Indian Economy Growth | भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार: चालू वित्त वर्ष में 7.8% तक रह सकती है GDP ग्रोथ, डेलॉयट इंडिया का अनुमान

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रेनू तिवारी । Jan 14 2026 2:39PM

डेलॉयट ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.5 से 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो मजबूत घरेलू मांग और नीतिगत सुधारों पर आधारित है। रिपोर्ट में उच्च आधार प्रभाव के कारण अगले वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि दर धीमी होकर 6.6 से 6.9 प्रतिशत रहने की आशंका भी जताई गई है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती का प्रदर्शन कर रही है। प्रमुख सलाहकार कंपनी डेलॉयट इंडिया (Deloitte India) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक विकास दर चालू वित्त वर्ष (2025-26) में शानदार प्रदर्शन करने वाली है।

क्यों रॉकेट बनी Indian Economy 

भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 7.5 से 7.8 प्रतिशत रहने जबकि 2026-27 में 6.6 से 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। सलाहकार कंपनी डेलॉयट इंडिया ने यह जानकारी दी। डेलॉयट ने कहा कि भारत के लिए 2025 को घरेलू मांग में ‘‘जुझारूपन’’, राजकोषीय, मौद्रिक एवं श्रम नीतियों में निर्णायक सुधारों और व्यापार नीतियों में पुनर्समायोजन के वर्ष के रूप में याद किया जाएगा।

चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई।इसके बावजूद कि व्यापार में व्यवधान, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत बदलाव एवं अस्थिर पूंजी प्रवाह जैसी वैश्विक चुनौतियां मौजूद थीं। डेलायट इंडिया को उम्मीद है कि त्योहारी मांग और सेवाओं की मजबूत गतिविधियों से वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी की वृद्धि दर 7.5 से 7.8 प्रतिशत रहेगी।

इसके अलावा, कंपनी ने बयान में कहा कि उच्च आधार एवं वैश्विक अनिश्चितताओं के बने रहने से वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि दर घटकर 6.6 से 6.9 प्रतिशत हो सकती है। डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा, ‘‘ भारत की मजबूती कोई संयोग नहीं है। यह लंबे समय से अपनाई गई वृद्धि-समर्थक नीतियों का परिणाम है।

वर्ष 2025: नीतिगत सुधारों का काल

डेलॉयट ने वर्ष 2025 को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक "ऐतिहासिक वर्ष" बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल को मुख्य रूप से तीन कारणों से याद किया जाएगा:

घरेलू मांग में जुझारूपन (Resilience): वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की आंतरिक मांग मजबूत बनी रही।

निर्णायक सुधार: राजकोषीय (Fiscal), मौद्रिक (Monetary) और श्रम नीतियों (Labor Policies) में बड़े और निर्णायक बदलाव किए गए।

व्यापार नीतियां: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलती परिस्थितियों के अनुसार व्यापार नीतियों का पुनर्समायोजन (Readjustment) किया गया।

भविष्य की राह

हालांकि 2026-27 के लिए अनुमानित वृद्धि दर (6.6-6.9%) चालू वर्ष की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन डेलॉयट का मानना है कि यह भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। स्थिर नीतियां और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर निवेश इस विकास को गति देते रहेंगे।

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