Omani Father, Syrian Mother का बेटा Hamam Al-Hammami 2011-17 के बीच Syria में था, नौकरी Join करने से पहले ही रच ली थी साजिश, जाँच में हुए कई खुलासे

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जांच से जुड़े एक अन्य सूत्र के मुताबिक, हमामी ने इस साल इससे पहले फ्लाईदुबई की तेल अवीव जाने वाली एक उड़ान में भी कथित तौर पर हमला करने के बारे में विचार किया था। जून में बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उसकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं।
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में हुए खौफनाक खेल की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है वैसे वैसे दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियों के हाथ पांव फूलते जा रहे हैं क्योंकि सह-पायलट हमाम अल-हमामी सारी सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए और तमाम प्रोटोकॉल्स को तोड़ते हुए अपने खतरनाक मिशन को अंजाम तक पहुँचाने के करीब पहुँच गया था। इस पूरे मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि जांच में हमाम अल-हमामी की पुरानी नौकरी और उसकी वैचारिक पृष्ठभूमि को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, हमाम अल-हमामी ने फ्लाईदुबई में नौकरी मिलने से पहले ही तेल अवीव जाने वाली उड़ानों की तलाश शुरू कर दी थी। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, उसने पूछताछ में बताया कि उसने जानबूझकर ऐसी विमानन कंपनी चुनी, जिसकी उड़ानें तेल अवीव जाती थीं। यानी अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या फ्लाईदुबई में उसकी नियुक्ति महज नौकरी पाने का मामला थी या इसके पीछे पहले से तैयार कोई खतरनाक योजना छिपी थी? इतना ही नहीं, जांच में यह दावा भी सामने आया है कि उसका कथित निशाना बेन गुरियन हवाई अड्डा था।
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कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जांच से जुड़े एक अन्य सूत्र के मुताबिक, हमामी ने इस साल इससे पहले फ्लाईदुबई की तेल अवीव जाने वाली एक उड़ान में भी कथित तौर पर हमला करने के बारे में विचार किया था। जून में बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उसकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं और आरोप है कि उसने वहां की गतिविधियों तथा व्यवस्था को समझने की कोशिश की थी। जुलाई में हमला करने की कथित योजना आखिरी समय पर इसलिए टाल दी गई क्योंकि विमान में उसका एक परिचित मौजूद था। इसके बाद 30 सितंबर की उड़ान में हमला हुआ, जब उसने हवा में भारतीय कप्तान स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला किया। विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल ने हस्तक्षेप कर उसे काबू किया, लेकिन इसके बाद भी उसने विमान को नीचे ले जाने और उसे दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की।
इसके अलावा, अमेरिकी मीडिया में सामने आई जानकारी के मुताबिक, ओमान की राष्ट्रीय विमानन कंपनी में काम करने के दौरान उसके कथित कट्टरपंथी विचारों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा हुई थीं। वर्ष 2024 में उसके पास कथित चरमपंथी सामग्री मिलने के बाद उसे उड़ान संबंधी जिम्मेदारियों से हटाकर प्रशासनिक काम में लगाया गया था। ओमानी अधिकारियों को आशंका थी कि सीरिया में बिताए उसके पुराने समय के दौरान वह चरमपंथी विचारों से प्रभावित हुआ हो सकता है।
हमाम अल-हमामी का जन्म संयुक्त अरब अमीरात में ओमानी पिता और सीरियाई मां के घर हुआ था। उसके जीवन का सबसे रहस्यमय अध्याय 2011 से 2017 के बीच का माना जा रहा है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार वह इस अवधि में संभवतः सीरिया में रहा था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह वहां कब गया, कहां रहा और कितने समय तक वहां मौजूद रहा। यही वह कड़ी है, जिसे जांचकर्ता उसकी वैचारिक कट्टरता से जोड़कर देख रहे हैं।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2018 में उसने ओमान की राष्ट्रीय विमानन कंपनी में काम शुरू किया और करीब सात वर्षों तक वहां रहा। जनवरी 2022 में वह बोइंग 737 विमान का प्रथम अधिकारी बना। इसी दौरान उसने ब्रिटेन के बकिंघमशायर न्यू विश्वविद्यालय से विमानन प्रबंधन की तीन वर्षीय दूरस्थ शिक्षा पूरी की और 2023 में स्नातक हुआ। विश्वविद्यालय ने पुष्टि की कि उसकी पढ़ाई में पायलट प्रशिक्षण शामिल नहीं था।
इसके बाद घटनाक्रम और भी गंभीर हो जाता है। फरवरी 2025 में उसने ओमान की कंपनी छोड़ी। जून 2025 में वह रॉयल एयर मैरोक से जुड़ा, लेकिन वहां उसकी नियुक्ति को लेकर भी तस्वीर साफ नहीं है। कंपनी के अनुसार उसने केवल तीन महीने का प्रशिक्षण लिया और उसे नौकरी के लिए चुना नहीं गया। जनवरी 2026 में वह फ्लाईदुबई से जुड़ा और घटना से पहले करीब आठ महीने तक प्रथम अधिकारी के रूप में काम करता रहा।
हम आपको यह भी बता दें कि जांच एजेंसियों के हाथ उसके हटाए गए सोशल मीडिया खातों से भी ऐसी सामग्री लगी है, जिसने संदेह और गहरा दिया है। उसके नाम से जुड़े खातों पर बोइंग 737 विमान के कॉकपिट के दृश्य, इजरायली विमानों के चित्र और अल कायदा से जुड़े कुख्यात चेहरों की तस्वीरें सामने आईं। एक अन्य पोस्ट में मक्का, मदीना और यरुशलम के पवित्र स्थलों को जोड़ती एआई से बनाई गई तस्वीर थी, जिसके साथ मौत से न डरने और अपमान के विरुद्ध खड़े होने वाला संदेश था। ये पोस्ट घटना के बाद प्रकाशित हुई या एडवांस में डाल दी गयी थी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
यही नहीं, उसके पुराने संदेशों की जांच से महिलाओं और महिला-पुरुष की उपस्थिति वाले कार्यस्थलों को लेकर बेहद कट्टर और स्त्री-विरोधी विचार भी सामने आए। करीब तीन हजार हटाए गए संदेशों का विश्लेषण किया गया है, जिनमें विवाह, महिलाओं के काम करने और नकाब जैसे मुद्दों पर कठोर विचार व्यक्त किए गए थे। यहां सवाल उठता है कि यदि किसी पायलट को पहले ही उसके कथित कट्टर विचारों के कारण उड़ान ड्यूटी से हटाया जा चुका था, तो वह दूसरी विमानन कंपनी तक कैसे पहुंचा और अंततः अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ान में प्रथम अधिकारी की जिम्मेदारी तक कैसे पहुंच गया?
उधर, इजरायल में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। वहां के अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों और चालक दल के नाम उड़ान से पहले उपलब्ध थे, लेकिन परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उसकी प्रक्रियाओं में विदेशी विमान के चालक दल के नामों की जांच शामिल नहीं है। मंत्रालय के अनुसार उसकी सुरक्षा प्रक्रिया पायलट से उत्पन्न खतरे को अलग से नहीं देखती। यही खुलासा अब पूरे विमानन सुरक्षा तंत्र के लिए सबसे असहज सवाल बन गया है कि जब यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर जांच होती है, तो कॉकपिट में बैठने वाले व्यक्ति की वैचारिक और सुरक्षा पृष्ठभूमि की जांच कितनी गहरी है?
बहरहाल, फ्लाईदुबई कांड अब तमाम तरह की चूकों पर प्रश्न उठाता घटनाक्रम भी बन चुका है। जांच का सबसे अहम सिरा अब भी सीरिया से जुड़ा है। जब तक हमाम अल-हमामी के उस रहस्यमय दौर, उसकी वैचारिक यात्रा और विभिन्न विमानन कंपनियों में उसके रोजगार के बीच की कड़ियां पूरी तरह सामने नहीं आतीं, तब तक इस घटना से जुड़े सबसे बड़े सवाल अनुत्तरित ही रहेंगे।
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