भारत का Services PMI सितंबर में 55.2 पर पहुंचा, मजबूत घरेलू मांग से तीन महीने के उच्च स्तर पर

एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक अगस्त के 54.1 से बढ़कर सितंबर में 55.2 पर दर्ज किया गया। नए ऑर्डरों में बढ़ोतरी और मजबूत घरेलू मांग के दम पर सेवा क्षेत्र में जून के बाद सबसे तेज विस्तार देखा गया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मांग और निजी क्षेत्र के समग्र उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ।
नयी दिल्ली, छह अक्टूबर भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि सितंबर में तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। नए ऑर्डर में तेजी के साथ मजबूत घरेलू मांग से क्षेत्र की वृद्धि को समर्थन मिला। मंगलवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई।
मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक अगस्त के 54.1 से बढ़कर सितंबर में 55.2 हो गया। यह जून के बाद गतिविधियों में सबसे तेज बढ़ोतरी का संकेत है। सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में बढ़ोतरी के बावजूद तिमाही औसत पिछली अवधि के स्तर से ऊपर नहीं जा सका।
सर्वेक्षण में कहा गया, ‘‘वास्तव में, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में वृद्धि मार्च 2022 तक के तीन महीनों के बाद सबसे कमजोर रही।’’ क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) के अनुसार, 50 से ऊपर का आंकड़ा विस्तार, जबकि 50 से नीचे का आंकड़ा संकुचन दर्शाता है। एसएंडपी ग्लोबल सेवा क्षेत्र की करीब 400 कंपनियों के एक समूह को भेजी गई प्रश्नावली के जवाब के आधार पर एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई तैयार करता है। सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि डिजिटल समाधान, खाद्य, बीमा, ऋण, सॉफ्टवेयर, परिवहन और पर्यटन एवं यात्रा की बढ़ती मांग से प्रेरित रही।
इसके अलावा, भारतीय सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग में भी सुधार हुआ। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ब्रिटेन और अमेरिका से मांग बढ़ने की जानकारी दी। एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने कहा, ‘‘पीएमआई सर्वेक्षण से पता चला कि भारत के सेवा क्षेत्र में सुधार जारी रहा, जिसे मजबूत होती घरेलू मांग का समर्थन मिला।
साथ ही, निर्यात कारोबार में भी वृद्धि जारी रही, हालांकि इसकी रफ्तार धीमी हुई।’’ रोजगार के मोर्चे पर, बेहतर ऑर्डर और आने वाली परियोजनाओं के कारण सेवा प्रदाताओं ने सितंबर में अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की। हालांकि, रोजगार वृद्धि की दर अगस्त की तुलना में धीमी रही। इस बीच, वित्त वर्ष की दूसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही के अंत में लागत का दबाव कम हुआ और कच्चे माल की कीमतों में मुद्रास्फीति की दर नवंबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई।
भंडारी ने कहा, ‘‘सेवा प्रदाताओं पर कच्चे माल की लागत का दबाव 10 महीने के निचले स्तर पर आ गया, जिससे बिक्री कीमतें बढ़ाने की जरूरत कम हुई। परिदृश्य सकारात्मक बना रहा और सेवा प्रदाताओं ने लगातार दूसरे महीने भविष्य की गतिविधियों को लेकर अपनी उम्मीदों में सुधार की जानकारी दी।’’ भारतीय सेवा कंपनियां मजबूत मांग और ग्राहकों की बढ़ती पूछताछ से आने वाले वर्ष को लेकर आशावादी बनी रहीं। करीब 16 प्रतिशत से कुछ कम सर्वेक्षण प्रतिभागियों को उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में उत्पादन बढ़ेगा, जबकि बाकी को मौजूदा स्तर में कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद है।
इस बीच, एचएसबीसी इंडिया समग्र पीएमआई उत्पादन सूचकांक अगस्त के 54.3 से बढ़कर सितंबर में 55.9 हो गया। यह जून के बाद निजी क्षेत्र के उत्पादन में सबसे तेज बढ़ोतरी का संकेत है। समग्र पीएमआई सूचकांक, तुलनीय विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई सूचकांकों का भारित औसत है।
भार, आधिकारिक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के सापेक्ष आकार को दर्शाता है। निजी क्षेत्र में लागत दबाव लगभग चार वर्ष में सबसे अधिक रहा। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने बिक्री कीमतों में अधिक वृद्धि की, वहीं दूसरी ओर विनिर्माताओं ने दो वर्ष में सबसे कमजोर वृद्धि का संकेत दिया।
समग्र रूप से महंगाई की दर पिछले महीने के मुकाबले लगभग अपरिवर्तित रही। सर्वेक्षण के अनुसार, विनिर्माण उद्योग में रोजगार सृजन फिर शुरू होने और सेवा प्रदाताओं की लगातार वृद्धि के कारण समग्र स्तर पर रोजगार बढ़ा।
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