भारत को एआई और साइबर सुरक्षा में घरेलू क्षमता विकसित करनी होगी: आईटी सचिव एस. कृष्णन

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने एआई और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि बढ़ते डिजिटल खतरों से निपटने के लिए स्वदेशी मॉडल और सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करना अनिवार्य है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने भारत में तकनीकी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया है। उन्होंने सोमवार को कहा कि देश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में आत्मनिर्भर होने के लिए अपनी घरेलू क्षमताओं को बढ़ाना होगा। कृष्णन के अनुसार साइबर खतरों की बढ़ती जटिलता को देखते हुए अब स्वदेशी समाधानों को मजबूत करने के अलावा भारत के पास कोई अन्य विकल्प नहीं है।

डिजिटलीकरण के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए आईटी सचिव ने कहा कि इससे न केवल व्यापार सुगम हुआ है बल्कि आर्थिक कुशलता में भी सुधार आया है। हालांकि इसके साथ ही कंपनियों और आम जनता के लिए साइबर जोखिमों का खतरा भी काफी बढ़ा है। उन्होंने विशेष रूप से एआई के क्षेत्र में स्वयं के मॉडल डेटा और कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस अवसर पर कृष्णन ने बैंकिंग वित्तीय सेवाओं बीमा और डिजिटल भुगतान क्षेत्र से जुड़ी डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26 का दूसरा संस्करण भी जारी किया। यह विस्तृत रिपोर्ट वित्तीय संस्थानों और नियामकों को उभरते हुए साइबर खतरों का विश्लेषण प्रदान करती है। उन्होंने आगाह किया कि वर्तमान में साइबर अपराधी एआई का उपयोग कर और भी जटिल हमलों को अंजाम दे रहे हैं जिसमें व्यक्तिगत अपराधों से लेकर राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले साइबर युद्ध तक शामिल हैं।

रिपोर्ट को आईटी मंत्रालय सर्ट-इन भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल और साइबर सुरक्षा कंपनी एसआईएसए ने मिलकर तैयार किया है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि नए साइबर खतरों के उभरने और उनके दुरुपयोग के बीच का समय अब सालों से घटकर केवल कुछ हफ्तों तक सिमट गया है। एसआईएसए के सीईओ दर्शन शांतमूर्ति ने भी कहा कि नवाचार और उसके गलत इस्तेमाल के बीच का अंतर कम होने के कारण अब साइबर सुरक्षा रणनीतियों में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।

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