिटायर होने के बाद भी उन्हें इसका पालन करना होता है। अगर वे ऐसी कोई बातें लिखते हैं या ऐसा कुछ बनाते हैं जो उनकी सर्विस से जुड़ा हुआ है तो इसके लिए उन्हें सभी जरूरी इजाजत लेनी होती है। ये किताब या लेख या जो भी वे प्रड्यूज कर रहे है उसके कंटेंट पर निर्भर करता है।
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