ATF Export Duty Hike | कच्चे तेल में उछाल के बीच सरकार का बड़ा फैसला! डीजल-ATF पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स, पेट्रोल पर मिली राहत

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ANI
रेनू तिवारी । Jul 16 2026 10:30AM

सरकार ने 16 जुलाई से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए डीजल और विमानन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर बढ़ा दिया है जबकि पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क घटाया है। डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) बढ़ाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर से 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 16 जुलाई से शुरू होने वाले नए पखवाड़े के लिए डीजल और विमानन ईंधन (ATF) के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) में भारी बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि, निर्यातकों को राहत देते हुए पेट्रोल पर लगने वाले शुल्क को घटाया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, ये संशोधित दरें 16 जुलाई से तुरंत प्रभावी हो गई हैं। डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) बढ़ाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर से 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।इसी तरह, एटीएफ के निर्यात पर एसएईडी 15 जुलाई तक लागू 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

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दूसरी ओर, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क चार रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि संशोधित शुल्क 16 जुलाई से प्रभावी होंगे। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर शुल्क लगाया था और इसके बाद से हर पखवाड़े इसकी दरों में संशोधन किया जा रहा है। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी शुल्क लगाया गया था।

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मंत्रालय ने साथ ही कहा कि घरेलू खपत के लिए निकाले जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण देश में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया था। साथ ही इसका मकसद पश्चिम एशिया जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के मद्देनजर निर्यातकों को मूल्य अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना भी है। सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट की पृष्ठभूमि में पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्यात को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से यह अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया है।

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