मुस्लिम मुल्कों में खुद पहुंचे मोदी, यहूदी राष्ट्र में जय को भेजा, मीडिल ईस्ट के दौरे की टाइमिंग बता रही है, कुछ बड़ा गेम कर रहा भारत

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अभिनय आकाश । Dec 17 2025 1:06PM

जॉर्डन पश्चिम एशिया में एक अहम जियोपॉलिटिकल हब की तरह है। इसकी सीमाएं इराक, सीरिया, इजराइल और फिलिस्तीन से लगती हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है। भारत और ओमान के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते यानी सीईपीए पर मुहर लग सकती है।

इजराइल और सऊदी के बीच बसा छोटे से मुल्क से पीएम मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा को शुरु करते हैं और इसमें मुस्लिम मुल्क इथोपिया वाया आखिरी पड़ाव ओमान है। ओमान वो मुस्लिम देश है जो हमेशा से ही यह अभी की बात नहीं है। शुरुआत से ही भारत हितेषी रहा है। एक तरफ पीएम मोदी जॉर्डन, इथोपिया और ओमान जैसे इस्लामिक देशों का दौरा कर रहे हैं तो ठीक उसी वक्त उनके दूत बनकर विदेश मंत्री एस जयशंकर यहूदी राष्ट्र के दौरे पर मीटिंग कर रहे हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि एक ही समय पर मिडिल ईस्ट के मुल्कों के दौरे से भारत दुनिया को मैसेज देने का काम कर रहा है। दरअसल, 15 दिसंबर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा पर निकले हैं। पीएम मोदी ने अपने मीडिल ईस्ट के दौरे की शुरुआत जॉर्डन से करते हुए इथोपिया के बाद ओमान में इसे विराम देंगे। पीएम मोदी की इस यात्रा का मकसद मिडिल ईस्ट में रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करना है। भारत ने ये पहल तब की है जब जियोपॉलिटिकल माहौल ट्रेड की खींचतान, एनर्जी की समस्या, सुरक्षा संकट और दूसरी रणनीतिक और आर्थिक दिक्कतों से घिरा हुआ है।

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पीएम मोदी का मीडिल ईस्ट का दौरा

पाकिस्तान लगातार ये कोशिश कर रहा है कि पूरी दुनिया ना सही बल्कि जितने भी इस दुनिया में इस्लामिक देश हैं या फिर मुस्लिम देश हैं वो भारत के खिलाफ खड़े हो और इसी को लेकर समय-समय पर पाकिस्तान कोशिशें करता रहता है। भारत के खिलाफ भ्रामक खबरें फैलाने की कोशिश करता है। एक नैरेटिव सेट करने की कोशिश करता है। लेकिन पाकिस्तान इन हथखंडों में अब विफल साबित हो रहा है। कई ऐसे मुस्लिम देश है या फिर इस्लामिक देश हैं जो ओआईसी के मेंबर्स भी हैं। वह अब धीरे-धीरे भारत के साथ आ रहे हैं। चाहे हम कुवैत की बात कर लें, बहरीन की बात कर लें। जॉर्डन पश्चिम एशिया में एक अहम जियोपॉलिटिकल हब की तरह है। इसकी सीमाएं इराक, सीरिया, इजराइल और फिलिस्तीन से लगती हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है। भारत और ओमान के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते यानी सीईपीए पर मुहर लग सकती है।

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यहूदी राष्ट्र के दौरे पर पहुंचे मोदी के जय

एक फोन कॉल आता है। यह फोन कॉल पीएमओ में होती है। बहुत महत्वपूर्ण बातचीत होती है। दरअसल यह फोन होता है इजराइल के राष्ट्रपति बेंजामिन ने नेत्याहू का जो अपने दोस्त, मित्र और सहयोगी साथी के साथ फोन पर बात करना चाहते हैं। पीएम मोदी फोन पर आते हैं। उनसे बातचीत तय होती है कि इस वक्त पर बातचीत होगी तो बातचीत हो जाती है और फिर कई मुद्दों पर दोनों एक दूसरे से राय साझा करते हैं। बातचीत होती है और उसके बाद कहा जाता है कि जल्द असर दिखेगा। मिलते हैं और अब देखिए ग्राउंड पर एक्शन दिखाई दे रहा है। 10 तारीख की घटना और आज हम 16 दिसंबर को यह बात कर रहे हैं और 16 दिसंबर को इस देश के विदेश मंत्री यानी कि डॉक्टर एस जयशंकर इजरायल पहुंचते हैं और विदेश मंत्री से मुलाकात करते हैं। प्रधानमंत्री से मुलाकात करते हैं और राष्ट्रपति से भी मिलते हैं। यानी कि एक थरो एक्शन प्लान जो पहले से तैयार था उसका एग्जीक्यूशन शुरू हो गया है

पीपल टू पीपल कनेक्ट पर जोर

डॉक्टर एस जयशंकर जब इजराइल पहुंचे तो वहां पहुंचकर उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण बयान दिया है। इजराइल के साथ अपने संबंध को मजबूत बनाने यानी कि गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट कनेक्ट, बिजनेस टू बिजनेस कनेक्ट, पीपल टू पीपल कनेक्ट पर जोर दिया है। इजराइल के साथ सहयोग बढ़ाने पर, इजराइल के साथ दोस्ती मजबूत करने पर जयशंकर ने अपना कमिटमेंट दर्शाया है।

मोदी-नेतन्याहू का क्या है बड़ा प्लान

वेस्ट एशिया यानी कि पश्चिमी एशिया की मौजूदा स्थितियों पर विचार पर आदान-प्रदान होता है। पीएम ने कहा कि जो गाजा पीस प्लान है उस पर अच्छे से काम होना चाहिए और शांति के तमाम प्रयासों को भारत का समर्थन रहेगा। बातचीत के अंत में दोनों नेता यह तय करते हैं कि जल्द मिलते हैं। यह बात इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी पीएम मोदी से बातचीत के क्रम में दोहराते हैं कि जल्द मिलते हैं। और अब उसका एक्शन आपको दिख रहा है कि इजराइल से बैठकर जो बयान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिया है। यानी कि रूपरेखा तैयार हो रही है मुलाकात की। कुछ बड़े फैक्ट्स हो सकते हैं। जो यात्रा है जो मुलाकात होगी तो उसमें संभावनाएं किन विषयों पर हैं? एक तो देखिए ये जो नेतृत्व के मुलाकात से पहले के बैकग्राउंडर्स हैं उसकी तैयारी दिखाई पड़ती है और ये जो बटरल्स हैं द्विपक्षीय जो है मसले क्षेत्रीय मुद्दे हैं उस पर चर्चा हो रही है ताकि भारत इजराइल की जो रणनीतिक साझेदारी है उसको मजबूत किया जा सके जो जयशंकर का यात्रा है उसके मद्देनजर ताकि आगे जो ये संभावित यात्रा है मुलाकात है भारत के प्रधानमंत्री और इजराइल के करना चाह रहे हैं और देखिए ये तमाम बैकग्राउंडर्स हैं, रक्षा है, स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है, तमाम चीजें हैं। उसमें भी अहम हो जाता है कि ये जो कारोबार है ना वो बहुत अच्छा है और अच्छी स्थिति में आगे बढ़ता चला जा रहा है। 

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नेतन्याहू संग पुतिन जैसी कैमेस्ट्री

एक तरफ जहां भारत की गल्फ देशों में जिस तरह से पैट है पीएम नरेंद्र मोदी की जो जुगलबंदी यूएई के साथ दिखती है सऊदी के साथ दिखती है वैसी ही दोस्ती उनकी पुतिन के साथ दिखती है वैसी ही दोस्ती अब जब वो कैमरे पर इजराइल के पीएम के साथ भी दिखेगी तो दुनिया कैसे रिएक्ट करेगी ये बहुत बड़ा मसला है और पाकिस्तान जैसे देश को न्यूट्रलाइज करके रखने के लिए इजराइल का सहयोग बहुत जरूरी भी हो जाता है जो तमाम तरह से आपको चेक एंड बैलेंस करने में मदद करता है। तमाम एडवांस तकनीक देता है, हथियार देता है ताकि आप अपने दुश्मन को उसकी हैसियत वक्त पर दिखाते रहे।

आतंकवाद पर ग्लोबल मैसेज

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इजरायल पहुंचते ही आतंकवाद पर क्लीयर मैसेज दे दिया है। ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर पिछले सप्ताहांत यहूदी पर्व हनुक्का का जश्न मना रहे लोगों पर हुए आतंकवादी हमले की मंगलवार को कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि भारत और इजराइल, दोनों की आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति है। जयशंकर इजराइल की दो दिवसीय यात्रा के तहत मंगलवार को तेल अवीव पहुंचे। उन्होंने अपने इजराइली समकक्ष गिदोन मोशे सार के साथ संवाददाताओं से बातचीत की। जयशंकर ने कहा कि सबसे पहले, मैं बॉन्डी बीच पर हनुक्का उत्सव के दौरान हुए आतंकवादी हमले में जानमाल के नुकसान पर हार्दिक संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं। मैं कहना चाहता हूं कि हम इस हमले की कड़ी निंदा करते हैं।

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