चीन, जापान समेत 15 देशों ने दुनिया के सबसे बड़े व्यापार करार पर किए हस्ताक्षर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 16, 2020   11:25
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चीन, जापान समेत 15 देशों ने दुनिया के सबसे बड़े व्यापार करार पर किए हस्ताक्षर

आरसीईपी पर 10 देशों के दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान)के वार्षिक शिखर सम्मेलन के समापन के बाद रविवार को वर्चुअल तरीके से हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता करीब आठ साल तक चली वार्ताओं के बाद पूरा हुआ है।

सिंगापुर। चीन सहित एशिया-प्रशांत के 15 देशों ने रविवार को दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इन देशों के बीच क्षेत्रीय वृहद आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) करार हुआ है। इस समझौते में भारत शामिल नहीं है। इन देशों ने उम्मीद जताई कि इस समझौते से कोविड-19 महामारी के झटकों से उबरने में मदद मिलेगी। आरसीईपी पर 10 देशों के दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान)के वार्षिक शिखर सम्मेलन के समापन के बाद रविवार को वर्चुअल तरीके से हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता करीब आठ साल तक चली वार्ताओं के बाद पूरा हुआ है।

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‘चैनल न्यूज एशिया’ ने कहा कि इस समझौते के दायरे में करीब एक-तिहाई वैश्विक अर्थव्यवस्था आएगी। समझौते के बाद आगामी वर्षों में सदस्य देशों के बीच व्यापार से जुड़े शुल्क और नीचे आएंगे। समझौते पर हस्ताक्षर के बाद सभी देशों को आरसीईपी को दो साल के दौरान अनुमोदित करना होगा जिसके बाद यह प्रभाव में आएगा। भारत इस समझौते में शामिल नहीं है। भारत पिछले साल समझौते की वार्ताओं से हट गया था, क्योंकि ऐसी आशंका है कि शुल्क समाप्त होने के बाद देश के बाजार आयात से पट जाएंगे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान होगा। हालांकि, अन्य देश पूर्व में कहते रहे हैं कि आरसीईपी में भारत की भागीदार के द्वार खुले हुए हैं। यहां उल्लेखनीय है कि आरसीईपी में चीन प्रभावशाली है। आरसीईपी का सबसे पहले प्रस्ताव 2012 में किया गया था। इसमें आसियन के 10 देश...इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपीन, सिंगापुर, थाइलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यामां और कंबोडिया के साथ चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।

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अमेरिका इस समझौते में शामिल नहीं है। मेजबान देश वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने कहा, ‘‘मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आठ साल की कड़ी मेहनत के बाद हम आधिकारिक तौर पर आरसीईपी वार्ताओं को हस्ताक्षर तक लेकर आ पाए हैं।’’ फुक ने कहा, ‘‘आरसीईपी वार्ताओं के पूरा होने के बाद इस बारे में मजबूत संदेश जाएगा कि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को समर्थन देने में आसियान की प्रमुख भूमिका रहेगी। यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे क्षेत्र में एक नया व्यापार ढांचा बनेगा, व्यापार सुगम हो सकेगा और कोविड-19 से प्रभावित आपूर्ति श्रृंखला को फिर से खड़ा किया जा सकेगा।’’ इस करार से सदस्य देशों के बीच व्यापार पर शुल्क और नीचे आएगा। यह पहले ही काफी निचले स्तर पर है।

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अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते में भारत के फिर से शामिल होने की संभावनाओं को खुला रखा गया है। समझौते के तहत अपने बाजार को खोलने की अनिवार्यता के कारण घरेलू स्तर पर विरोध की वजह से भारत इससे बाहर निकल गया था। जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा कि उनकी सरकार समझौते में भविष्य में भारत की वापसी की संभावना समेत स्वतंत्र एवं निष्पक्ष आर्थिक क्षेत्र के विस्तार को समर्थन देती है और उन्हें इसमें अन्य देशों से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। मलेशिया के अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं उद्योग मंत्री मोहम्मद आजमीन अली ने कहा, ‘‘यह समझौता संकेत देता है कि आरसीईपी देशों ने इस “मुश्किल समय में संरक्षणवादी कदम उठाने के बजाय अपने बाजारों को खोलने’’ का फैसला किया है।





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कोरोना महामारी का असर- सबसे ज्यादा महिलाओं ने गंवाई नौकरी, बढ़ी घरेलू हिंसा

  •  निधि अविनाश
  •  जनवरी 27, 2021   18:50
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कोरोना महामारी का असर- सबसे ज्यादा महिलाओं ने गंवाई नौकरी, बढ़ी घरेलू हिंसा

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं को महामारी में बढ़ती हिंसा से भी ग्रस्त किया गया क्योंकि आपात स्थिति के दौरान बढ़ती चिंता अक्सर महिलाओं के प्रति हिंसक और अपमानजनक व्यवहार को बढ़ावा देती है।आंकड़ों के अनुसार घरेलू हिंसा में तेजी देखी गई, राष्ट्रीय महिला आयोग को 25 मार्च और 31 मई, 2020 के बीच 1,477 शिकायतें मिलीं ।

ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कोरोना महामारी के दौरान महिलाओं को नौकरी के नुकसान का खामियाजा भुगतना पड़ता है क्योंकि उनका अधिकांश काम अदृश्य है। इसके अलावा महिलाएं अनौपचारिक कार्य व्यवस्था में काम करने की संभावना रखते हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज ट्रस्ट द्वारा एक सर्वेक्षण के मुताबिक, जो महिलाएं नौकरी छोड़ सकती हैं, उनमें से तैंतीस प्रतिशत को भी आय में भारी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि ऑक्सफैम, 20 गैर-लाभकारी समूहों का एक ग्रूप है जो वैश्विक गरीबी को कम करने पर ध्यान केंद्रित करता है। इसका नेतृत्व ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने साल 1942 में किया था। 

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इसकी रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2020 में 17 मिलियन महिलाओं ने अपनी नौकरी खो दी। इसलिए, महिलाओं के लिए बेरोजगारी 18 प्रतिशत के पूर्व-लॉकडाउन स्तर से 15 प्रतिशत बढ़ी है। इसमें कहा गया है कि महिलाओं की बेरोजगारी बढ़ने से भारत की जीडीपी में लगभग 8 फीसदी या 218 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है, रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन से पहले जिन महिलाओं को नौकरी पर रखा गया था, उनके भी 23.5 प्रतिशत अंक कम होने की संभावना थी। रिपोर्ट में कहा गया  है कि महामारी के बाद से, महिलाओं में काम का बोझ बढ़ गया है। कोविड -19 से पहले, ग्रामीण और शहरी महिलाओं ने वेतन और अवैतनिक गतिविधियों को मिलाकर प्रति दिन 373 मिनट और 333 मिनट बिताए।ऑक्सफैम के पूरक ने कहा, "यह अनुमान लगाया जाता है कि यदि भारत के शीर्ष 11 अरबपतियों पर उनके धन का सिर्फ 1 प्रतिशत कर लगाया जाता है, तो सरकार देश में नौ लाख आशा कार्यकर्ताओं के औसत वेतन का भुगतान 5 वर्षों के लिए कर सकती है।"

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रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं को महामारी में बढ़ती हिंसा से भी ग्रस्त किया गया क्योंकि आपात स्थिति के दौरान बढ़ती चिंता अक्सर महिलाओं के प्रति हिंसक और अपमानजनक व्यवहार को बढ़ावा देती है।आंकड़ों के अनुसार घरेलू हिंसा में तेजी देखी गई, राष्ट्रीय महिला आयोग को 25 मार्च और 31 मई, 2020 के बीच 1,477 शिकायतें मिलीं ।मई के बाद से, मामलों में केवल वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई 2020 तक जुलाई में 660 मामले दर्ज किए गए, लेकिन हर महीने कम से कम 450 से ऊपर दर्ज किए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल नवंबर में घरेलू हिंसा के मामले 2019 में 2,960 की तुलना में 4,687 थे। जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 1,576 मामले सामने आए और  दिल्ली में 906 और बिहार में 265 मामले सामने आए। 







वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, भारतीय सीमा शुल्क अब कारोबार सुगमता और व्यापार में सहयोग के लिए कर रहा है काम

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 27, 2021   17:15
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वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, भारतीय सीमा शुल्क अब कारोबार सुगमता और व्यापार में सहयोग के लिए कर रहा है काम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा,भारतीय सीमा शुल्क अब कारोबार सुगमता, व्यापार में सहयोग के लिए काम कर रहा है।सीतारमण ने कहा कि सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला हमारी वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। वित्त राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने अपने संदेश में कहा, ‘‘अब जबकि हम महामारी से उबर रहे हैं।

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारतीय सीमा शुल्क का कामकाज आज कारोबार सुगमता तथा व्यापार में मदद की ओर स्थानांतरित हो गया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस (28 जनवरी) पर अपने संदेश में वित्त मंत्री ने कहा कि सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा जन-केंद्रित रवैये से विभाग के कामकाज में बदलाव की प्रक्रिया और मजबूत होगी। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय सीमा शुल्क विभाग के कामकाज के तरीके में व्यापक बदलाव हुआ है।

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आज विभाग कारोबार सुगमता तथा व्यापार में सहयोग दे रहा है। जन-केंद्रित रुख से यह प्रक्रिया और मजबूत होगी।’’ उन्होंने कहा कि विश्व सीमा शुल्क संगठन ने इस साल के लिए ‘सीमा शुल्क से पुनरोद्धार, नवीकरण और सतत आपूर्ति श्रृंखला की जुझारू क्षमता में मदद’ की थीम चुनी है, जो आज की स्थिति के मुताबिक है। सीतारमण ने कहा कि सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला हमारी वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। वित्त राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने अपने संदेश में कहा, ‘‘अब जबकि हम महामारी से उबर रहे हैं, हमारी सीमाओं की सुरक्षा की दृद्धि से सीमा शुल्क विभाग की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।





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नए कृषि कानूनों में किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता, सामाजिक सुरक्षा की जरूरत: IMF

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 27, 2021   15:01
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नए कृषि कानूनों में किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता, सामाजिक सुरक्षा की जरूरत: IMF

भारत सरकार ने पिछले साल सितंबर में तीन कृषि कानूनों को लागू किया था, और इन्हें कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के रूप में पेश किया गया है, जो बिचौलियों को दूर करेगा और किसानों को देश में कहीं भी अपनी उपज बेचने की आजादी देगा।

वाशिंगटन। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत में हाल में लागू कृषि कानूनों में किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता है, लेकिन साथ ही कमजोर किसानों को सामाजिक सुरक्षा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि को सुधारों की जरूरत है। वाशिंगटन स्थित वैश्विक वित्तीय संस्थान की मुख्य अर्थशास्त्री ने मंगलवार को कहा कि ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां सुधार की जरूरत है। भारत सरकार ने पिछले साल सितंबर में तीन कृषि कानूनों को लागू किया था, और इन्हें कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के रूप में पेश किया गया है, जो बिचौलियों को दूर करेगा और किसानों को देश में कहीं भी अपनी उपज बेचने की आजादी देगा। गोपीनाथ ने नए कृषि कानूनों पर एक सवाल के जवाब में कहा, ये कृषि कानून खासतौर से विपणन क्षेत्र से संबंधित हैं।

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इनसे किसानों के लिए बाजार बड़ा हो रहा है। अब वे बिना कर चुकाए मंडियों के अलावा कई स्थानों पर भी अपनी पैदावार बेच सकेंगे। और हमारा मानना है कि इसमें किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता है। उन्होंने कहा, जब भी कोई सुधार किया जाता है, तो उससे होने वाले बदलाव की एक कीमत होती है। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इससे कमजोर किसानों को नुकसान न पहुंचे। यह सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराई जा सकती है। अभी एक फैसला किया गया है, और देखना होगा कि इसका क्या नतीजा सामने आता है। भारत में हजारों किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं। इस सिलसिले में किसान संगठनों की सरकार के साथ कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है, हालांकि उसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।





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