Adani Power Steps Into Nuclear Energy | परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अदाणी समूह की एंट्री! 'अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड' का गठन, जानें मास्टर प्लान

Adani Power
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रेनू तिवारी । Feb 12 2026 4:19PM

नई यूनिट, जिसे ऑफिशियली अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, कंपनी की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी के तौर पर 5 लाख रुपये के शुरुआती इन्वेस्टमेंट के साथ बनाई गई है।

अडानी पावर ने गुरुवार को न्यूक्लियर या एटॉमिक एनर्जी से मिलने वाली बिजली बनाने, भेजने और बांटने के लिए एक नई एटॉमिक एनर्जी यूनिट बनाने की घोषणा की। अदाणी पावर ने परमाणु एवं नाभिकीय ऊर्जा से प्राप्त बिजली के उत्पादन, पारेषण एवं वितरण के लिए पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी ‘अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड’ (एएईएल) का गठन किया है।

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नई यूनिट, जिसे ऑफिशियली अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, कंपनी की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी के तौर पर 5 लाख रुपये के शुरुआती इन्वेस्टमेंट के साथ बनाई गई है। अडानी पावर शेयर प्राइस: अडानी पावर लिमिटेड के शेयर बुधवार को 1.75 रुपये (+1.17%) की बढ़ोतरी के बाद 150.85 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुए।

कंपनी ने बृहस्पतिवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि एएईएल को 5,00,000 रुपये की अधिकृत पूंजी के साथ गठित किया गया है। इसे 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 50,000 शेयर में विभाजित किया गया है।

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अ दाणी पावर की एएईएल में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी ने कहा कि एएईएल का भारत में 11 फरवरी 2026 को गठन किया गया। उसी दिन इसे केंद्रीय पंजीकरण केंद्र, कंपनी रजिस्ट्रार से निगमण प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ। इसमें कहा गया कि अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी इकाई है और इसलिए ही यह कंपनी की संबंधित पक्ष इकाई भी है।

यह भारतीय संसद द्वारा सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ़ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल पास करने के दो महीने बाद हुआ है, जिससे एक ऐसे सेक्टर में प्राइवेट हिस्सेदारी का रास्ता साफ़ हुआ है जिस पर अब तक सरकार का कड़ा कंट्रोल रहा है। इस कदम से भारत की न्यूक्लियर एनर्जी पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव आया है।

ET ने पहले बताया था कि अडानी पावर 30 GW की न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी बनाने का प्लान बना रही है, क्योंकि देश की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर पावर प्रोड्यूसर आने वाले सालों में अपनी पूरी थर्मल कैपेसिटी को न्यूक्लियर पावर से बदलना चाहती है। 

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