Healthcare Sector में बड़ी हलचल, टाइनर में हिस्सेदारी खरीदने की रेस में केदारा कैपिटल सबसे आगे।

Kedaara Capital
प्रतिरूप फोटो
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Ankit Jaiswal । Jan 7 2026 10:06PM

भारतीय मेडिकल डिवाइस सेक्टर में बढ़ते निवेश के बीच, केदारा कैपिटल टाइनर ऑर्थोटिक्स में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने के लिए प्रमुख दावेदार है, जिसका मूल्यांकन 4,000 करोड़ रुपये तक हो सकता है। यह संभावित सौदा भारत में स्वास्थ्य बीमा के विस्तार और इलाज की बेहतर पहुंच के कारण हेल्थकेयर कंपनियों में प्राइवेट इक्विटी की बढ़ती रणनीतिक दिलचस्पी को रेखांकित करता है।

हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश को लेकर जो हलचल दिख रही है। मोहाली स्थित ऑर्थोटिक्स और फ्रैक्चर सपोर्ट उत्पाद बनाने वाली कंपनी टाइनर ऑर्थोटिक्स में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने की रेस में केदारा कैपिटल सबसे आगे बताई जा रही है। इस मामले से परिचित लोगों के अनुसार, इस संभावित सौदे में कंपनी का कुल मूल्यांकन करीब 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये के बीच आंका जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, इस सौदे में मौजूदा निवेशक लाइटहाउस फंड्स और कंपनी के प्रमोटर्स मिलकर लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकते हैं। बताया जा रहा है कि यह लेनदेन मुख्य रूप से सेकेंडरी डील होगी, यानी इसमें नई पूंजी डालने के बजाय मौजूदा शेयरों की बिक्री ज्यादा होगी।

गौरतलब है कि उपभोक्ता-उन्मुख और तेजी से बढ़ती हेल्थकेयर कंपनियां इस समय निवेशकों के रडार पर हैं। इसके पीछे स्वास्थ्य बीमा कवरेज में बढ़ोतरी, इलाज की बेहतर पहुंच और भारत में मेडिकल डिवाइस सेक्टर का तेजी से फैलता मरीज आधार बड़ी वजह मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, अगस्त में केदारा कैपिटल ने एक बार फिर इस डील को लेकर बातचीत शुरू की थी और ओ3 कैपिटल को इस प्रक्रिया में सलाहकार नियुक्त किया गया था। इससे पहले 2024 में सिंगापुर की टेमासेक के साथ अल्पांश हिस्सेदारी को लेकर बातचीत हुई थी, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सकी थी। हालांकि, टाइनर के संस्थापक पुषविंदर जीत सिंह, लाइटहाउस फंड्स, केदारा कैपिटल और ओ3 कैपिटल की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बता दें कि 2024 में एक रिपोर्ट में यह सामने आया था कि टेमासेक इस कंपनी में निवेश के लिए सबसे आगे थी और उसने वारबर्ग पिंकस और नॉरवेस्ट वेंचर पार्टनर्स जैसी वैश्विक प्राइवेट इक्विटी फर्मों को पीछे छोड़ दिया था। मौजूदा घटनाक्रम करीब आठ साल बाद सामने आया है, जब मई 2018 में टाइनर ने लाइटहाउस, थुआन और विहोम बीवी समेत निवेशकों से 21 मिलियन डॉलर जुटाए थे, उस समय कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब 103.3 मिलियन डॉलर था।

कंपनी की पृष्ठभूमि की बात करें तो टाइनर की स्थापना 1993 में हुई थी और फिलहाल इसे सिंह परिवार की दूसरी पीढ़ी संचालित कर रही है। कंपनी के पास 150 से ज्यादा उत्पादों का पोर्टफोलियो है, जिसमें बॉडी ब्रेसेस, फ्रैक्चर और वॉकिंग एड्स, ट्रैक्शन किट, एडवांस्ड नी-ब्रेसेस, फिंगर स्प्लिंट्स, सिलिकॉन और फुट केयर उत्पाद तथा सर्वाइकल सपोर्ट शामिल हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में टाइनर का राजस्व बढ़कर 495.5 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो इससे एक साल पहले 394.1 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी का मुनाफा भी वित्त वर्ष 2023 के 50.9 करोड़ रुपये से बढ़कर 73.4 करोड़ रुपये हो गया है, यह जानकारी बाजार अनुसंधान संस्था ट्रैक्जन के आंकड़ों से सामने आई है।

गौरतलब है कि भारत का मेडिकल डिवाइस सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में प्राइवेट इक्विटी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बीमा कवरेज में बढ़ोतरी, आय स्तर में सुधार और टियर-2 व टियर-3 शहरों में स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार ने इस सेक्टर को नई रफ्तार दी है।

उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, भारत का मेडिकल डिवाइस बाजार अगले पांच वर्षों में करीब 16.4 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ते हुए 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में 12 अरब डॉलर के स्तर पर रहा मेड-टेक उद्योग मेडिकल टूरिज्म और बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता से भी लाभान्वित हो रहा है। ऐसे में टाइनर जैसी घरेलू कंपनियों में निवेश को लेकर दिलचस्पी और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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