Apple और Samsung के विरोध के आगे झुकी सरकार: स्मार्टफोन पर 'Aadhaar' ऐप की अनिवार्यता का फैसला वापस

Apple and Samsung Decision to Mandate Aadhaar App on Smartphones Withdrawn
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रेनू तिवारी । Apr 18 2026 3:28PM

इस साल की शुरुआत में, UIDAI ने IT मंत्रालय से Apple और Google सहित स्मार्टफ़ोन बनाने वाली कंपनियों के साथ बातचीत करने को कहा था। इसका मकसद भारत में बिकने वाले सभी नए डिवाइस पर Aadhaar ऐप को पहले से इंस्टॉल करवाना था।

भारत सरकार ने स्मार्टफोन निर्माताओं और उद्योग जगत के कड़े विरोध के बाद उस विवादास्पद योजना को वापस ले लिया है, जिसके तहत देश में बिकने वाले सभी नए स्मार्टफोन्स पर आधार (Aadhaar) ऐप को पहले से इंस्टॉल (Pre-install) करना अनिवार्य किया जाना था। Apple और Samsung जैसी दिग्गज कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ी गंभीर चिंताएं जताई थीं। Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने शुक्रवार को इस फ़ैसले की पुष्टि की।

इस साल की शुरुआत में, UIDAI ने IT मंत्रालय से Apple और Google सहित स्मार्टफ़ोन बनाने वाली कंपनियों के साथ बातचीत करने को कहा था। इसका मकसद भारत में बिकने वाले सभी नए डिवाइस पर Aadhaar ऐप को पहले से इंस्टॉल करवाना था। Aadhaar — एक 12 अंकों की डिजिटल पहचान, जो उंगलियों के निशान और आँखों की पुतलियों (iris) के स्कैन से जुड़ी होती है — का इस्तेमाल पहले से ही 1.34 अरब से ज़्यादा लोग कई तरह की सेवाओं के लिए कर रहे हैं। इनमें बैंकिंग और टेलीकॉम वेरिफिकेशन से लेकर एयरपोर्ट पर तेज़ी से एंट्री मिलना शामिल है।

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हालाँकि, इस प्रस्ताव की समीक्षा करने के बाद, IT मंत्रालय ने इस ऐप को अनिवार्य बनाने की दिशा में आगे न बढ़ने का फ़ैसला किया। UIDAI ने इस योजना को वापस लेने का कोई खास कारण नहीं बताया, और रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने इस बारे में पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। यह फ़ैसला इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफ़ोन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों (stakeholders) के साथ बातचीत के बाद लिया गया। इससे पता चलता है कि इस फ़ैसले को लेने में इंडस्ट्री की राय ने अहम भूमिका निभाई।

खास बात यह है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब इस तरह की कोशिश की गई हो। असल में, पिछले दो सालों में सरकार ने स्मार्टफ़ोन पर पहले से इंस्टॉल किए गए सरकारी ऐप को बढ़ावा देने की यह छठी कोशिश थी। हर बार, इन प्रस्तावों का डिवाइस बनाने वाली कंपनियों ने विरोध किया है।

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कंपनियों ने लगातार यूज़र की प्राइवेसी, डिवाइस की सुरक्षा और संभावित कम्पैटिबिलिटी (अनुकूलता) से जुड़ी चिंताओं को उठाया है। इसके अलावा कुछ व्यावहारिक चिंताएँ भी थीं; निर्माताओं ने चेतावनी दी थी कि इस तरह के आदेशों से उत्पादन लागत बढ़ सकती है, खासकर तब जब भारत के लिए बनने वाले डिवाइस और निर्यात के लिए बनने वाले डिवाइस के लिए अलग-अलग उत्पादन लाइनें लगानी पड़ें। Reuters द्वारा बताए गए सूत्रों के अनुसार, Apple और Samsung ने विशेष रूप से सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े प्रभावों को लेकर बार-बार अपनी चिंताएँ ज़ाहिर की थीं।

दिसंबर में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब सरकार ने कुछ समय के लिए स्मार्टफ़ोन पर एक टेलीकॉम सुरक्षा ऐप को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया था। इंडस्ट्री के कड़े विरोध के बाद कुछ ही दिनों में उस आदेश को वापस ले लिया गया था। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, IT मंत्रालय आम तौर पर डिवाइस पर ज़बरदस्ती ऐप इंस्टॉल करवाने के पक्ष में नहीं होता, जब तक कि ऐसा करना बेहद ज़रूरी न हो।

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