कोरोना महामारी के बीच ऑफिस जाना सही या गलत? वर्कप्लेस में होंगे ये सारे बदलाव

कोरोना महामारी के बीच ऑफिस जाना सही या गलत? वर्कप्लेस में होंगे ये सारे बदलाव

कोरोना लॉकडाउन के 3 महीनों बाद दोबारा ऑफिस जाना कई लोगों के लिए बदलाव लेकर आया है। पहले और अब में ऑफिस जाने में लोगों को कई बदलाव देखने को मिले। इसको लेकर सिद्धार्थ लोसाल्का जो कि अब ऑफिस जाना शुरू कर चुकें है बताते है कि ऑफिस एक फिल्म के सेट जैसा लगता है।

कोरोना महामारी के बीच जून महीनें के अंत से सरकार ने अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिससे जॉब करने वाले कई कर्मचारियों को अब वापस ऑफिस बुलाया जा रहा है। कोरोना लॉकडाउन के 3 महीनों बाद दोबारा ऑफिस जाना कई लोगों के लिए बदलाव लेकर आया है। पहले और अब में ऑफिस जाने में लोगों को कई बदलाव देखने को मिले। इसको लेकर सिद्धार्थ लोसाल्का जो कि अब ऑफिस जाना शुरू कर चुकें है बताते है कि ऑफिस एक फिल्म के सेट जैसा लगता है। अपने घर से गुरूग्राम ऑफिस जाते वक्त सिद्धार्थ को सड़कों पर लगभग कोई यातायात नहीं दिखता है। जिस ऑफिस  में 650 से ज्यादा लोग काम करते है आज वहीं केवल मुट्ठी भर लोग ही नजर आ रहे है। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों पर जाम और ट्रैफिक से एक हंगामा वाला माहौल बन जाता था आज वहीं सड़कें सूनी पड़ी है जो कि काफी विचित्र है। वह बताते है कि अभी भी ऐसी कई कंपनी है जो अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की इजाजत दे रही है लेकिन हम जैसे लोग जून के अनलॉक के बाद से ही ऑफिस जाना शुरू कर चुके है। 

इसे भी पढ़ें: 600 करोड़ की GST चोरी का खुलासा, तीन कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

ऑफिस में हैंडशेक करना भी हुआ मुश्किल

महामारी के बीच, ऑफिस में काम करना बिल्कुल भी "सामान्य स्थिति" नहीं है। बता दें कि ऑफिस में लोगों के बीच हमेशा डर बना रहता है । चाहे मिटिंग हो या टीम मिटिंग इस बीच लोगों के अदंर कोरोना से संक्रमित होने का डर बना हुआ है। अब ऑफिस में कोई हैंडशैक नहीं करता है, बातचीत भी अब सोशल डिस्टेसिंग के बीच होती है। केंद्र के एक ऑडिटर समीरा सतीजा ने कहा कि, ऑफिस  पर जाना एक चुनौती भी है।सार्वजनिक परिवहन के अभाव में, लोगों को या तो कैब या ड्राइव करनी पड़ती है, जो दोनों ही महंगे ऑप्शन हैं। उन्होंने कहा कि मेट्रो अब नहीं चल रही है, इसलिए मैं एक टैक्सी लेती हूं और हर दिन 1,000 रुपये तक खर्च करती हूं।"दिल्ली या नोएडा से गुरुग्राम जाने वाले कई लोग इस समस्या का सामना कर रहे हैं। उनमें से कुछ पहले कारपूल करते थे, लेकिन अब वो भी संभव नहीं हैं।