भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर लागू कर रहीं AI, ठोस फायदे दिखने लगे: Oracle

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लास वेगास में आयोजित ओरेकल एआई वर्ल्ड में शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि देश के उद्योग अब कृत्रिम मेधा के प्रायोगिक दौर से बाहर आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि लागत और कुशल कर्मचारियों की कमी जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, पर समय और खर्च की बचत दिखने से कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

(अदिति कश्यप) लास वेगास, सात नवंबर ओरेकल इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और जापान एवं एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कंपनी की क्लाउड सेवा नेटसुइट के क्षेत्रीय प्रबंध निदेशक शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि भारतीय कंपनियां कृत्रिम मेधा (एआई) के प्रायोगिक इस्तेमाल से आगे बढ़कर अब इसे बड़े स्तर पर अपना रही हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों को इसके वास्तविक लाभ भी मिल रहे हैं। हालांकि, लागत, कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।

कुमार ने ओरेकल एआई वर्ल्ड 2026 से इतर पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, करीब डेढ़ साल पहले तक हम एआई के प्रायोगिक इस्तेमाल की बात कर रहे थे। अब हम इसे बड़े स्तर पर लागू होते देख रहे हैं और इसके वास्तविक लाभ भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां नई प्रौद्योगिकी को अपनाने से हिचकिचाती नहीं हैं, लेकिन वे पहले यह जानना चाहती हैं कि इससे उन्हें वास्तव में क्या फायदा होगा।

कुमार ने कहा, कंपनियां यह देखना चाहती हैं कि एआई से उनका समय बचेगा, लागत कम होगी या कोई अन्य लाभ मिलेगा। कुछ साल पहले सुरक्षा और कामकाज के प्रदर्शन को लेकर काफी आशंकाएं थीं, क्योंकि लोगों को इन पहलुओं पर भरोसा नहीं था। उन्होंने कहा कि जब कंपनियों को एआई के ठोस लाभ दिखाई देने लगते हैं, तो वे इसे तेजी से अपनाती हैं।

भारत में एआई के इस्तेमाल की रफ्तार धीमी करने वाली चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि लागत निश्चित रूप से उनमें से एक है। कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ओरेकल विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का काम कर रही है। इसमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और पॉलिटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थी भी शामिल हैं।

उन्होंने बुनियादी ढांचे को भी एक चुनौती बताया, लेकिन कहा कि देश में नए डेटा सेंटर स्थापित होने से इस समस्या का समाधान किया जा रहा है। कुमार ने कहा, लोग एआई को अपनाने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें इससे होने वाला लाभ दिखाई दे। एआई और मनुष्यों के बीच निर्णय लेने की जिम्मेदारी के बंटवारे के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि एआई के मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसके इस्तेमाल की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि संगठनों में ऐसे लोगों का होना जरूरी है, जो यह आकलन कर सकें कि एआई सही नतीजे दे रहा है या नहीं और उसका इस्तेमाल तय उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है या नहीं। कुमार ने कहा कि कंपनियों की अपनी निगरानी व्यवस्था के अलावा एआई के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में भी समय के साथ बदलाव होंगे। उन्होंने कहा, नियमन के क्षेत्र में बदलाव होंगे।

जैसे-जैसे यह उद्योग परिपक्व होगा, नियमों और व्यवस्थाओं का भी विकास होगा। कुमार ने बताया कि ओरेकल भारत में 33 वर्षों से काम कर रही है और देश के 15 से अधिक शहरों में उसकी मौजूदगी है। कंपनी पिछले करीब 10 वर्षों से भारत में दो अंकों की वृद्धि दर्ज कर रही है।

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