Billionaires List में बड़ा उलटफेर, Gautam Adani ने अंबानी को पछाड़ा, संपत्ति में अरबों का इजाफा

शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच गौतम अडानी लगभग 92.6 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ एशिया के सबसे अमीर शख्स बन गए हैं, जबकि मुकेश अंबानी 90.8 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यह फेरबदल वैश्विक संपत्ति सूची में हो रहे बदलावों को दर्शाता है, जहां बाजार की अस्थिरता अरबपतियों की रैंकिंग को लगातार प्रभावित कर रही है।
एशिया के सबसे अमीर शख्स की सूची में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक गौतम अडानी ने मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अडानी की कुल संपत्ति बढ़कर करीब 92.6 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे वह दुनिया के अमीरों की सूची में 19वें स्थान पर आ गए हैं। वहीं, लंबे समय तक इस सूची में शीर्ष पर रहने वाले मुकेश अंबानी अब करीब 90.8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ 20वें स्थान पर खिसक गए हैं। गौरतलब है कि दोनों के बीच अंतर बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन बाजार की चाल ने यह बदलाव तय किया है।
अगर इस साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ हो जाती है। अडानी समूह के शेयरों में लगातार मजबूती देखने को मिली है, जिससे उनकी संपत्ति में करीब 8.1 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। इसके उलट, अंबानी की संपत्ति में लगभग 16.9 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है। इससे साफ है कि दोनों उद्योगपतियों के लिए साल का सफर बिल्कुल अलग रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में शेयर बाजार में हल्की गिरावट के बावजूद अडानी समूह के शेयरों में तेजी देखी गई, जिससे उनकी संपत्ति में एक ही दिन में करीब 3.5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। वहीं अंबानी की संपत्ति में मामूली बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन उनके समूह के शेयर अपेक्षाकृत स्थिर रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर भी अमीरों की सूची में उतार-चढ़ाव जारी है। मौजूद जानकारी के अनुसार दुनिया के कई बड़े अरबपतियों की संपत्ति में इस साल गिरावट आई है। खासकर कुछ बड़े नामों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, जिससे यह साफ होता है कि वैश्विक बाजार अभी भी अस्थिर स्थिति में है।
दूसरी ओर, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति के तौर पर एलन मस्क अभी भी शीर्ष पर बने हुए हैं, जबकि अन्य बड़े उद्योगपति भी शीर्ष सूची में शामिल हैं। यह भी देखने वाली बात है कि वैश्विक स्तर पर संपत्ति का संतुलन लगातार बदल रहा है और इसमें बाजार की भूमिका सबसे अहम बनी हुई है।
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