BSE Sensex में 1124 अंक की भारी गिरावट, Nifty 22800 के नीचे फिसला

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली दर्ज की गई। बीएसई का मानक सूचकांक सेंसेक्स 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 अंक पर आ गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी 360.25 अंक का नुकसान उठाकर लगभग छह महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ।
कच्चे तेल के दाम में तेजी, वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर वैश्विक रुख से स्थानीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट आई और मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 1,124 अंक का गोता लगाकर छह महीने के निचले स्तर पर आ गया। वहीं एनएसई निफ्टी 22,800 अंक के नीचे रहा। तीस शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत लुढ़क कर 72,771.72 अंक पर बंद हुआ।
यह 30 मार्च, 2026 के बाद इसका सबसे निचला बंद स्तर है। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 1,179.51 अंक टूटकर 72,716.23 अंक तक आ गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ करीब छह महीने के निचले स्तर 22,780.25 अंक पर बंद हुआ।
निफ्टी में शामिल 50 में से 47 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि केवल तीन में बढ़त रही। इससे पता चलता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई। विश्लेषकों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली, अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल में वृद्धि और एशियाई बाजारों में कमजोर रुख के कारण वित्तीय, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, धातु, दैनिक उपयोग की वस्तुओं, तेल एवं गैस तथा वाहन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली हुई।
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से 29 में गिरावट रही। लार्सन एंड टुब्रो में सबसे अधिक 2.81 प्रतिशत का नुकसान रहा। पावर ग्रिड 2.62 प्रतिशत, अदाणी पोर्ट्स 2.38 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक 2.30 प्रतिशत, हिंदुस्तान यूनिलीवर 2.27 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज 2.24 प्रतिशत टूटे।
इन्फोसिस एकमात्र शेयर है जिसमें तेजी रही। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल 3.81 प्रतिशत उछलकर 108.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 3,693.93 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की बिकवाली की।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा , ‘‘बाजार में मंदड़ियों का दबदबा बना रहा और बाजार प्रमुख मनोवैज्ञानिक समर्थन स्तर से नीचे आ गया। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में गिरावट के बीच निवेशकों की सतर्कता बढ़ रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका द्वारा संघर्ष विराम प्रस्ताव खारिज किए जाने से पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका बढ़ी है। इससे निकट अवधि में कूटनीतिक समाधान की संभावना कम हुई है और आपूर्ति के लंबे समय तक प्रभावित होने तथा जिंस कीमतों में वृद्धि का जोखिम बढ़ा है।’’ विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल बढ़ने से भारत और अमेरिका के बीच बॉण्ड प्रतिफल का अंतर कम हो रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है और बाजार धारणा सतर्क बनी रह सकती है।
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की और चीन में शंघाई एसएसई कम्पोजिट गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग बढ़त में रहा। यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में मिला-जुला रुख रहा। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे।
सेंसेक्स शुक्रवार को 315.20 अंक चढ़कर 73,895.74 अंक पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 77.40 अंक की बढ़त के साथ 23,140.50 अंक पर रहा था।
अन्य न्यूज़














