Delhi Budget 2026: हजारों MSME को ट्रेनिंग, AI-Startup इकोसिस्टम के लिए करोड़ों का ऐलान

Delhi Budget 2026
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दिल्ली बजट 2026-27 में एक नई सेमीकंडक्टर नीति लाने और दो कृत्रिम मेधा (एआई) उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई है। इस पहल का उद्देश्य दिल्ली को सेमीकंडक्टर विनिर्माण, अनुसंधान और विकास का एक प्रमुख केंद्र बनाना तथा तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सेमीकंडक्टर नीति तैयार करने, कृत्रिम मेधा (एआई) उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने, 12,000 एमएसएमई को प्रशिक्षण देने और कई अन्य उपायों की घोषणा की। विधानसभा में बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उनकी सरकार दिल्ली में सेमीकंडक्टर विनिर्माण, अनुसंधान और विकास का एक सशक्त परिवेश विकसित करना चाहती है। उन्होंने कहा, “हम बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित करने और सेमीकंडक्टर विनिर्माताओं को यहां इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने को सेमीकंडक्टर नीति लाएंगे।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस उद्देश्य के लिए बजट में एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने ड्रोन नीति बनाने की भी घोषणा की, जिसके लिए निवेश आकर्षित करने और स्टार्टअप व विनिर्माण क्षेत्र को सहयोग देने को एक करोड़ रुपये का वित्तपोषण आवंटित किया गया है। इसके अलावा, बजट में दो एआई केंद्र स्थापित करने के लिए 8.20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एआई अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और क्षमता निर्माण के लिए समर्पित केंद्र के रूप में काम करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये केंद्र शासन और स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी परिवहन तथा सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

गुप्ता ने कहा कि लघु और मझोले उद्यमों (एसएमई) की प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए साझा सुविधा केंद्र के निर्माण को 48 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य बेहतर बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर औद्योगिक क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाना है।’’ उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली सरकार पहली बार दिल्ली में रैंप (रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस) योजना लागू कर रही है। इस योजना के तहत 32,000 सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को प्रशिक्षण दिया जाएगा और 15,000 व्यवसायों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) तथा ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) जैसे डिजिटल मंचों से जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिल सकेगी।

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