FPI Buying: अगस्त के पहले सप्ताह में खरीदे ₹12,921 करोड़ के शेयर, बना रहा आकर्षण

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अगस्त के शुरुआती हफ्ते के दौरान भारतीय शेयर बाजार में ₹12,921 करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज किया है। अमेरिकी दरों में कटौती की संभावना, कच्चे तेल की घटती कीमतें और स्थिर रुपया इस लिवाली के मुख्य कारण रहे हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों ने बॉन्ड बाजार में भी ₹622 करोड़ का निवेश किया है।

नयी दिल्ली, नौ अगस्त भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में भी जारी है। विदेशी निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय शेयरों में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया है। बेहतर होती वृहद आर्थिक स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की स्थिरता की वजह से एफपीआई के लिए भारतीय बाजार आकर्षक बना हुआ है।

अगस्त का यह आंकड़ा जुलाई में किए गए ₹20,200 करोड़ के निवेश के बाद आया है। इसके पहले लगातार चार माह तक एफपीआई बिकवाल रहे थे। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की निकासी की थी।

इससे पहले फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। हालांकि, हालिया खरीदारी के बावजूद वर्ष 2026 में विदेशी निवेशक अब भी भारतीय शेयर बाजार में ₹2.41 लाख करोड़ के शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं। यह आंकड़ा पूरे 2025 में दर्ज ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी अधिक है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में एफपीआई का रुख बदलने के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीद, कच्चे तेल की नरम कीमतें और रुपये की स्थिरता जैसे कारक प्रमुख हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बेहतर वृद्धि और मुद्रास्फीति संबंधी अनुमान से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। निवेश मंच ट्रैक के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेदांत गुप्ते ने कहा कि भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने के कारण आगे विदेशी निवेश के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि हाल की खरीदारी का एक बड़ा हिस्सा द्वितीयक बाजार के जरिये हुआ है, जो यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में भी बढ़ रही है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार, एफपीआई की खरीदारी में एक महत्वपूर्ण रुझान यह है कि वे वाहन, टिकाऊ उपभोक्ता सामान और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय ऋण या बॉन्ड बाजार में भी बनी हुई है।

समीक्षाधीन अवधि के दौरान एफपीआई ने बॉन्ड बाजार में सामान्य मार्ग के तहत ₹622 करोड़ का निवेश किया है।

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