फ्यूल भरवाने से पहले जान लें ये सीक्रेट, हर महीने बच सकते हैं हजारों रुपये

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अधिकांश पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल बड़े भूमिगत टैंकों में रखा जाता है। ये टैंक जमीन की सतह से कई फीट नीचे होते हैं, जहां बाहरी तापमान का प्रभाव बहुत कम पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार चाहे बाहर तेज गर्मी हो या ठंड, भूमिगत टैंकों में संग्रहित ईंधन का तापमान लगभग स्थिर बना रहता है।

भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच हर वाहन चालक चाहता है कि उसकी गाड़ी कम खर्च में ज्यादा चले। इसी वजह से कई वर्षों से एक सलाह लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रही है कि वाहन में पेट्रोल या डीजल हमेशा सुबह जल्दी या देर रात को भरवाना चाहिए। माना जाता है कि उस समय तापमान कम होने के कारण अधिक मात्रा में फ्यूल मिलता है। लेकिन क्या यह दावा वास्तव में सही है या फिर यह केवल एक भ्रम है? आइए जानते हैं इसके पीछे की सच्चाई।

सुबह और रात में फ्यूल भरवाने की धारणा कहां से आई?

लोगों का मानना है कि कम तापमान में पेट्रोल और डीजल अधिक घने (Dense) हो जाते हैं। ऐसे में समान कीमत पर ज्यादा मात्रा में ईंधन मिल सकता है। यही कारण है कि कई वाहन चालक सुबह सूर्योदय से पहले या देर रात पेट्रोल पंप पहुंचना बेहतर समझते हैं।

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हालांकि यह तर्क सुनने में वैज्ञानिक लगता है, लेकिन आधुनिक फ्यूल स्टोरेज सिस्टम के कारण इसका वास्तविक प्रभाव लगभग नगण्य हो जाता है।

जमीन के नीचे स्टोर होता है फ्यूल

अधिकांश पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल बड़े भूमिगत टैंकों में रखा जाता है। ये टैंक जमीन की सतह से कई फीट नीचे होते हैं, जहां बाहरी तापमान का प्रभाव बहुत कम पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार चाहे बाहर तेज गर्मी हो या ठंड, भूमिगत टैंकों में संग्रहित ईंधन का तापमान लगभग स्थिर बना रहता है। इसका मतलब है कि सुबह, दोपहर या रात में पेट्रोल भरवाने पर आपको मिलने वाली मात्रा में कोई बड़ा अंतर नहीं आता।

समय नहीं, फ्यूल की कीमत पर रखें नजर

अगर आपका लक्ष्य वास्तव में पैसे बचाना है तो पेट्रोल भरवाने का समय देखने के बजाय फ्यूल की कीमतों पर ध्यान देना अधिक फायदेमंद हो सकता है।

कई शहरों में पेट्रोल और डीजल की दरें नियमित रूप से अपडेट होती हैं। यदि आपको पता है कि अगले दिन कीमत बढ़ने वाली है, तो पहले ही टैंक फुल करवाकर कुछ बचत की जा सकती है। यह तरीका किसी भी कथित "सुबह वाले फॉर्मूले" से ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है।

लंबी यात्रा से पहले करें स्मार्ट प्लानिंग

अगर आप हाईवे ट्रिप पर निकल रहे हैं तो शहर के भीतर ही वाहन में पर्याप्त फ्यूल भरवा लेना बेहतर होता है। कई बार हाईवे स्थित पेट्रोल पंपों पर कीमतें या अतिरिक्त खर्च आपकी जेब पर ज्यादा बोझ डाल सकते हैं। पहले से योजना बनाकर आप अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं।

रिजर्व में गाड़ी चलाना पड़ सकता है महंगा

बहुत से लोग टैंक लगभग खाली होने तक वाहन चलाते रहते हैं। यह आदत न केवल वाहन के फ्यूल सिस्टम को प्रभावित कर सकती है बल्कि इंजन की कार्यक्षमता पर भी असर डाल सकती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब फ्यूल लेवल एक-चौथाई के आसपास पहुंच जाए, तभी दोबारा रिफ्यूलिंग करवा लेनी चाहिए। इससे वाहन के विभिन्न पार्ट्स बेहतर स्थिति में बने रहते हैं।

ड्राइविंग स्टाइल तय करता है आपका फ्यूल खर्च

यदि आप वास्तव में माइलेज बढ़ाना चाहते हैं तो अपनी ड्राइविंग आदतों पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। बार-बार तेज एक्सीलेरेशन, अचानक ब्रेक लगाना और अनावश्यक तेज गति से वाहन चलाना ईंधन की खपत बढ़ा देता है।

इसके विपरीत, संतुलित स्पीड, स्मूद ड्राइविंग और ट्रैफिक को ध्यान में रखकर वाहन चलाने से फ्यूल की बचत काफी बढ़ सकती है।

टायर और सर्विसिंग का रखें खास ध्यान

कम हवा वाले टायर इंजन पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिससे ज्यादा फ्यूल खर्च होता है। इसलिए समय-समय पर टायर प्रेशर की जांच कराते रहना चाहिए।

इसके अलावा वाहन की नियमित सर्विसिंग, साफ एयर फिल्टर और अच्छी स्थिति में इंजन भी बेहतर माइलेज देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डिजिटल ऐप्स भी बन सकते हैं मददगार

आज कई मोबाइल एप्स उपलब्ध हैं जो आसपास के पेट्रोल पंप, फ्यूल रेट और दूरी की जानकारी देते हैं। इनकी मदद से आप कम कीमत वाले पेट्रोल पंप का पता लगाकर बेहतर निर्णय ले सकते हैं।

पेट्रोल या डीजल भरवाने के लिए सुबह या रात का इंतजार करना आज के समय में कोई बड़ी बचत नहीं दिलाता। वास्तविक बचत आपकी समझदारी भरी ड्राइविंग, सही मेंटेनेंस, टायर प्रेशर और फ्यूल प्राइस ट्रैकिंग से होती है। इसलिए अगली बार पेट्रोल पंप जाने से पहले समय की बजाय इन बातों पर ध्यान दें, क्योंकि असली स्मार्ट सेविंग का राज यहीं छिपा है।

- डॉ. अनिमेष शर्मा

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