डीपीआईआईटी की टॉय सेक्टर प्लेबुक रिपोर्ट के अनुसार 2047 तक वैश्विक खिलौना बाजार में भारत की हिस्सेदारी चार प्रतिशत हो सकती है

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2047 तक वैश्विक खिलौना बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग चार प्रतिशत हो सकती है। वर्तमान में वैश्विक खिलौना निर्यात में देश की हिस्सेदारी केवल 0.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट में खिलौना विनिर्माण, गुणवत्ता और ब्रांडिंग में निवेश बढ़ाकर निर्यात केंद्रित विकास पर जोर दिया गया है।
नयी दिल्ली, 29 जुलाई देश का खिलौना उद्योग वर्ष 2047 तक वैश्विक खिलौना बाजार में करीब चार प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। उस समय तक वैश्विक बाजार का आकार लगभग 454.3 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की ‘टॉय सेक्टर प्लेबुक’ रिपोर्ट में कहा गया है, वर्तमान में भारत की वैश्विक खिलौना निर्यात में हिस्सेदारी केवल 0.3 प्रतिशत है। ऐसे में अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे प्रमुख खिलौना आयातक देशों में निर्यात बढ़ाकर भारतीय उद्योग के पास तेज वृद्धि का बड़ा अवसर है। रिपोर्ट में देश के खिलौना उद्योग में नवोन्मेष, विनिर्माण और वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रूपरेखा पेश की गयी है।
इसमें कहा गया है कि घरेलू खिलौना बाजार की अनुमानित 10.1 प्रतिशत और वैश्विक खिलौना बाजार की 6.2 प्रतिशत वृद्धि दर को देखते हुए भारत का खिलौना उद्योग 2047 तक वैश्विक बाजार में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। सरकार ने 2032 तक वैश्विक खिलौना बाजार में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय खिलौना उद्योग को निर्यात-आधारित विकास पर जोर देना होगा।
साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और ब्रांडिंग, पैकेजिंग और उत्पाद डिजाइन में निवेश बढ़ाना होगा। इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि उद्योग केवल खिलौनों के ‘असेंबली’ कार्य तक सीमित न रहे, बल्कि उपकरणों के निर्माण सहित संपूर्ण विनिर्माण परिवेश विकसित करे। इससे भारत खिलौना उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के साथ विनिर्माण क्षमता बढ़ाकर वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत का घरेलू खिलौना बाजार 1.9 अरब डॉलर का था, जिसके 2032 तक 4.1 अरब डॉलर और 2047 तक 17.4 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, वैश्विक खिलौना बाजार का आकार 2024 में 113.9 अरब डॉलर था, जिसके 2032 तक 184.3 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन का लाभ भारत, वियतनाम और मेक्सिको जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को मिल रहा है, क्योंकि कई वैश्विक खिलौना कंपनियां अपने परिचालन को वैकल्पिक बाजारों की ओर स्थानांतरित कर रही हैं।
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