FCI ने घूस मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया, 30 अन्य का तबादला

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डीजीएम स्तर के एक अधिकारी को कथित रूप से निम्न गुणवत्ता वाले खाद्यान्नों की आपूर्ति की अनुमति देने के बदले निजी मिल मालिकों से रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उपमहाप्रबंधक (डीजीएम) स्तर के एक अधिकारी को गिरफ्तार करने के बाद एक बड़े सफाई अभियान में सरकारी स्वामित्व वाले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया और 30 अन्य का तबादला कर दिया। डीजीएम स्तर के एक अधिकारी को कथित रूप से निम्न गुणवत्ता वाले खाद्यान्नों की आपूर्ति की अनुमति देने के बदले निजी मिल मालिकों से रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बृहस्पतिवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि निलंबन और तबादलों का आदेश इसलिए दिया गया है ताकि जांच को किसी भी तरह से प्रभावित न होने दिया जाए। सचिव ने कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), जो खाद्यान्न की खरीद और वितरण के लिए सरकार की मुख्य एजेंसी है, व्हिसलब्लोअर (गड़बड़ी की सूचना देने) नीति का प्रचार कर रही है और जमीनी स्तर के अधिकारियों की विवेकाधीन शक्तियों को कम करने के लिए कदम उठा रही है।

चोपड़ा ने कहा, ‘‘एफसीआई में जो हुआ वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम एफसीआई में होने वाली घटनाओं से बहुत चिंतित हैं। इसलिए दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है क्योंकि वे इन गतिविधियों में शामिल थे और सीबीआई ने छापेमारी की है। मुझे बताया गया है कि कुछ अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है।’’ सचिव ने कहा कि प्रथम श्रेणी के चार अधिकारी, द्वितीय श्रेणी के आठ अधिकारी और तृतीय श्रेणी के 18 अधिकारियों को अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया गया है ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।

चोपड़ा ने कहा कि एफसीआई यह सुनिश्चित करेगा कि सभी दोषियों को सजा मिले और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। सीबीआई ने 11 जनवरी को एफसीआई में कथित भ्रष्टाचार के संदर्भ में ऑपरेशन कनक शुरू किया। चंडीगढ़ से डीजीएम-रैंक के एक अधिकारी को गिरफ्तार करने के बाद पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 50 स्थानों पर तलाशी ली गई।

अधिकारियों, चावल मिल मालिकों और बिचौलियों की गुटबंदी में संदिग्धों की पहचान करने के लिए सीबीआई ने छह महीने के लंबे खुफिया अभियान के बाद प्राथमिकी में कुल 74 अभियुक्तों के नाम दर्ज किये, जो कथित रूप से भ्रष्ट आचरण में लिप्त थे। सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, एफसीआई अधिकारियों के एक संगठित सिंडिकेट ने निजी मिलों से गोदामों में उतारे गए प्रति ट्रक के लिए 1,000 रुपये से लेकर 4,000 रुपये तक की रिश्वत ली, ताकि उनके द्वारा आपूर्ति किए गए कम गुणवत्ता वाले अनाज को छुपाया जा सके और अन्य लाभ दिए जा सकें।

एफसीआई में भ्रष्टाचार से संबंधित सवालों के जवाब में चोपड़ा ने संस्था में प्रणालीगत मुद्दे को हल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। चोपड़ा ने कहा, ‘‘हमारे पास एक ‘व्हिसल-ब्लोअर’ नीति है, जिसके लिए अब हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका व्यापक रूप से प्रचार और प्रसार हो।’’ सचिव ने बताया कि एफसीआई में बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के खाद्यान्न की गुणवत्ता की जांच करने के लिए एक ‘स्वचालित अनाज विश्लेषक’ लाया जायेगा। चोपड़ा ने कहा कि इस मशीन को इस महीने 50 स्थानों पर लगाया जाएगा और इसकी सफलता के आधार पर इसे धीरे-धीरे सभी एफसीआई खरीद केंद्रों पर लगाया जाएगा।

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