Yemen War से लाखों लोग विस्थापित, जान बचाने के लिए जान को खतरे में डाल कर समुद्र पार कर रहे लोग

Yemen War
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दक्षिणी यमन के अदन में विस्थापितों के शिविरों की तस्वीर और भी हृदयविदारक है। एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी पत्नी ड्रोन हमले में मारी गईं। वह अपने तीन बच्चों के साथ बिना सामान के शिविर में पहुंचा। उसने कहा कि उनके पास आटा तक नहीं है, न बिस्तर है और न ही कपड़े।

ईरान समर्थित हूती लड़ाकों और सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों के बीच तेज हुई जंग ने हजारों परिवारों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है, जबकि लाल सागर और बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य पर बढ़ता नियंत्रण विश्व व्यापार के लिए गंभीर खतरे का संकेत दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार, संघर्ष के नए दौर में एक लाख से अधिक लोग यमन के भीतर विस्थापित हो चुके हैं और हजारों अन्य लोग समुद्र के रास्ते जिबूती पहुंचने को मजबूर हुए हैं। यह पलायन मौत और विनाश से बचने की मजबूरी है। पलायन कर रहे लोगों ने मीडिया को बताया है कि जिस गांव में वह रहते थे, वहां हूती लड़ाकों के पहुंचने के बाद हवाई हमले शुरू हो गए। दुकानें बंद हो गईं और भोजन तक मिलना मुश्किल हो गया। आखिरकार उन्हें परिवार के साथ एक भीड़भरी नाव में समुद्र पार करना पड़ा। लहरों से जूझते बच्चों की हालत ने इस संकट की भयावहता को उजागर कर दिया।

दक्षिणी यमन के अदन में विस्थापितों के शिविरों की तस्वीर और भी हृदयविदारक है। एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी पत्नी ड्रोन हमले में मारी गईं। वह अपने तीन बच्चों के साथ बिना सामान के शिविर में पहुंचा। उसने कहा कि उनके पास आटा तक नहीं है, न बिस्तर है और न ही कपड़े। यह बयान युद्ध की वास्तविक कीमत बताता है। एक और व्यक्ति ने मीडिया को बताया कि वह पैर में छर्रे का घाव लेकर केवल पहने हुए कपड़ों में घर से निकल गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके बच्चों को अदन तक पहुंचने के लिए तीन दिन पैदल चलना पड़ा। वहीं तैज प्रांत के शिविरों में पानी के लिए संघर्ष कर रहे परिवारों की स्थिति बताती है कि युद्ध के साथ भूख, प्यास और बीमारी का खतरा भी बढ़ रहा है।

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हम आपको बता दें कि यमन पहले ही वर्षों के युद्ध की राख में झुलस चुका है। हूतियों द्वारा 2014 में राजधानी सना पर कब्जे के बाद सऊदी नेतृत्व में सैन्य हस्तक्षेप हुआ था। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम ने बड़े पैमाने की लड़ाई को काफी हद तक रोका था, लेकिन स्थायी राजनीतिक समाधान की कोशिशें क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ ठहर गईं। अब वही पुराना घाव फिर खुल गया है।

इस बार संकट का सामरिक आयाम कहीं अधिक व्यापक है। हूतियों ने लाल सागर के लगभग पूरे यमनी तट और बाब-अल-मंदब के भीतर स्थित द्वीपों पर कब्जा मजबूत कर लिया है। बाब-अल-मंदब को विश्व व्यापार की महत्वपूर्ण समुद्री धमनियों में गिना जाता है। यहां अस्थिरता का अर्थ केवल यमन में संघर्ष नहीं, बल्कि तेल, गैस और अन्य वस्तुओं की वैश्विक आवाजाही पर सीधा दबाव है।

उधर, हूतियों और सऊदी अरब के बीच हमले लगातार बढ़ रहे हैं। हूतियों का दावा है कि सऊदी वायुसेना ने हाल के दिनों में सैकड़ों हवाई हमले किए हैं, जबकि उन्होंने सीमा पार मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हूतियों ने एक सऊदी लड़ाकू विमान गिराने का दावा भी किया और उसके मलबे का दृश्य सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि संघर्ष अब सीमित आंतरिक युद्ध की सीमा से बाहर निकलकर व्यापक क्षेत्रीय टकराव का रूप ले रहा है।

इस पूरे संकट में ईरान की भूमिका भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। हूतियों को ईरान के साथ जुड़े सैन्य संगठन के रूप में देखा जाता है और उनकी बढ़ती सैन्य क्षमता ने तेहरान के प्रभाव को लाल सागर तक विस्तारित किया है। इससे ईरान के विरुद्ध चल रहे संघर्ष का एक नया मोर्चा खुल गया है। परिणामस्वरूप पश्चिम एशिया की एक समुद्री पट्टी अब ऊर्जा और सैन्य प्रतिस्पर्धा का संवेदनशील केंद्र बन गई है।

स्थिति इसलिए और गंभीर है क्योंकि इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो चुका था। युद्ध से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का आवागमन इस मार्ग से होता था। अब अमेरिकी नौसेना वहां जहाजों को मार्गदर्शन देने का प्रयास कर रही है, जबकि ईरान ने जलडमरूमध्य को बंद रखने की बात कही है। दूसरी ओर, सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन पर हमले के बाद उसका संचालन भी रोकना पड़ा है। इस तरह ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों पर भी दबाव बढ़ गया है।

इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें इस सप्ताह लगभग 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहीं। अमेरिका में डीजल की खुदरा कीमत भी अभूतपूर्व स्तर के करीब पहुंच गई। इसका अर्थ है कि यमन में दागी गई एक मिसाइल का असर केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं रहता; वह हजारों किलोमीटर दूर परिवहन, उद्योग, खाद्य कीमतों और आम उपभोक्ता की जेब तक पहुंच सकता है।

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब की सैन्य सहायता की अपील को अब तक स्वीकार नहीं किया है और ईरान के साथ समझौते की संभावना की बात कही है। हालांकि जून में हुआ अंतरिम समझौता कुछ ही सप्ताह में विफल हो गया था और उसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए कोई नई बातचीत नहीं हुई।

देखा जाये तो यमन की त्रासदी इसलिए भी भयावह है क्योंकि यहां रणनीतिक महत्व और मानवीय पीड़ा एक ही बिंदु पर आकर टकरा रहे हैं। एक ओर बाब-अल-मंदब और लाल सागर विश्व अर्थव्यवस्था की धमनियां हैं, दूसरी ओर इन्हीं तटों पर बच्चे भोजन, पानी और सुरक्षित छत के लिए तरस रहे हैं। युद्ध ने हजारों परिवारों से घर, रोजी-रोटी और अपनों को छीन लिया है।

अब सबसे बड़ा खतरा यही है कि यदि लाल सागर, बाब-अल-मंदब और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग लंबे समय तक अस्थिर रहे, तो क्षेत्रीय युद्ध का प्रभाव वैश्विक संकट में बदल सकता है। साथ ही ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और मानवीय सहायता, तीनों एक साथ दबाव में आ जाएंगे।

बहरहाल, यमन से उठती आवाज इसलिए केवल एक देश की पीड़ा नहीं है। यह चेतावनी है कि जब क्षेत्रीय शक्तियों की सैन्य प्रतिस्पर्धा समुद्री व्यापार की जीवनरेखाओं तक पहुंच जाती है, तो उसकी कीमत सबसे पहले आम इंसान चुकाता है। गोलियों और मिसाइलों के बीच सबसे असहाय वही परिवार खड़े हैं, जिनके पास न हथियार हैं, न सत्ता और न सुरक्षित ठिकाना, सिर्फ जीवित बच निकलने की बेताब कोशिश हर ओर दिखाई दे रही है।

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