Sholay के Gabbar Singh का Iconic Dialogue एक धोबी से था Inspired, पत्नी ने खोला सालों पुराना राज

Amjad Khan
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शोले के गब्बर सिंह का आइकॉनिक डायलॉग 'अरे ओ सांभा' एक धोबी से प्रेरित था, जिसने अभिनेता अमजद खान को रातोंरात स्टार बना दिया। अपने पिता जयंत की सलाह पर अमजद खान ने आम लोगों से प्रेरणा ली और एक धोबी को अपनी पत्नी को पुकारते सुन यह यादगार डायलॉग बनाया, जिसके ऑडियो रिकॉर्ड्स की भी खूब बिक्री हुई।

70 के दशक में सुपरहिट फिल्म रिलीज हुई, इस फिल्म के दर्शक आज भी बड़े फैन है। यहां तक की इस फिल्म का हर एक डायलॉग लोगों के जुबान पर रटे हुए हैं। गौरतलब है कि शोले फिल्म के हर एक किरदार ने मूवी में जान डाल दी है। शोले फिल्म में गब्बर का किरदार निभाने वाले अमजद खान से एक बार उनके पिता जयंत ने कहा था-  'तुम खास (लोगों) के नकल करोगे तो पहचाने जाओगे, अगर नकल ही करनी है तो आम (लोगों) के करो'। 

पिता की कही इस बात को लेकर अमजद खान ने अपने दिमाग में ऐसे बसा लिया कि उन्होंने आसपास के लोगों को ऑब्जर्व करना सीख लिया। एक बार वह एक धोबी से प्रेरित हुए और उनका एक डायलॉग अपने स्टाइल में बोला जो अब आइकॉनिक बन चुका है।

रातोंरात स्टार बन गए थे अमजद खान

उस जमाने में जब शोले फिल्म पर्दा पर रिलीज हुई तो सुपरहिट साबित हुई। इस बात में कोई शक नहीं है कि रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनीं  शोले (Sholay), अमजद खान के करियर की सबसे बड़ी फिल्म थी। इस फिल्म ने उन्हे रातोंरात स्टार बना दिया। सिनेमा में उन्हें वो गब्बर बनाया जो आज भी अमर है।

शोले में गब्बर के डायलॉग्स

कितने आदमी थे?"

"जो डर गया, समझो मर गया।"

"बहुत याराना लगता है।"

"ये हाथ हमको दे दे ठाकुर।"

"तेरा क्या होगा कालिया?"

अरे ओ सांभा।"

"जब तक तेरे पैर चलेंगे, उसकी सांस चलेगी। तेरे पैर रुक, तो बंदूक चलेगी।"

पिता की सलाह ने जिंदगी बदल दी

इस मूवी के आइकॉनिक डायलॉग्स रहे, जो शोले के 50 साल पूरे होने के बाद भी लोग आजतक भूल नहीं पाए। इसी फिल्म में एक डायलॉग था, जो कि सच में उनके एक धोबी से इंस्पायर्ड था। यह बात खुद अमजद की पत्नी ने बताया था।

धोबी से इंस्पायर्ड था ये डायलॉग

आपको बता दें कि, रोशमिला भट्टाचार्य की Bollywood's Iconic Villains Bad Men के मुताबिक, अमजद की पत्नी शहला ने यह किस्सा शेयर किया था। उन्होंने बताया था कि एक बार उनके ससुर जयंत ने अपने बेटे अमजद खान को सलाह दी थी,  'तुम खास (लोगों) के नकल करोगे तो पहचाने जाओगे,अगर नकल ही करनी है तो आम  (लोगों) के करों'। यह शब्द उनके दिल में ऐसे उतर गए और फिर अमजद ने अपने आसपास के लोगों से प्रेरणा ली। 

शहला ने आगे बताया- "हमारे पास एक धोबी था जो अपनी पत्नी को पुकारता.  "'अरे ओ शांति' और इसी से 'अरे ओ सांभा' डायलॉग निकला।" उस दौरान शोले के गानों के साथ ही गब्बर सिंह के आइकॉनिक डायलॉग्स के ऑडियो रिकॉर्ड की खूब ब्रिकी हुई थी। आज भी शोले फिल्म में गब्बर सिंह डायलॉग सबको याद है। 

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