IDBI Bank का Net Profit दूसरी तिमाही में गिरकर 2,205 करोड़ रुपये रहा

IDBI Bank का Net Profit दूसरी तिमाही में गिरकर 2,205 करोड़ रुपये रहा
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आईडीबीआई बैंक ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 2,205 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में एनएसडीएल में हिस्सेदारी बिक्री से मिला एकमुश्त लाभ शामिल होने के कारण बैंक का मुनाफा 3,627 करोड़ रुपये रहा था। चालू तिमाही में बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार आया है और सकल एनपीए घटकर 2.12 प्रतिशत रह गया है।

आईडीबीआई बैंक का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 39 प्रतिशत घटकर 2,205 करोड़ रुपये रह गया। बैंक ने शनिवार को यह जानकारी दी। बैंक ने पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 3,627 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था और इसमें नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) में अपनी रणनीतिक हिस्सेदारी की बिक्री से हुआ 1,699 करोड़ रुपये का एकमुश्त लाभ भी शामिल था।

बैंक ने एनएसडीएल के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में 799.87 रुपये प्रति शेयर के निर्गम मूल्य पर 2.22 करोड़ से अधिक शेयर की पेशकश की थी। ये शेयर एनएसडीएल में बैंक की 11.11 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर थे। इससे बैंक को 1,698.96 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।

बैंक की दूसरी तिमाही के नतीजे ऐसे समय में आए हैं, जब केंद्र सरकार ने इसी सप्ताह आईडीबीआई बैंक में अपनी और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को करीब 53,000 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी है। यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सबसे बड़ा विदेशी निवेश और बैंक के लंबे समय से लंबित निजीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। आईडीबीआई बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में उसकी कुल आय बढ़कर 9,865 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 9,594 करोड़ रुपये थी।

चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में बैंक की ब्याज आय बढ़कर 8,512 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 7,104 करोड़ रुपये थी। बैंक की शुद्ध ब्याज आय भी 29 प्रतिशत बढ़कर 4,228 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 3,285 करोड़ रुपये थी। परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर बैंक ने सुधार दर्ज किया।

सितंबर, 2026 के अंत में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) कुल अग्रिमों के 2.12 प्रतिशत पर आ गईं, जबकि एक साल पहले यह 2.65 प्रतिशत थीं। इसी तरह, शुद्ध एनपीए या फंसे कर्ज का अनुपात घटकर 0.17 प्रतिशत रह गया, जो सितंबर, 2025 के अंत में 0.21 प्रतिशत था।

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