Cancer Treatment में Game Changer बनेगी China की यह दवा? Lung Cancer का खतरा 34% कम हुआ

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Ankit Jaiswal । May 31 2026 11:46PM

कैंसर के इलाज में एक बड़ी उम्मीद जगाते हुए, नई दवा आइवोनेसिमैब ने फेफड़ों के कैंसर के मरीजों में मृत्यु के जोखिम को 34% तक घटा दिया है। हालांकि चीन में हुए परीक्षण के परिणाम उत्साहजनक हैं, पर चिकित्सा जगत में इसकी व्यापक स्वीकृति वैश्विक परीक्षणों के नतीजों पर निर्भर करेगी।

फेफड़ों के कैंसर के इलाज को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। हाल ही में जारी एक अध्ययन के अनुसार, एक नई प्रयोगात्मक दवा ने अंतिम चरण के परीक्षण में मौत के खतरे को 34 प्रतिशत तक कम करने में सफलता हासिल की है। चिकित्सा जगत में इस परिणाम को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण बना हुआ है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह दवा चीन की जैव प्रौद्योगिकी कंपनी अकेसो और उसकी साझेदार कंपनी समिट थेराप्यूटिक्स द्वारा विकसित की गई है। दवा का नाम आइवोनेसिमैब है। इसे कीमोथेरेपी के साथ उन मरीजों पर आजमाया गया जो स्क्वैमस नॉन-स्मॉल सेल फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थे। यह फेफड़ों के कैंसर का एक जटिल और अपेक्षाकृत कठिन प्रकार माना जाता है।

अध्ययन के नतीजों के मुताबिक, इस दवा और कीमोथेरेपी के संयुक्त इस्तेमाल से मरीज औसतन 27.9 महीने तक जीवित रहे, जबकि पारंपरिक प्रतिरक्षा चिकित्सा और कीमोथेरेपी लेने वाले मरीजों की औसत जीवित रहने की अवधि 23.7 महीने रही। यानी नई दवा के प्रयोग से मरीजों की जीवन अवधि में करीब चार महीने की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बता दें कि आइवोनेसिमैब एक विशेष प्रकार की दवा है, जो शरीर में दो अलग-अलग जैविक लक्ष्यों पर एक साथ काम करती है। यही वजह है कि इसे लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों और निवेशकों के बीच काफी चर्चा हो रही है। कई विशेषज्ञ इसे कैंसर उपचार की मौजूदा प्रमुख दवाओं का संभावित विकल्प भी मान रहे हैं।

हालांकि विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। अमेरिका के एमोरी विश्वविद्यालय के विनशिप कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेश रामालिंगम ने कहा कि परिणाम उत्साहजनक हैं, लेकिन यह परीक्षण केवल चीन में किया गया है। ऐसे में यह जानना जरूरी होगा कि दूसरे देशों और विभिन्न आबादी वाले मरीजों पर यह दवा कितना प्रभावी साबित होती है।

गौरतलब है कि इस दवा का एक वैश्विक तीसरे चरण का परीक्षण भी जारी है, जिसके परिणाम आने वाले समय में सामने आएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसी तरह के नतीजे मिलते हैं, तो फेफड़ों के कैंसर के इलाज में यह दवा एक बड़ा बदलाव ला सकती है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दवा लेने वाले कुछ मरीजों में रक्तस्राव जैसी दुष्प्रभाव संबंधी समस्याएं देखी गईं, लेकिन गंभीर मामलों की संख्या काफी कम रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि दवा की सुरक्षा और प्रभावशीलता दोनों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

बता दें कि पिछले एक दशक में कैंसर के इलाज में कई नई तकनीकों और दवाओं का विकास हुआ है। ऐसे में आइवोनेसिमैब के सकारात्मक परिणाम फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आए हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष वैश्विक परीक्षणों के पूरे होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।

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