Net FDI गिरावट पर Jitin Prasada का बड़ा बयान: Indian Companies की बढ़ती Global Ambition है असली वजह

भारत के शुद्ध एफडीआई प्रवाह में गिरावट मुख्य रूप से भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में बढ़ते निवेश और विदेशी निवेशकों द्वारा लाभ की निकासी के कारण है। यह रुझान भारतीय कॉर्पोरेट जगत की वैश्विक विस्तार की महत्वाकांक्षा और घरेलू पूंजी की मजबूती को दर्शाता है। सरकार ने इसे रणनीतिक संपत्तियों और नई तकनीक हासिल करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।
सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में हालिया रूझान विदेशों में भारत के अधिक निवेश और विदेशों से ज्यादा कमाई को वापस देश में लाने से संबंधित है। शुद्ध एफडीआई 2022-23 के 28 अरब अमेरिकी डॉलर और 2023-24 के 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर 2024-25 में 1 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया।
वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि ‘आउटवर्ड डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट’ (विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश) के प्रवाह में बढ़ोतरी भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षाओं और क्षमताओं को प्रदर्शित करती है, क्योंकि वे रणनीतिक संपत्तियां हासिल करने, नये बाजारों तक पहुंचने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए विदेशों का रुख कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशों से आय अर्जित करना या विनिवेश एक परिपक्व होते निवेश वातावरण का संकेत है, जहां विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के बाद अपने निवेश से लाभ कमा रहे हैं। साथ ही, घरेलू निवेशकों को मालिकाना हक का हस्तांतरण घरेलू पूंजी और उद्यमिता क्षमता के मजबूत होने को दर्शाता है। प्रसाद ने कहा, ‘‘शुद्ध एफडीआई प्रवाह में हालिया रूझान भारत की ओर से एफडीआई में बढ़ोतरी और साथ ही विदेश से ज्यादा कमाई लाने से संबंधित है।
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