सुरक्षा कारणों से Bitchat ऐप पर कार्रवाई, सरकारी सूत्रों ने बताया क्यों हटाया

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केंद्र सरकार के निर्देश के बाद मैसेजिंग प्लेटफॉर्म बिटचैट को भारत में ऐप स्टोर और प्ले स्टोर से हटा दिया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार ब्लूटूथ तकनीक पर काम करने वाला यह ऐप कानून-व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गया था। यह बिना इंटरनेट के कई डिवाइसों के जरिए संदेश आगे भेजने की सुविधा देता था।

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय के आदेश के बाद बिटचैट को भारत में ऐप स्टोर से हटाए जाने के बीच सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि ब्लूटूथ आधारित यह मैसेजिंग ऐप कानून-व्यवस्था के लिए चिंता का विषय था और इसे हटाना जरूरी था। सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाध्य है। उनके मुताबिक, बिटचैट में कोई भी व्यक्ति ब्लूटूथ चालू कर कई चरणों के जरिये संदेश भेज सकता था और यह कानून-व्यवस्था के लिए चिंता का विषय था।

बिटचैट ऐप इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के बजाय ब्लूटूथ के जरिये आसपास के उपकरणों से जुड़कर संदेश भेजने की सुविधा देता है। इसमें संदेश सीधे किसी एक व्यक्ति तक पहुंचने के बजाय कई उपकरणों के जरिये आगे भेजे जा सकते हैं, जिससे उपयोगकर्ता बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी अपेक्षाकृत दूर तक संदेश भेज सकते हैं। बिटचैट के डेवलपर और ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डोर्सी ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था कि भारत सरकार के अनुरोध के बाद एप्पल ने बिटचैट को भारत के ऐप स्टोर से हटा दिया है।

उन्होंने अपनी पोस्ट में एप्पल की ऐप समीक्षा टीम के नोटिस का स्क्रीनशॉट भी साझा किया था। इसके अलावा, बिटचैट को गूगल के प्ले स्टोर से भी हटा दिया गया है। बिटचैट इस साल जुलाई में उस समय सरकार की नजर में आया था, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में व्यापक प्रदर्शन किए थे।

उस समय गृह मंत्रालय के साइबर अपराध से जुड़े प्रकोष्ठ भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने माइक्रोसॉफ्ट की अनुषंगी कंपनी गिटहब को बिटचैट हटाने का निर्देश दिया था। फिलहाल सीजेपी मतदाता सूची के पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग के कामकाज के विरोध में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन कर रही है।

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