India AI Summit: PM मोदी के मंच पर Sam Altman-Dario Amodei ने क्यों नहीं मिलाया हाथ?

Sam Altman-Dario Amodei
प्रतिरूप फोटो
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Ankit Jaiswal । Feb 20 2026 10:41PM

नई दिल्ली में भारत एआई शिखर सम्मेलन के दौरान ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो अमोडेई के बीच दिखी दूरी उनकी व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाती है, जो अब तकनीकी होड़ से आगे निकलकर कारोबारी मॉडल और नैतिकता तक पहुंच गई है।

नई दिल्ली में हुए भारत एआई शिखर सम्मेलन के दौरान एक छोटा सा पल अचानक दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर देश-विदेश के 13 बड़े उद्योग और राजनीतिक नेताओं के साथ तस्वीर खिंचवा रहे थे। उन्होंने सभी से कहा कि एक-दूसरे का हाथ पकड़कर ऊपर उठाएं। इसी दौरान सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोडेई ने एक-दूसरे का हाथ नहीं पकड़ा और बस अपनी बाहें ऊपर उठाकर खड़े रहे। यही दृश्य बाद में काफी चर्चा में रहा।

दरअसल, ऑल्टमैन और अमोडेई इस समय दुनिया की दो बड़ी एआई कंपनियों  ओपनएआई और एंथ्रोपिक का लीड कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक ओपनएआई का मूल्यांकन लगभग 500 अरब डॉलर के आसपास बताया जाता है, जबकि एंथ्रोपिक की कीमत करीब 380 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है।

अमोदेई पहले ओपनएआई में वरिष्ठ पद पर काम कर चुके हैं। बाद में कंपनी की व्यावसायिक दिशा को लेकर मतभेद होने पर उन्होंने अलग होकर एंथ्रोपिक की सह-स्थापना की। तभी से दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती गई है। इस साल एंथ्रोपिक के “क्लॉड” नाम के मॉडल और उसके कोडिंग औजारों को बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, जिससे मुकाबला और तेज हो गया है।

मंच पर हुई यह हल्की असहजता का वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर तेजी से फैल गया। बाद में ऑल्टमैन ने एक वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें उस समय यह साफ समझ नहीं आया था कि मंच पर ठीक क्या करना है। उनकी कंपनी के प्रवक्ता ने भी वीडियो की पुष्टि की।

दोनों कंपनियों के बीच मतभेद सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विज्ञापन नीति को लेकर भी खुलकर सामने आए हैं। एंथ्रोपिक ने हाल ही में एक बड़े खेल मुकाबले के दौरान विज्ञापन जारी कर यह संकेत दिया कि उसका चैटबॉट उपयोगकर्ताओं को विज्ञापन नहीं दिखाएगा। इसके जवाब में ऑल्टमैन ने सामाजिक मंच पर लंबा संदेश लिखकर कहा कि विज्ञापन आधारित व्यवस्था से सेवाएं ज्यादा लोगों तक सस्ती और सुलभ हो सकती हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब केवल नई तकनीक तक सीमित नहीं है। इसमें नैतिकता, कारोबारी ढांचा और डाटा के इस्तेमाल की नीतियां भी शामिल हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच पर दिखने वाले छोटे इशारे भी बड़े संकेत दे जाते हैं।

भारत भी एआई के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में वैश्विक कंपनियों की मौजूदगी और उनके बीच की प्रतिस्पर्धा यह साफ दिखाती है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र और भी अहम होने वाला है।

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