International Tea Day 2026: चीन में हुई खोज, पर Assam की चाय ने कैसे जीता दुनिया का दिल? जानें पूरी History

आज यानी की 21 मई को इंटरनेशनल चाय दिवस मनाया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीयों की पहली पसंदीदा चाय की शुरूआत भारत में नहीं बल्कि हजारों साल पहले चीन में हुई थी।
आज यानी की 21 मई को इंटरनेशनल चाय दिवस मनाया जा रहा है। आज भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां पर दिन की शुरूआत चाय के बिना होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीयों की पहली पसंदीदा चाय की शुरूआत भारत में नहीं बल्कि हजारों साल पहले चीन में हुई थी। आज जिस चाय को अलग-अलग फ्लेवर और मसालों के साथ लोग पीते हैं, उसकी खोज एक खास संयोग से हुई थी। लेकिन धीरे-धीरे यह सिर्फ एक औषधि नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सबसे लोकप्रिय ड्रिंक्स में शामिल हो गई।
चाय की पहली खोज
चाय का इतिहास करीब 5 हजार साल पुराना माना जाता है। चीन के युन्नान प्रांत की पहाड़ियों से इसकी शुरुआत हुई थी। एक चीनी कथा के मुताबिक सम्राट शेन नोंग एक पेड़ के नीचे बैठे थे और वहीं पर पास में पानी उबल रहा था। तभी पेड़ की कुछ पत्तियां उड़कर गर्म पानी में गिर गईं। जब सम्राट ने उस पानी को पिया, तो उसका स्वाद बेहद ताजगी भरा लगा। बताया जाता है यह दुनिया की पहली चाय थी, यह खोज पूरी तरह से एक संयोग थी। लेकिन आगे चलकर इसने पूरी दुनिया की खान-पान की संस्कृति को बदल दिया था।
भारत पहुंची चाय
बता दें कि 17वीं सदी में चीनी व्यापारियों के जरिए चाय यूरोप पहुंची। ब्रिटिश लोगों को चाय का स्वाद इतना ज्यादा पसंद आया कि वह बड़ी मात्रा में चाय खरीदने लगे। लेकिन उस दौरान चाय का व्यापार चीन के कंट्रोल में था।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहती थी। जिस कारण से भारत में चाय उगाने की कोशिश शुरू हुई। शुरूआत में चाय के बीज चीन से भारत लाए गए, लेकिन असली सफलता उनको तब मिली, जब असम में जंगली चाय के पौधे पाए गए।
हालांकि असम की चाय चीन की चाय से अलग थी। इसकी पत्तियां बड़ी थीं और इसका स्वाद काफी मजबूत था। यही कारण है कि भारतीय ब्लैक टी पूरी दुनिया में फेमस हो गए।
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